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बीएसए दफ्तर का बाबू निलंबित
jaunpur
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:19 AM IST
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रजिस्टर चेक करते जिलाधिकारी।
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डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने गुरुवार को बीएसए कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां तमाम खामियां मिली। डीएम ने उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर बनाकर गायब एक बाबू का एक दिन का वेतन काटने और निलंबित करने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। प्रसूति और चाइल्ड केयर अवकाश सें संबंधित सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई। इस दौरान बीएसए दफ्तर में अफरातफरी का माहौल रहा। दफ्तर में डीएम ने एक घंटे तक जांच पड़ताल की।
डीएम दोपहर 1:5 बजे अचानक बीएसए दफ्तर पहुंचे। वह सीधे पहली मंजिल पर स्थित लेखाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। यहां शिक्षकों के जीपीएफ, पेंशन आदि से संबंधित अभिलेखों की जांच की। कर्मचारियों की उपस्थिति देखने के बाद वह भूतल पर स्थित बीएसए कार्यालय पहुंचे। यहां बीएसए डा. राजेंद्र सिंह मौजूद नहीं थे। बताया गया कि वह विद्यालय के निरीक्षण में केराकत क्षेत्र में गए हैं। डीएम ने परिषदीय और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में छात्र संख्या और कार्यालय में तैनात लिपिकों के पटल के बारे में जानकारी मांगी तो डीएम को गोलमोल जवाब मिला। इस पर उन्होंने कार्य विभाजन रजिस्टर मांगा तो 15 मिनट तक रजिस्टर खोज जाता रहा। इस पर डीएम ने कार्य विभाजन का पटल देखने वाले बाबू को तलब किया तो पता चला कि लिपिक विजय शर्मा कार्यालय में नहीं हैं। किसी ने बताया कि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है वह अस्पताल में हैं। इसपर जिलाधिकारी ने पता किया तो पता चला कि वह वाराणसी के फूलपुर थाने में हैं। सड़क हादसे के बाद उनके बेटे की गाड़ी वहीं पर थी। लेकिन यहां कार्यालय में उपस्थिति पंजिका पर विजय शर्मा का हस्ताक्षर भी दर्ज था। इस पर उनका एक दिन का वेतन काटने और निलंबित करने की संस्तुति शासन को भेज दी।
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डीएम दोपहर 1:5 बजे अचानक बीएसए दफ्तर पहुंचे। वह सीधे पहली मंजिल पर स्थित लेखाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। यहां शिक्षकों के जीपीएफ, पेंशन आदि से संबंधित अभिलेखों की जांच की। कर्मचारियों की उपस्थिति देखने के बाद वह भूतल पर स्थित बीएसए कार्यालय पहुंचे। यहां बीएसए डा. राजेंद्र सिंह मौजूद नहीं थे। बताया गया कि वह विद्यालय के निरीक्षण में केराकत क्षेत्र में गए हैं। डीएम ने परिषदीय और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में छात्र संख्या और कार्यालय में तैनात लिपिकों के पटल के बारे में जानकारी मांगी तो डीएम को गोलमोल जवाब मिला। इस पर उन्होंने कार्य विभाजन रजिस्टर मांगा तो 15 मिनट तक रजिस्टर खोज जाता रहा। इस पर डीएम ने कार्य विभाजन का पटल देखने वाले बाबू को तलब किया तो पता चला कि लिपिक विजय शर्मा कार्यालय में नहीं हैं। किसी ने बताया कि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है वह अस्पताल में हैं। इसपर जिलाधिकारी ने पता किया तो पता चला कि वह वाराणसी के फूलपुर थाने में हैं। सड़क हादसे के बाद उनके बेटे की गाड़ी वहीं पर थी। लेकिन यहां कार्यालय में उपस्थिति पंजिका पर विजय शर्मा का हस्ताक्षर भी दर्ज था। इस पर उनका एक दिन का वेतन काटने और निलंबित करने की संस्तुति शासन को भेज दी।
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