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इरशाद की मौत दुर्घटना या कत्ल
Jaunpur
Updated Tue, 26 Mar 2013 05:31 AM IST
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मल्हनी बाजार/ करंजाकला। सरायख्वाजा थाने के कोठवार गांव में अबूझ हाल में चली गोली से युवक का भेजा उड़ गया। यह साफ नहीं कि गोली खुद चल गई या फिर किसी ने चलाई। पुलिस और परिवार के लोग इत्तेफाकन गोली चलने की बात कह रहे हैं। पुलिस इस बात पर घंटों उलझी रही है कि जिस पोजीशन में गोली लगी है उससे इत्तेफाकन हुई घटना कैसे कहा जा सकता है ? चौकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने अवैध असलहा रखने के जुर्म में मृतक के ही खिलाफ केस दर्ज कर मौके से देशी तमंचा बरामद करने का दावा किया है।
सरायख्वाजा थाने के जंगीपुर कला निवासी इरशाद (24) पुत्र स्व. मजहर का शहर के ख्वाजगी टोला में भी घर है। उसके परिवार के लोग सब्जी का कारोबार करते हैं लेकिन इरशाद गांव में ही रहकर खेतीबारी करता था। रविवार की शाम इरशाद अपनी पत्नी के साथ कोठवार गांव स्थित अपने बहनोई गुड्डू के यहां बीमार बहन को देखने गया था। सोमवार को इरशाद के साथ उसका भांजा साहिल, समीर तथा पड़ोस का सुरेश भी मौजूद था। इसी बीच गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब परिवार के लोग पहुंचे तो इरशाद गिर चुका था। उसके माथे को चीरती हुई गोली निकल गई। तुरंत इरशाद को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिर्पोट में मृतक के माथे से गेाली बरामद हुई है। डाक्टर यह नहीं पाए कि किस गन में इस्तेमाल करने वाली गोली थी।
इधर घटना की खबर लगते ही थानेदार आलमगीर, एसआई त्रिभुवन यादव को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उस वक्त घर में महिलाए और केवल बच्चे थे। घर में खून बिखरा हुआ था और बगल में हथौड़ी पड़ी थी। घटनास्थल पर एक गड्ढा भी देखा गया। पुलिस ने सबसे पहले असलहे की तलाश की। कुआें से लेकर कोने कोन के अलावा छत पर भी तलाश की गई लेकिन असलहा नहीं मिला। पुलिस ने इरशाद के बहनोई गुड्डू से फोन पर बात की। गुड्डू ने कहा कि एक घंटे में असलहा मिल जाएगा। पुलिस इस बात से परेशान थी कि इरशाद को गोली कैसे लगी। जिला अस्पताल से रिपोर्ट आई कि माथे के बीच वाले हिस्से को चीरती हुई गोली बाहर निकल गई। इरशाद की मौत एक दुर्घटना है या कत्ल यह रहस्य बना हुआ है।
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इरशाद की मौत के कई सवाल अनुत्तरित हैं। इरशाद के बहनोई गुड्डू ने कैसे दावा किया कि एक घंटे में असलहा मिल जाएगा। पुलिस ने उसकी बात पर यकीन कैसे की? घटना स्थल पर एसओ के साथ गए एसआई त्रिभुवन यादव ने माना भी कि असलहे का नाल खोलने पर यदि असावधानी वश गोली चलती है तो वह फर्श पर लगेगी। असलहे की नाल बंद करने पर गोली चलती है तो या तो हवाई फायर होगा या फिर दीवार पर गोली लगेगी। माथे पर गोली लगने की संभावना न के बराबर है। ऐसा तभी संभव है जब या तो व्यक्ति आत्महत्या करे या फिर कोई निशाना साध कर माथे पर ही गोेली चलाए। बहरहाल इन सवालों के बीच मृतक के साढ़ू सादिक की तहरीर पर इत्तेफाकन गोली चलने से मौत का मामला दर्ज कर लिया गया। गोली चलने से हुई मौत के रहस्यमयी प्रकरण पर एसओ आलमगीर ने बताया कि सादिक की तहरीर पर इत्तेफाकन हुई घटना का मामला दर्ज करने के साथ मृतक के खिलाफ भी अवैध असलहा रखने का केस दर्ज किया गया है।
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सरायख्वाजा थाने के जंगीपुर कला निवासी इरशाद (24) पुत्र स्व. मजहर का शहर के ख्वाजगी टोला में भी घर है। उसके परिवार के लोग सब्जी का कारोबार करते हैं लेकिन इरशाद गांव में ही रहकर खेतीबारी करता था। रविवार की शाम इरशाद अपनी पत्नी के साथ कोठवार गांव स्थित अपने बहनोई गुड्डू के यहां बीमार बहन को देखने गया था। सोमवार को इरशाद के साथ उसका भांजा साहिल, समीर तथा पड़ोस का सुरेश भी मौजूद था। इसी बीच गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब परिवार के लोग पहुंचे तो इरशाद गिर चुका था। उसके माथे को चीरती हुई गोली निकल गई। तुरंत इरशाद को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिर्पोट में मृतक के माथे से गेाली बरामद हुई है। डाक्टर यह नहीं पाए कि किस गन में इस्तेमाल करने वाली गोली थी।
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इधर घटना की खबर लगते ही थानेदार आलमगीर, एसआई त्रिभुवन यादव को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उस वक्त घर में महिलाए और केवल बच्चे थे। घर में खून बिखरा हुआ था और बगल में हथौड़ी पड़ी थी। घटनास्थल पर एक गड्ढा भी देखा गया। पुलिस ने सबसे पहले असलहे की तलाश की। कुआें से लेकर कोने कोन के अलावा छत पर भी तलाश की गई लेकिन असलहा नहीं मिला। पुलिस ने इरशाद के बहनोई गुड्डू से फोन पर बात की। गुड्डू ने कहा कि एक घंटे में असलहा मिल जाएगा। पुलिस इस बात से परेशान थी कि इरशाद को गोली कैसे लगी। जिला अस्पताल से रिपोर्ट आई कि माथे के बीच वाले हिस्से को चीरती हुई गोली बाहर निकल गई। इरशाद की मौत एक दुर्घटना है या कत्ल यह रहस्य बना हुआ है।
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इरशाद की मौत के कई सवाल अनुत्तरित हैं। इरशाद के बहनोई गुड्डू ने कैसे दावा किया कि एक घंटे में असलहा मिल जाएगा। पुलिस ने उसकी बात पर यकीन कैसे की? घटना स्थल पर एसओ के साथ गए एसआई त्रिभुवन यादव ने माना भी कि असलहे का नाल खोलने पर यदि असावधानी वश गोली चलती है तो वह फर्श पर लगेगी। असलहे की नाल बंद करने पर गोली चलती है तो या तो हवाई फायर होगा या फिर दीवार पर गोली लगेगी। माथे पर गोली लगने की संभावना न के बराबर है। ऐसा तभी संभव है जब या तो व्यक्ति आत्महत्या करे या फिर कोई निशाना साध कर माथे पर ही गोेली चलाए। बहरहाल इन सवालों के बीच मृतक के साढ़ू सादिक की तहरीर पर इत्तेफाकन गोली चलने से मौत का मामला दर्ज कर लिया गया। गोली चलने से हुई मौत के रहस्यमयी प्रकरण पर एसओ आलमगीर ने बताया कि सादिक की तहरीर पर इत्तेफाकन हुई घटना का मामला दर्ज करने के साथ मृतक के खिलाफ भी अवैध असलहा रखने का केस दर्ज किया गया है।