{"_id":"5fbd4b7f8ebc3e9bc36974ad","slug":"5-64-crores-spent-still-not-improved-condition-of-animal-shelters-jaunpur-news-vns559921351","type":"story","status":"publish","title_hn":"5.64 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं सुधरी पशु आश्रयों की दशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
5.64 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं सुधरी पशु आश्रयों की दशा
विज्ञापन
जौनपुर। हाल ही में गोमाता की पूजा कर उनकी सुरक्षा का संकल्प तो सबने लिया, लेकिन पशु आश्रय स्थलों में उनकी बदहाली पर किसी को तरस नहीं है। आश्रय स्थलों में कहीं पशु ठंड से मर रहे हैं तो कहीं चारा-पानी का अभाव और समुचित चिकित्सा से उनकी जान जा रही है। जिम्मेदार बस एक-दूसरे के पाले में गेंद डालकर पल्ला झाड़ने में लगे हैं। ठंड शुरू होने के बाद विभिन्न आश्रय स्थलों में रोज पशु दम तोड़ रहे हैं। कहीं भी ठंड से बचाव के लिए ठोस उपाय नहीं किया जा सका है।
छुट्टा पशुओं की देख भाल के लिए सरकार ने अक्तूबर 2018 में पशु आश्रय बनाकर रखने का निर्देश दिया था। इसके लिए पशु पालन विभाग को नोडल विभाग नामित किया है। अभी तक पशु पालन विभाग को छह करोड़ 25 लाख रुपया मिल चुके हैं। इसमें से पांच करोड़ 64 लाख 973 रूपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन पशु आश्रयों की हालत सुधर नहीं पाई है। कुल 83 पशु आश्रय स्थलों में 7204 पशु रखे गए हैं। इधर ठंड भी शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक पशुओं को ठंड से बचाने के लिए जिम्मेदार कोई उपाय नहीं कर सके हैं। न तो पशु आश्रय के चारों तरफ तिरपाल से घेरा गया है और न ही अलाव का इंतजाम किया गया है। दिन में तो पशुओं को धूप में खड़ा होने पर सर्दी से राहत मिल जा रही है, लेकिन सुबह और शाम वह कांपने को मजबूर हैं। ठंड के कारण कृषि भवन परिसर में बने पशु आश्रय स्थल में पिछले चार दिन के अंदर तीन पशु, उमरी में और छूंछा के पशु आश्रय में इस माह में सात पशु मर चुके हैं।
नहीं है ठंड से बचाव के उपाय, रोज मर रहे पशु
केराकत । तहसील क्षेत्र के सरौनी पश्चिम पट्टी व उमरी गोशाला में पशुओं को ठंड से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए है। गोशाला में एक सीमेंट शेड में पशुओं को रखा गया है, लेकिन उसे चारों तरफ से अभी तक ढ़का नहीं गया है। जिससे पशु ठिठूरने को विवश है। सरौनी पश्चिम पट्टी में स्थित गोशाला में दो गायें बीमार हैं। मरने वाले पशुओं को गोशाला के बगल में गड्ढा खोद कर उसी में डाल कर छोड़ दिया गया है। मिट्टी भी पूरी तरह से नहीं दबाया गया था। दुर्गंध आने से आसपस के लोगों को दिक्कत हो रही है। उमरी स्थित गोशाला में ठंड से पांच पशु दम तोड़ दिए हैं। तीन गंभीर रूप से बीमार हैं । पशुओं को ठंड से बचाने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
गोशाला में जीतने अंदर, उससे दोगुने आस-पास हैं पशु
डोभी। क्षेत्र के खलिया ग्राम पंचायत में बने गोशाला में मात्र 25 बेसहारा पशु हैं, जबकि गोशाला के बाहर आसपास करीब 50 पशु रह रहे हैं। पशुओं को सिर्फ भूसा व पुआल खिलाया जा रहा है। गोशाला में शेड में पशुओं को रखा गया है। उनको ठंड से बचाने के लिए चारों तरफ से घेरा भी नहीं गया है और अलाव भी नहीं जलाया जा रहा है। इतना ही नहीं चार माह से दो रखवालों के मानदेय भी नहीं मिल रहा है।
ठंड से सात पशु तोड़ चुके हैं दम
करंजाकला। क्षेत्र के छूंछा गांव में बने पशु आश्रय में इस समय 343 पशु हैं। ठंड से बचाव के लिए न तो शेड को चारों तरफ से घेरा गया है और न ही धुआं आदि की व्यवसथा की गई है। वहीं सात पशु मर चुके हैं। प्रधान विजय शंकर यादव ने बताया कि जुलाई से लेकर अब तक एक पैसा नहीं मिला है। पशुओं को चारा-पानी आदि व्यवस्था करने में अभी तक नौ लाख का कर्जदार हो गया हूं।
गोशाला में पशुओं के चारा-पानी की व्यवस्था का जिम्मा ग्राम पंचायतों का है। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए ब्लाक के पशु चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई है। वह रोस्टर के आधार पर आश्रय स्थल पर पहुंचकर जांच करते हैं। ठंड से बचाव के लिए सभी गोशाला व्यवस्थापकों को एक सप्ताह के अंदर शेड, तिरपाल और अलाव इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
विज्ञापन
छुट्टा पशुओं की देख भाल के लिए सरकार ने अक्तूबर 2018 में पशु आश्रय बनाकर रखने का निर्देश दिया था। इसके लिए पशु पालन विभाग को नोडल विभाग नामित किया है। अभी तक पशु पालन विभाग को छह करोड़ 25 लाख रुपया मिल चुके हैं। इसमें से पांच करोड़ 64 लाख 973 रूपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन पशु आश्रयों की हालत सुधर नहीं पाई है। कुल 83 पशु आश्रय स्थलों में 7204 पशु रखे गए हैं। इधर ठंड भी शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक पशुओं को ठंड से बचाने के लिए जिम्मेदार कोई उपाय नहीं कर सके हैं। न तो पशु आश्रय के चारों तरफ तिरपाल से घेरा गया है और न ही अलाव का इंतजाम किया गया है। दिन में तो पशुओं को धूप में खड़ा होने पर सर्दी से राहत मिल जा रही है, लेकिन सुबह और शाम वह कांपने को मजबूर हैं। ठंड के कारण कृषि भवन परिसर में बने पशु आश्रय स्थल में पिछले चार दिन के अंदर तीन पशु, उमरी में और छूंछा के पशु आश्रय में इस माह में सात पशु मर चुके हैं।
विज्ञापन
नहीं है ठंड से बचाव के उपाय, रोज मर रहे पशु
केराकत । तहसील क्षेत्र के सरौनी पश्चिम पट्टी व उमरी गोशाला में पशुओं को ठंड से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए है। गोशाला में एक सीमेंट शेड में पशुओं को रखा गया है, लेकिन उसे चारों तरफ से अभी तक ढ़का नहीं गया है। जिससे पशु ठिठूरने को विवश है। सरौनी पश्चिम पट्टी में स्थित गोशाला में दो गायें बीमार हैं। मरने वाले पशुओं को गोशाला के बगल में गड्ढा खोद कर उसी में डाल कर छोड़ दिया गया है। मिट्टी भी पूरी तरह से नहीं दबाया गया था। दुर्गंध आने से आसपस के लोगों को दिक्कत हो रही है। उमरी स्थित गोशाला में ठंड से पांच पशु दम तोड़ दिए हैं। तीन गंभीर रूप से बीमार हैं । पशुओं को ठंड से बचाने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
गोशाला में जीतने अंदर, उससे दोगुने आस-पास हैं पशु
डोभी। क्षेत्र के खलिया ग्राम पंचायत में बने गोशाला में मात्र 25 बेसहारा पशु हैं, जबकि गोशाला के बाहर आसपास करीब 50 पशु रह रहे हैं। पशुओं को सिर्फ भूसा व पुआल खिलाया जा रहा है। गोशाला में शेड में पशुओं को रखा गया है। उनको ठंड से बचाने के लिए चारों तरफ से घेरा भी नहीं गया है और अलाव भी नहीं जलाया जा रहा है। इतना ही नहीं चार माह से दो रखवालों के मानदेय भी नहीं मिल रहा है।
ठंड से सात पशु तोड़ चुके हैं दम
करंजाकला। क्षेत्र के छूंछा गांव में बने पशु आश्रय में इस समय 343 पशु हैं। ठंड से बचाव के लिए न तो शेड को चारों तरफ से घेरा गया है और न ही धुआं आदि की व्यवसथा की गई है। वहीं सात पशु मर चुके हैं। प्रधान विजय शंकर यादव ने बताया कि जुलाई से लेकर अब तक एक पैसा नहीं मिला है। पशुओं को चारा-पानी आदि व्यवस्था करने में अभी तक नौ लाख का कर्जदार हो गया हूं।
गोशाला में पशुओं के चारा-पानी की व्यवस्था का जिम्मा ग्राम पंचायतों का है। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए ब्लाक के पशु चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई है। वह रोस्टर के आधार पर आश्रय स्थल पर पहुंचकर जांच करते हैं। ठंड से बचाव के लिए सभी गोशाला व्यवस्थापकों को एक सप्ताह के अंदर शेड, तिरपाल और अलाव इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।