{"_id":"5be87c12bdec22697b116dd3","slug":"154196272211-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्म के मार्ग पर चलकर ही प्राप्त होगा परम धर्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्म के मार्ग पर चलकर ही प्राप्त होगा परम धर्म
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सिरकोनी। मथुरा वृंदावन के आचार्य श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही परम धर्म को प्राप्त किया जा सकता है। धर्म का काम पूरा करने के बाद भगवान का भजन करना चाहिए। वह हुंसेपुर गांव में श्रीमद्भागवत महापुराण अमृत कथा महोत्सव में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बगैर सीढ़ी के आप छत पर नहीं चढ़ सकते और उस ऊंचाई को नहीं प्राप्त कर सकते है। उसी तरह बगैर अपने गृहस्थ धर्म का पालन किए मोक्ष प्राप्ति नहीं हो सकती है। कथा 16 नवंबर तक रोजाना दिन में एक बजे से सायं 6 बजे तक चलेगी।16 नवंबर से 21 नवंबर तक श्रीकृष्ण लीला का आयोजन होगा। कृष्ण लीला का समय सांय 6 बजे से 10 बजे तक। 22 नवम्बर को महाप्रसाद वितरण एवं भण्डारा होगा। इस मौके पर शिवाकांत शुक्ला, डा. अरुण कुमार मिश्रा , मुन्ना गुरु, रमेश सिंह सोलंकी, ट्रेन नाथ पाठक, आशुतोष शुक्ला, बेचन यादव, वीरेंद्र कुमार मिश्रा, संजय यादव, अनुराग शुक्ला, जितेंद्र कुमार शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
भरत जैसा भाई जग में दुर्लभ: निर्मल शुक्ल
बक्शा। क्षेत्र के गौराखुर्द गांव में शारदा प्रसाद सिंह के आवास पर पांच दिवसीय श्री रामकथा के तीसरे दिन प्रतापगढ़ से पधारे मानस मर्मज्ञ प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने कहा कि धरा पर जब जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब प्रभु का अवतार होता है। जब सात्विक लोग अनाचार करें, कन्याओं का अपहरण करें तो धर्म की हानि होती है। जिस समय रावण का आतंक बढ़ा तब रामवतार हुआ। महाराष्ट्र से पधारे पण्डित निर्मल कुमार शुक्ल ने श्रोताओं को त्रेतायुग की भरत चरित्र का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि भरत जैसा भाई जग में दुर्लभ है। भरत का त्याग पारिवारिक एकता की मिशाल है। उन्होंने कहा कि श्री राम साक्षात वृक्ष है। श्री शुक्ल भरत कैकेई संवाद का सुंदर चित्रण कर भक्तो को भावविह्वल कर दिया। मार्कंडेय सिंह मुन्ना, युवा समाजसेवी अनित कुमार सिंह, श्यामनारायण जायसवाल आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि बगैर सीढ़ी के आप छत पर नहीं चढ़ सकते और उस ऊंचाई को नहीं प्राप्त कर सकते है। उसी तरह बगैर अपने गृहस्थ धर्म का पालन किए मोक्ष प्राप्ति नहीं हो सकती है। कथा 16 नवंबर तक रोजाना दिन में एक बजे से सायं 6 बजे तक चलेगी।16 नवंबर से 21 नवंबर तक श्रीकृष्ण लीला का आयोजन होगा। कृष्ण लीला का समय सांय 6 बजे से 10 बजे तक। 22 नवम्बर को महाप्रसाद वितरण एवं भण्डारा होगा। इस मौके पर शिवाकांत शुक्ला, डा. अरुण कुमार मिश्रा , मुन्ना गुरु, रमेश सिंह सोलंकी, ट्रेन नाथ पाठक, आशुतोष शुक्ला, बेचन यादव, वीरेंद्र कुमार मिश्रा, संजय यादव, अनुराग शुक्ला, जितेंद्र कुमार शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
भरत जैसा भाई जग में दुर्लभ: निर्मल शुक्ल
बक्शा। क्षेत्र के गौराखुर्द गांव में शारदा प्रसाद सिंह के आवास पर पांच दिवसीय श्री रामकथा के तीसरे दिन प्रतापगढ़ से पधारे मानस मर्मज्ञ प्रकाशचंद्र विद्यार्थी ने कहा कि धरा पर जब जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब प्रभु का अवतार होता है। जब सात्विक लोग अनाचार करें, कन्याओं का अपहरण करें तो धर्म की हानि होती है। जिस समय रावण का आतंक बढ़ा तब रामवतार हुआ। महाराष्ट्र से पधारे पण्डित निर्मल कुमार शुक्ल ने श्रोताओं को त्रेतायुग की भरत चरित्र का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि भरत जैसा भाई जग में दुर्लभ है। भरत का त्याग पारिवारिक एकता की मिशाल है। उन्होंने कहा कि श्री राम साक्षात वृक्ष है। श्री शुक्ल भरत कैकेई संवाद का सुंदर चित्रण कर भक्तो को भावविह्वल कर दिया। मार्कंडेय सिंह मुन्ना, युवा समाजसेवी अनित कुमार सिंह, श्यामनारायण जायसवाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन