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नहर जर्जर होने से छह सौ एकड़ भूमि की नहीं हो पाती सिंचाई
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:29 AM IST
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बदलापुर। लघु डाल नहर द्वारा संचालित सोनौरा पंप कैनाल द्वितीय के हेड से पांच सौ मीटर की दूरी तक नहर जर्जर होने के कारण दर्जन भर से ज्यादा गांवों की छह सौ एकड़ जमीन की सिंचाई का कार्य बाधित है। किसान रबी की बुआई को लेकर चिंतित हैं। बावजूद इसके विभाग अपने दायित्व से कोसों दूर है। गेहूं की बुआई को लेकर किसान परेशान हैं।
लघुडाल नहर विभाग ने सोनौरा पंप कैनाल की स्थापना बक्खोपुर गांव में वर्ष 1969 में किया है। स्थापना होते ही अगल बगल के दर्जनों गांवों के किसानों में यह भरोसा हो गया था कि अब किसानों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। परिणाम स्वरूप स्थाई पावर हाउस की स्थापना भी वर्ष 2015 में हो गई। इसके अंतर्गत 10 क्यूसेक पानी के लिए 150 हार्सपावर तथा 5 क्यूसेक पानी के लिए 75 हार्सपावर की मोटर लगाई गई। स्थापना के कुछ महीनों तक किसानों की जमीन की सिंचाई का कार्य चलता रहा। 43 वर्ष पूर्व हुए पंप कैनाल के निर्माण के कारण नहर जीर्ण शीर्ण हो गई है। पंप पांच छह घंटा चलने के बाद टूटी नहर के कारण पानी वापस गोमती नदी में पहुंच जाता है। जिससे बक्खोपुर, छंगापुर, देवरिया, सलामतपुर, लेदुका, बरबसपुर, बेलावा, बीरभानपुर कटहरी, प्राणपट्टी आदि गांवों के छह सौ एकड़ जमीन की सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऐसी दशा में रबी की बुआई किया जाना संभव नहीं है। ग्रामीणों की तमाम शिकायत के बावजूद विभाग के आला अफसर ऐसे गंभीर प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए हैं। किसान अनिल पांडेय, राम अवतार मौर्य, पिंटू सिंह, संदीप तिवारी, एनबी सिंह, छोटेलाल तिवारी, रामप्रकाश, विजय श्रीवास्तव, रामधनी, अमरेज यादव आदि ने प्रशासन से नहर की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
लघुडाल नहर विभाग ने सोनौरा पंप कैनाल की स्थापना बक्खोपुर गांव में वर्ष 1969 में किया है। स्थापना होते ही अगल बगल के दर्जनों गांवों के किसानों में यह भरोसा हो गया था कि अब किसानों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। परिणाम स्वरूप स्थाई पावर हाउस की स्थापना भी वर्ष 2015 में हो गई। इसके अंतर्गत 10 क्यूसेक पानी के लिए 150 हार्सपावर तथा 5 क्यूसेक पानी के लिए 75 हार्सपावर की मोटर लगाई गई। स्थापना के कुछ महीनों तक किसानों की जमीन की सिंचाई का कार्य चलता रहा। 43 वर्ष पूर्व हुए पंप कैनाल के निर्माण के कारण नहर जीर्ण शीर्ण हो गई है। पंप पांच छह घंटा चलने के बाद टूटी नहर के कारण पानी वापस गोमती नदी में पहुंच जाता है। जिससे बक्खोपुर, छंगापुर, देवरिया, सलामतपुर, लेदुका, बरबसपुर, बेलावा, बीरभानपुर कटहरी, प्राणपट्टी आदि गांवों के छह सौ एकड़ जमीन की सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऐसी दशा में रबी की बुआई किया जाना संभव नहीं है। ग्रामीणों की तमाम शिकायत के बावजूद विभाग के आला अफसर ऐसे गंभीर प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए हैं। किसान अनिल पांडेय, राम अवतार मौर्य, पिंटू सिंह, संदीप तिवारी, एनबी सिंह, छोटेलाल तिवारी, रामप्रकाश, विजय श्रीवास्तव, रामधनी, अमरेज यादव आदि ने प्रशासन से नहर की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
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