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घनी आबादी के बीच चल रहा पटाखा बनाने का कारोबार
Updated Thu, 18 Oct 2018 02:01 AM IST
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मछलीशहर। स्थानीय कस्बे के सादीगंज मोहल्ले में घनी आबादी के बीच पटाखा बनाने का काम चल रहा है। पटाखा कारोबारी इसी आबादी के बीच घरों में बारूद भी स्टोर कर रहे हैं। दीपावली पर कारोबार से मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्ष 2015 में इसी मोहल्ले में पटाखा विस्फोट के चलते तीन लोगों की जान गंवाने के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं ली। अगर कभी जरा भी चूक हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
दीपावली पर्व को देखते हुए पटाखा कारोबारी तेजी से पटाखा का निर्माण कराने में जुटे हैं। पटाखा बनाकर उसे आबादी वाले क्षेत्र में ही डंप किया जा रहा है। यहां बने पटाखों की आपूर्ति आस पास के दूसरे जिलों में भी होती है। 2011 में तत्कालीन इंस्पेक्टर ईशा खां ने व्यापारियों के यहां छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध पटाखे बरामद किए थे। पुलिस की उस छापेमारी के बाद पटाखा कारोबारियों ने घर में बारूद और पटाखों को डंप करने के बजाय बस्ती में बाहर कहीं खाली जगह पर जमीन के अंदर पटाखा रखने लगे थे। मोहल्ले में एक कुड़े के ढेर में भारी मात्रा में पटाखा छिपाकर रखा गया था। 19 अप्रैल 2015 को इसी कूड़े में विस्फोट होने से झुलसे साहिल गुप्ता (11), गुफरान (11) और सलीम (9) मौत हो गई थी। जबकि रिजवान (10) घायल हो गए थे। उक्त घटना के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध व्यापारियों द्वारा पटाखा निर्माण तथा डंप किए हुए स्थान को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुकदमा पंजीकृत किया गया था। कुछ दिन तक मामले को लेकर सतर्कता बरतने के बाद पुलिस चुप बैठ गई। जिसका नतीजा है कि एक बार फिर से घनी आबादी के बीच पटाखा का कोराबार शुरू हो गया है। कारोबारी दीपावली के पटाखे और पटाखा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बारूद इसी आबादी के बीच ही डंप कर रहे हैं। इस संबंध में सीओ मछलीशहर एके शुक्ला का कहना है कि आबादी के बीच पटाखा कारोबार चलने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो गलत है। पूरे कस्बे में जांच कराई जाएगी। अगर को आबादी के बीच पटाखा बनाते या बेचते पकड़ा गया तो कार्रवाई होगी।
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दीपावली पर्व को देखते हुए पटाखा कारोबारी तेजी से पटाखा का निर्माण कराने में जुटे हैं। पटाखा बनाकर उसे आबादी वाले क्षेत्र में ही डंप किया जा रहा है। यहां बने पटाखों की आपूर्ति आस पास के दूसरे जिलों में भी होती है। 2011 में तत्कालीन इंस्पेक्टर ईशा खां ने व्यापारियों के यहां छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध पटाखे बरामद किए थे। पुलिस की उस छापेमारी के बाद पटाखा कारोबारियों ने घर में बारूद और पटाखों को डंप करने के बजाय बस्ती में बाहर कहीं खाली जगह पर जमीन के अंदर पटाखा रखने लगे थे। मोहल्ले में एक कुड़े के ढेर में भारी मात्रा में पटाखा छिपाकर रखा गया था। 19 अप्रैल 2015 को इसी कूड़े में विस्फोट होने से झुलसे साहिल गुप्ता (11), गुफरान (11) और सलीम (9) मौत हो गई थी। जबकि रिजवान (10) घायल हो गए थे। उक्त घटना के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध व्यापारियों द्वारा पटाखा निर्माण तथा डंप किए हुए स्थान को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए मुकदमा पंजीकृत किया गया था। कुछ दिन तक मामले को लेकर सतर्कता बरतने के बाद पुलिस चुप बैठ गई। जिसका नतीजा है कि एक बार फिर से घनी आबादी के बीच पटाखा का कोराबार शुरू हो गया है। कारोबारी दीपावली के पटाखे और पटाखा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बारूद इसी आबादी के बीच ही डंप कर रहे हैं। इस संबंध में सीओ मछलीशहर एके शुक्ला का कहना है कि आबादी के बीच पटाखा कारोबार चलने की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो गलत है। पूरे कस्बे में जांच कराई जाएगी। अगर को आबादी के बीच पटाखा बनाते या बेचते पकड़ा गया तो कार्रवाई होगी।
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