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भारतीय राजनीति के सूर्य थे अटल

Sat, 18 Aug 2018 12:56 AM IST
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:56 AM IST
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भारतीय राजनीति के सूर्य थे अटल
जौनपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्घांजलि देने का तांता दिनभर लगा रहा। गैर राजनैतिक दलों के लोगों ने भी उनकी दिल से प्रशंसा किया है।
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पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे पुरोधा हुए जिनकी तुलना सूर्य से की जाए तो उचित होगा। क्योंकि जैसे सूर्य कभी अस्त नहीं होता। वैसे ही भारतीय राजनीति में अटल एक विचार बनकर सदैव अपने आदर्शों के प्रकाश से मार्गदर्शित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उनसे मिलने का पहली बार अवसर मिला। राजनीति में आने के बाद विधानसभा और लोकसभा के प्रतिनिधि के रूप में जब भी उनसे मिला उन्होंने पितातुल्य सम्मान दिया। अटल जी राजनेता नहीं भारतीय राजनीति के पुरोधा थे। प्रगतिवादी और सकारात्मक सोच उनके रोम-रोम में बसी थी।
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टीडी कालेज में आयोजित शोकसभा में प्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि जब उनकी सरकार गिर रही थी तो वह बचा सकते थे किंतु उन्होंने अनैतिक साधनों का सहारा लेना उचित नहीं समझा। भाजपा नेता राजबहादुर सिंह ने कहा कि उनके व्यक्तिगत आग्रह पर साबरमति एक्सप्रेस को फैजाबाद से वाराणसी तक चलाए थे। इस मौके पर दुष्यंत सिंह, श्रीप्रकाश सिंह, डा. अजय सिंह, राकेश सिंह, अशोक कुमार सिंह रघुवंशी, डा. महेंद्र त्रिपाठी, डा. आरएन ओझा ने भी अपनी बातों को रखा। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था अपूर्वा भारती ने भी शोकसभा आयोजित कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर डा. एके सिंह, राधेश्याम पांडेय, वीरसेन सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। मड़ियाहूं स्नातकोत्तर महाविद्यालय में डा. एसके सिंह प्राचार्य की अध्यक्षता में शोकसभा आयोजित की गई। जिसमें वक्ताओं ने महाविभूति को प्रणाम करते हुए उनके जीवन दर्शन को आत्मसात करने का निर्णय लिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख डा. दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में शोकसभा हुई। जिसमें कहा गया कि 1985 और 1998 में विद्यार्थी परिषद के अधिवेशन और स्वर्ण जयंती उत्सव में अटल जी का सानिध्य जिले के कई कार्यकर्ताओं को मिला। इस मौके पर डा. अजय दूबे, रमेश यादव, सचिन तिवारी, विकास ओझा, ऋषिकेश श्रीवास्तव, अवकाश सिंह, डा. देवमणि दूबे, उद्देश्य सिंह, मोनू वर्मा, कौतूक उपाध्याय आदि मौजूद रहे। ब्रज सेवा संस्थान की उर्मिला पाठक, ब्रजनाथ पाठक अध्यक्ष दीवानी अधिवक्ता संघ ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। राज कालेज में हुई शोकसभा में प्राचार्य डा. विष्णु चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि संसद में जब अटल जी बोलते थे तो सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी बातों को सुनते थे। इस मौके पर डा. अखिलेश्वर शुक्ल, डा. आरपी ओझा, डा. अभय प्रताप सिंह, डा. गगन प्रीत कौर, डा. श्याम सुंदर उपाध्याय, डा. विजय प्रताप तिवारी, डा. ओमप्रकाश दूबे, डा. मनोज तिवारी, सुधाकर शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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