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आस्था और विश्वास का केंद्र है करशूलनाथ धाम
Updated Sun, 12 Aug 2018 01:04 AM IST
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बरईपार। सई नदी के उत्तरी तट पर महराजगंज ब्लाक के कंधी गांव में स्थित करशूलनाथ महादेव का अपना महत्व है। शिवलिंग के स्वयंभू होने के कारण यह मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।
सदियों पहले मिर्जापुर के एक व्यापारी कारोबार के सिलसिले में कहीं जा रहे थे, रास्ते में रात हो गई और वह गांव में विश्राम करने लगे। रात्रि निवास के दौरान स्वप्न में भगवान शिव का दर्शन हुआ। उन्होंने बताया कि वे यहीं विराजमान है। व्यापारी ने आसपास के जंगल में खोजबीन की तो उन्हें विशाल शिवलिंग मिला। व्यापारी ने खुदाई करके शिवलिंग को अन्यत्र स्थापित करने का प्रयास किया। मजदूर खुदाई करते गए लेकिन शिवलिंग का अंत नहीं मिला। उन्हें वहां से हटना संभव नहीं हुआ। शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ तो व्यापारी ने उसी स्थल पर चूना पत्थर से मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। श्रावण, मलमास एवं महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों का रेला उमड़ने लगा। दूर-दूर से लोग दर्शन करने आने लगे। श्रद्धा परिसर यात्रियों के लिए धर्मशाला का निर्माण कराया गया है। यहां शनिवार को मेला लगता है और भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर के पुजारी अशोक गिरि का कहना है मंदिर के इतिहास की जानकारी अब किसी को नहीं है। मंदिर के दक्षिण स्थित कूप में लगे शिलालेख कर मंदिर निर्माण संबंधी अभिलेख मौजूद है, जिसे पढ़ना संभव नहीं रह गया है। मंदिर की व्यवस्थापक आशा सिंह का कहना है कि महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
सदियों पहले मिर्जापुर के एक व्यापारी कारोबार के सिलसिले में कहीं जा रहे थे, रास्ते में रात हो गई और वह गांव में विश्राम करने लगे। रात्रि निवास के दौरान स्वप्न में भगवान शिव का दर्शन हुआ। उन्होंने बताया कि वे यहीं विराजमान है। व्यापारी ने आसपास के जंगल में खोजबीन की तो उन्हें विशाल शिवलिंग मिला। व्यापारी ने खुदाई करके शिवलिंग को अन्यत्र स्थापित करने का प्रयास किया। मजदूर खुदाई करते गए लेकिन शिवलिंग का अंत नहीं मिला। उन्हें वहां से हटना संभव नहीं हुआ। शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ तो व्यापारी ने उसी स्थल पर चूना पत्थर से मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। श्रावण, मलमास एवं महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों का रेला उमड़ने लगा। दूर-दूर से लोग दर्शन करने आने लगे। श्रद्धा परिसर यात्रियों के लिए धर्मशाला का निर्माण कराया गया है। यहां शनिवार को मेला लगता है और भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर के पुजारी अशोक गिरि का कहना है मंदिर के इतिहास की जानकारी अब किसी को नहीं है। मंदिर के दक्षिण स्थित कूप में लगे शिलालेख कर मंदिर निर्माण संबंधी अभिलेख मौजूद है, जिसे पढ़ना संभव नहीं रह गया है। मंदिर की व्यवस्थापक आशा सिंह का कहना है कि महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
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