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दूसरों की भलाई ही सबसे बड़ा धर्म

Sun, 24 Jun 2018 12:52 AM IST
Updated Sun, 24 Jun 2018 12:52 AM IST
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दूसरों की भलाई ही सबसे बड़ा धर्म
सतहरिया। आचार्य गद्दी बड़ैया के महात्मा सतबोध दास ने कहा कि दूसरों की भलाई करना ही दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है। दूसरों को दु:ख देने के समान कोई पाप नहीं है। उन्होंने रामसुंदर पटेल नगर गांव मुगरडीह में स्थित सदगुरु कबीर विज्ञान आश्रम पर आयोजित संत सम्मेलन के आखिरी दिन प्रवचन के दौरान कही।
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उन्होंने सद्गुरुओं के लक्षण पर प्रकाश डाला। कहा कि असली गुरु वह होता है जो विषयों में लीन नहीं रहता है। वह शीलवान व उदारवान होता है। उनमें सद्गुणों का भंडार होता है। संत तथा असंत के बारे में बताया। कहा कि संत चंदन के स्वभाव के समान होता है। जो देवताओं के मस्तक पर चढ़ाया जाता है। इसलिए उसकी सर्वत्र पूजा होती है। असंत कुल्हाड़ी के समान होता है। उसके मुंह को अग्नि में जलाकर फिर घन से पीटा जाता है। ऐसे में उसकी दुर्गति होती है। वह समाज में प्रिय नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जीव अविनाशी होता है। वह किसी भी चीज से मारा नहीं जा सकता है। वह एक शरीर से निकल कर कर्मों के आधार पर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाता है। इस लिए सिर्फ आत्मा ही सत्य व अमर है। शरीर नाशवान होता है। जो इनके रहस्य को समझ लेता है वहीं ज्ञानी होता है। भवसागर से पार हो जाता है। सदगुरु कबीर साहब का संदेश ही निस्प्राण वान को प्राणवान बनाने में अचूक मंत्र है। संत रामचंद्र, बेचन, राम जियावन आदि कबीर पंथी विचार धारा के संतों ने कबीर के कल्याणकारी संदेश को विस्तार से समझाया। आयोजक मंडल में नागेंद्र बहादुर पटेल, उर्मिला देवी, मां जयकली ने संतों का आशीर्वाद लेकर उनकी विदाई की। श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर गौरीशंकर पटेल, सुरेंद्र कुमार पटेल, विजय पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव, प्रसून पटेल आदि मौजूद रहे।
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जलालपुर। क्षेत्र के तालामझवारा ग्राम के सुगुरदीपुर में चल रही रामकथा में ब्यास पंडित वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने कहा कि श्रीराम कथा में जीवन का सार छिपा है। कथा के श्रवण मात्र से ही मानव का जीवन धन्य हो जाता है। उसके जीवन के सारे दुखों का नाश हो जाता है। उसे हर स्थिति में एक समान रहने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि राम नाम तो कण-कण में व्याप्त है। मात्र कुछ ही वक्त निकालकर अगर कोई रामकथा सुन ले तो उसका जीवन सफल हो जाता है। आज हर किसी के जीवन में उतार-चढ़ाव हैं। ऐसे में रामकथा उन्हें सच्चाई का अहसास कराती है। उन्होंने कहा कि रामकथा में वही पहुंचता है, जिस पर भगवान की कृपा होती है। बिना सत्संग के मानव का जीवन अधूरा होता है। जीवन के सारे कष्टों का निवारण सिर्फ राम कथा से ही संभव है। श्रीराम कथा का श्रवण करने मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। जब जब पृथ्वी में पाप बढ़ा है, तब तब भगवान ने विभिन्न रूपों में अवतरित होकर पापियों का नाश किया है। धरती को पापियों से मुक्ति दिलाई है। भगवान श्रीराम मार्यादा पुरुषोत्तम थे। सभी को उनकी लीला का ज्ञान होना चाहिए। उनके चरित्र का अनुसरण करना चाहिए। कथा के अंत में जफराबाद विधायक डा. हरेंद्र प्रताप सिंह ने समाज सेवी स्वर्गीय शोभनाथ सिंह के मूर्ति पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उपस्थित लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया। इस मौके पर डा. सुभाष सिंह, ज्ञानमती सिंह, विद्या, मनोरमा, सरिता सिंह, साहब सिंह, वंशराज सिंह, डा. अखिलेश सिंह, जय शंकर पांडेय, सतीश सिंह, शिव शंकर सिंह, सभा पाठक, सूरत सिंह, रमेश उपाध्याय आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कृष्ण चंद्र चौबे तथा आभार ज्ञापन रमेश सिंह ने किया।
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