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हरे पेड़ों की निगरानी करता है सचल दस्ता
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:31 AM IST
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जौनपुर। पर्यावरण प्रदूषण से निबटने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में पौधरोपण किया जाता है।
पौधों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से पहल की जाती है। पर्यावरण प्रदूषण के लिए कहीं न कही ने हर कोई जिम्मेदार है। नदी, तालाबों की स्थिति की बदतर हो गई है। हालत यह है कि सरकार की ओर से चलाए जा रहा स्वच्छता अभियान भी बेअसर साबित हो रहे है। घरों से निकला हुआ गंदी पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। उसके पीछे कहीं न कही से सरकारी अमला के साथ आम आदमी भी जिम्मेदार है। शहर से निकलने वाले नालों का पानी ट्रीटमेंट किए बिना ही सीधे गोमती नदी में छोड़ दिया जा रहा है। गोमती नदी में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि पानी नहाने लायक भी नहीं रह गया है। गोमती स्वच्छता अभियान की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियान और सर्वे रिपोर्ट में
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पौधों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से पहल की जाती है। पर्यावरण प्रदूषण के लिए कहीं न कही ने हर कोई जिम्मेदार है। नदी, तालाबों की स्थिति की बदतर हो गई है। हालत यह है कि सरकार की ओर से चलाए जा रहा स्वच्छता अभियान भी बेअसर साबित हो रहे है। घरों से निकला हुआ गंदी पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। उसके पीछे कहीं न कही से सरकारी अमला के साथ आम आदमी भी जिम्मेदार है। शहर से निकलने वाले नालों का पानी ट्रीटमेंट किए बिना ही सीधे गोमती नदी में छोड़ दिया जा रहा है। गोमती नदी में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि पानी नहाने लायक भी नहीं रह गया है। गोमती स्वच्छता अभियान की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियान और सर्वे रिपोर्ट में