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रोजा रखने से बढ़कर कोई इबादत नहीं

Sat, 19 May 2018 12:17 AM IST
Updated Sat, 19 May 2018 12:17 AM IST
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रोजा रखने से बढ़कर कोई इबादत नहीं
मडियाहूं। मुसलमानों के लिए माहे रमजान में रोजा रखना अल्लाह की सबसे बडी इबादत है। अल्लाह इस महीने में अपने बन्दों का इंतहान लेता है। उसका बन्दा उसके हुक्म की तामील करता है और इस गर्मी में भूखा प्यासा रहकर अपने रब की रजा हासिल करता है। पेश ईमाम मौलाना हाजी जमीरूददीन साहब ने नमाज जुमा की तकरीर मे फरमाया। पेश ईमाम ने कहा रमजान रहमत बरकत व मगफिरत का महीना है। इन्सान को चाहिए कि वह अपने गुनाहों की अल्लाह से माफी मांगे मौलाना ने कहा की हमारे नबीस ने फरमाया बदनसीब है वो शख़्स जो माहे रमजान को पाए और रब से अपने गुनाहों की बक्शीश न कराले। इस महीने में अल्लाह अपने बन्दो को ऐसे इनाम से नवाजेगा जिसके बारे में उसने न सुना होगा न देखा होगा।
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