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राम राज्य में सादगी पूर्ण था सभी का जीवन
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:28 AM IST
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जौनपुर। शंकरगढ़ से आए डा. दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि रामराज्य में सभी जीव वैर त्यागकर एक साथ रहते थे। शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पीते थे। राष्ट्र में सभी साथ रहेंगे और समस्याओं का हल खोजेंगे तो रामराज्य की स्थापना में देर नहीं लगेगी। वह नगर के टाउन हाल में आयोजित मानस सम्मेलन में प्रवचन कर रहे थे।
आचार्य शिवशंकर मिश्र ने कहा कि भगवान राम के वन चले जाने के बाद भरत जी ने राज्य ते सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया। नंदी गांव में कुटिया बनाकर राज्य का कामकाज देखने लगे। राजा कुटी में रहे और प्रजा महलों में वहीं रामराज्य है। पंडित दिनेश मिश्र ने कहा कि रावण राज्य में भय और डर का वातावरण था। रावण अपने पराक्रम और बाहुबल के आधार पर सबको अपने अधीन रखना चाहता था जबकि भगवान राम के आचरण से सभी लोग राम के अनुरागी बने। कथा की शुरूआत की पंडित राजा राम त्रिपाठी ने हवन पूजन से किया। आर्य समाज के प्रधान देवेंद्र नाथ, महेंद्र नाथ त्यागी, सुरेंद्र कनौजिया, कृष्णा जायसवाल, सूर्य प्रकाश महंथ, विकास मिश्र, अनिल जायसवाल, राकेश मिश्र, ईश्वचंद लाल आदि मौजूद थे।
आचार्य शिवशंकर मिश्र ने कहा कि भगवान राम के वन चले जाने के बाद भरत जी ने राज्य ते सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया। नंदी गांव में कुटिया बनाकर राज्य का कामकाज देखने लगे। राजा कुटी में रहे और प्रजा महलों में वहीं रामराज्य है। पंडित दिनेश मिश्र ने कहा कि रावण राज्य में भय और डर का वातावरण था। रावण अपने पराक्रम और बाहुबल के आधार पर सबको अपने अधीन रखना चाहता था जबकि भगवान राम के आचरण से सभी लोग राम के अनुरागी बने। कथा की शुरूआत की पंडित राजा राम त्रिपाठी ने हवन पूजन से किया। आर्य समाज के प्रधान देवेंद्र नाथ, महेंद्र नाथ त्यागी, सुरेंद्र कनौजिया, कृष्णा जायसवाल, सूर्य प्रकाश महंथ, विकास मिश्र, अनिल जायसवाल, राकेश मिश्र, ईश्वचंद लाल आदि मौजूद थे।
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