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भगवान श्रीकृष्ण ने आंसुओं से धोए सुदामा के पैर
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:48 PM IST
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प्रयाग के संत भोलेनाथ महराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा को देखकर अपनी करुणा को रोक नहीं पाते हैं। वह सुदामा की दशा को देखकर व्यथित होकर रोते हैं। नरोत्तम दास ने अपनी लेखनी में मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। वह बुधवार को बरचौली गांव में भक्तों के बीच श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन कर रहे थे।
सरस और संगीतमयी कथा के दौरान संत ने कहा कि सुदामा अपने बचपन के मित्र भगवान कृष्ण से मिलने उनके भवन पहुंचे है। उनके कपड़े फटे थे। सिर पर पगड़ी, शरीर पर वस्त्र तो पैरों में जूता भी नहीं था। गरीब ब्राह्मण के रूप में जब द्वारपालों ने देखा तो उनके यहां आने का कारण पूंछा। सुदामा ने कहा कि वह अपने मित्र कृष्ण से मिलने आए हैं। अंदर भगवान को जब सूचना मिली की मेरे बचपन के मित्र सुदामा द्वार पर आए है तो वह नंगे पैर ही दौड़ पड़े और सुदामा को पकड़ कर रोने लगे। इस दृश्य को देखकर सभी अचंभित हो गए। भगवान अपने आंसुओं से स्वयं सुदामा के पैर धुलते है और उनके पैर में फंसे काटें की जाल निकालते हैं। उन्होंने कहा कि मित्रता ऐसी होनी चाहिए। इस दौरान भगवान कृष्ण-सुदामा मिलन की झांकी निकली जिसे देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। वही महिलाएं के आंखों से आंसुओं की धार बहाने लगी।
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सरस और संगीतमयी कथा के दौरान संत ने कहा कि सुदामा अपने बचपन के मित्र भगवान कृष्ण से मिलने उनके भवन पहुंचे है। उनके कपड़े फटे थे। सिर पर पगड़ी, शरीर पर वस्त्र तो पैरों में जूता भी नहीं था। गरीब ब्राह्मण के रूप में जब द्वारपालों ने देखा तो उनके यहां आने का कारण पूंछा। सुदामा ने कहा कि वह अपने मित्र कृष्ण से मिलने आए हैं। अंदर भगवान को जब सूचना मिली की मेरे बचपन के मित्र सुदामा द्वार पर आए है तो वह नंगे पैर ही दौड़ पड़े और सुदामा को पकड़ कर रोने लगे। इस दृश्य को देखकर सभी अचंभित हो गए। भगवान अपने आंसुओं से स्वयं सुदामा के पैर धुलते है और उनके पैर में फंसे काटें की जाल निकालते हैं। उन्होंने कहा कि मित्रता ऐसी होनी चाहिए। इस दौरान भगवान कृष्ण-सुदामा मिलन की झांकी निकली जिसे देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। वही महिलाएं के आंखों से आंसुओं की धार बहाने लगी।
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