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कर्म के प्रति समर्पित होने वाला होता है हनुमान
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:48 PM IST
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जो मान का हनन करके कर्म के समर्पित हो। उसी का नाम हनुमान होता है। उक्त बातें शंकरगढ़ से आए मानस पियूष डॉ. दिनेश त्रिपाठी ने मंगलवार की देर शाम को टाउन हाल में मानस प्रचारिणी सभा द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हनुमान की महिमा का वर्णन करते हुए कही।
उन्होंने कर्म प्रधान विश्व करि राखा चौपाई की व्याख्या करते हुए कहा कि सारा विश्व कर्म के अधीन है। हम ज्यों-ज्यों माया व भौतिकता की ओर बढ़ते जा रहे हैं। वैसे-वैसे भगवान हमसे दूर होते जा रहे हैं। कानपुर से आए पंडित शिवशंकर मिश्र ने कहा कि कथा वहीं है,जो ग्रहण करने व लोक का हित करने योग्य हो।
माता पार्वती ने भी भगवान शिवजी से ग्रहण करने व लोक हित करने वाली कथा सुनी थी। मानस दिनकर पंडित दिनेशचंद्र मिश्र ने पुण्य व पाप कर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि पुण्य की जड़ पाताल तक जाती है। हमारे देश में पक्षी जाति का गिद्घ भी नारी अस्तित्व की रक्षा करके महान हो गया। जबकि नारी का सम्मान नहीं करने वाले रावण को पाप कर्म के कारण राक्षस कहा गया है। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व चेयरमैन दिनेश टंडन ने किया। इस अवसर पर मानस मुकुट मणि पंडित राजाराम त्रिपाठी, महेंद्रनाथ त्यागी, भाष्करानंद द्विवेदी, सोमेश्वर केशरवानी आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कर्म प्रधान विश्व करि राखा चौपाई की व्याख्या करते हुए कहा कि सारा विश्व कर्म के अधीन है। हम ज्यों-ज्यों माया व भौतिकता की ओर बढ़ते जा रहे हैं। वैसे-वैसे भगवान हमसे दूर होते जा रहे हैं। कानपुर से आए पंडित शिवशंकर मिश्र ने कहा कि कथा वहीं है,जो ग्रहण करने व लोक का हित करने योग्य हो।
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माता पार्वती ने भी भगवान शिवजी से ग्रहण करने व लोक हित करने वाली कथा सुनी थी। मानस दिनकर पंडित दिनेशचंद्र मिश्र ने पुण्य व पाप कर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि पुण्य की जड़ पाताल तक जाती है। हमारे देश में पक्षी जाति का गिद्घ भी नारी अस्तित्व की रक्षा करके महान हो गया। जबकि नारी का सम्मान नहीं करने वाले रावण को पाप कर्म के कारण राक्षस कहा गया है। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व चेयरमैन दिनेश टंडन ने किया। इस अवसर पर मानस मुकुट मणि पंडित राजाराम त्रिपाठी, महेंद्रनाथ त्यागी, भाष्करानंद द्विवेदी, सोमेश्वर केशरवानी आदि उपस्थित रहे।
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