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लाखों की लगात से बना सरस हाट पैड पड़ा है निष्प्रयोज्य
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:48 AM IST
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जलालपुर। लहंगपुर गांव में लाखों की लागत से ऐसा हाट बना है, जिसमें कोई दुकान ही नहीं खोलना चाहता है। सात साल से बनकर तैयार सरस हाट पैड बेकार है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यह वीरान स्थान पर बनाया गया है। अब ऐसी जगह पर कोई दुकान क्यों खोलना चाहेगा जहां उसे ग्राहक के इंतजार में दिन काटना पड़े।
कृषि और कृषि पर आधारित कुटीर उद्योगों के उत्पाद की बिक्री के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने लहंगपुर गांव में सरस हाट पैड का निर्माण कराया है। तब इस पर 20 लाख रुपये की लागत आआई थी। हाट पैड में 20 कमरे, चबूतरा, बरामदा, शौचालय, हैंडपंप आदि बनवाए गए हैं। कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम ने हाट पैड को जनवरी 2010 में इसे खंड विकास अधिकारी को सौंप दिया था। ग्राम प्रधान को हाट पैड कमेटी का अध्यक्ष नामित किया गया और उनको स्वरोजगार करने वालों को दुकानें आवंटित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। दुकान चलाने वाले गरीबों से 20 रुपये और सामान्य कारोबारियों से 50 रुपये महीने की दर से किराया लिया जाना था। इतने कम किराए के बाद भी कोई कारोबारी दुकान खोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। दरअसल यह जहां बना है, वह जगह वीराने में है। वहां कोई ग्राहक आता-जाता ही नहीं है। प्रशासन ने भी इसको आवंटित करने के लिए कोई प्रयास नही किया। ग्राम प्रधान हाट पैड कमेटी की नामित अध्यक्ष हैं लेकिन गांव की प्रधान प्रिया विश्वकर्मा को इसकी जानकारी तक नहीं है। उनका कहना है कि सेंटर तो बना है लेकिन उसकी कार्यप्रणाली के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं। ब्लाक के किसी अधिकारियों के द्वारा मुझे उसके बारे में कोई जानकारी दी गई है।
कोट:
जिस समय यह सेंटर बनकर तैयार हुआ। उसी समय इस हाट पैड को संबंधित ग्राम सभा को सौप दिया गया। ग्राम सभा को ही उसका संचालन करना है।- देवेंद्र सिंह, खंड विकास अधिकारी
कृषि और कृषि पर आधारित कुटीर उद्योगों के उत्पाद की बिक्री के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने लहंगपुर गांव में सरस हाट पैड का निर्माण कराया है। तब इस पर 20 लाख रुपये की लागत आआई थी। हाट पैड में 20 कमरे, चबूतरा, बरामदा, शौचालय, हैंडपंप आदि बनवाए गए हैं। कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम ने हाट पैड को जनवरी 2010 में इसे खंड विकास अधिकारी को सौंप दिया था। ग्राम प्रधान को हाट पैड कमेटी का अध्यक्ष नामित किया गया और उनको स्वरोजगार करने वालों को दुकानें आवंटित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। दुकान चलाने वाले गरीबों से 20 रुपये और सामान्य कारोबारियों से 50 रुपये महीने की दर से किराया लिया जाना था। इतने कम किराए के बाद भी कोई कारोबारी दुकान खोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। दरअसल यह जहां बना है, वह जगह वीराने में है। वहां कोई ग्राहक आता-जाता ही नहीं है। प्रशासन ने भी इसको आवंटित करने के लिए कोई प्रयास नही किया। ग्राम प्रधान हाट पैड कमेटी की नामित अध्यक्ष हैं लेकिन गांव की प्रधान प्रिया विश्वकर्मा को इसकी जानकारी तक नहीं है। उनका कहना है कि सेंटर तो बना है लेकिन उसकी कार्यप्रणाली के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं। ब्लाक के किसी अधिकारियों के द्वारा मुझे उसके बारे में कोई जानकारी दी गई है।
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कोट:
जिस समय यह सेंटर बनकर तैयार हुआ। उसी समय इस हाट पैड को संबंधित ग्राम सभा को सौप दिया गया। ग्राम सभा को ही उसका संचालन करना है।- देवेंद्र सिंह, खंड विकास अधिकारी
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