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पूरे देश में एक दिन पहले जौनपुर में मनाया जाता चेहलुम
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:11 AM IST
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जौनपुर में चेहल्लुम पर मातम मनाते लोग
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जौनपुर । सिराजे हिंद का ऐतिहासिक चेहल्लुम गुरुवार को भारी भीड़ के बीच गमगीन माहौल में मनाया गया। जगह-जगह मातमी नौहा गूंजता रहा। बुधवार की रात बाजार भुआ स्थित इस्लाम चौक पर ताजिया रखा गया था जहां जिरायत के लिए सारी रात अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी रही।
जिले का ऐतिहासिक चेहल्लुम देश में अपना अलग स्थान रखता है। जिले को अजादारी का केंद्र माना जाता है। बुधवार की रात बाजार भुआ स्थित इस्लाम चौक पर ताजिया रखा गया जहां जियारत के लिए रात भर अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी रही। इसके बाद मजलिस हुई जिसमें मौलाना कैसर नवाब ने खेताब फरमाया। अलविदाई मजलिस को तड़के मौलाना बिलाल हसनैन ने खेताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन को बेकफन दफन किया गया था। लुटे कुनबे को जगह-जगह घुमाया गया था और यजीद ने चेहल्लुम नहीं मनाने दिया थ। उधर, अंजुमनों ने रात भर नौहा मातम किया। दहकती हुई जंजीरों का मातम गुलशने इस्लाम ने किया तो लोगों की आंखें नम हो गईं। गुरुवार को एक बजे मजलिस शुरू हुई । इसे मौलाना नदीम रजा जैदी फैजाबादी ने खेताब किया। बाद खत्म मजलिस इमामबाड़े से फूलों से लदी तुरबत निकाली गई। इसे देखकर लोग रोने लगे। यहां लोगों ने मन्नतें मांगी। तुरबत और ताजिये का जुलूस अंजुमन गुलशने इस्लाम के हमराह अपने कदीमी रास्ते पानदरीबा रोड, काजी की गली, मस्जिद तला रोड होते हुए बेगमगंज स्थित सदर इमामबाड़े में खत्म हुआ । सूर्यास्त होते ही सैकड़ों ताजियों के साथ इस्लाम चौक के 10 फीट के ताजिये एवं तुरबत को दफन कर दिया गया। चेहल्लुम कमेटी के संयोजक हाजी असगर हुसैन जैदी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष इस्लाम की चौक का चेहल्लुम एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। इसमें देश भर से जायरीन यहां आते हैं। इसे एक दिन पूर्व मनाए जाने में इसका अपना एक महत्व है। बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में मोहल्ला निवासी शेख मोहम्मद इस्लाम को एक मामले में फंसा दिया गया था जिससे उनको जेल हो गई थी। चेहल्लुम करीब आते मोहम्मद इस्लाम इस अफसोस में थे कि हर साल की तरह इस साल ताजिया नहीं सजा पायेंगे। उन्होंने मन्नत मांगी और एक दिन पहले ही जेल का दरवाजा अपने आप खुल गया। इस चमत्कार को देख अंग्रेजी अफसर भौचक रह गए और उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उसी दिन उन्होंने ताजिया सजा कर रखा और तभी से यह चेहल्लुम एक दिन पहले ही मना लिया जाता है। अंत में असगर हुसैन जैदी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन अकबर हुसैन जैदी एडवोकेट ने किया। इस मौके पर इस्लाम चौक के मुतवल्ली नजमुल हसन जैदी , कबीर जैदी , मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी, लाडले जैदी , शाहिद जैदी , पूर्व एम एल सी सिराज मेहंदी, कमर जौनपुरी, शिया जागरण मंच के अध्यक्ष मौलाना हसन मेहंदी, मिर्जा जावेद सुल्तान, नजमुल हसन नजमी मौजूद रहे।
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जिले का ऐतिहासिक चेहल्लुम देश में अपना अलग स्थान रखता है। जिले को अजादारी का केंद्र माना जाता है। बुधवार की रात बाजार भुआ स्थित इस्लाम चौक पर ताजिया रखा गया जहां जियारत के लिए रात भर अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी रही। इसके बाद मजलिस हुई जिसमें मौलाना कैसर नवाब ने खेताब फरमाया। अलविदाई मजलिस को तड़के मौलाना बिलाल हसनैन ने खेताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन को बेकफन दफन किया गया था। लुटे कुनबे को जगह-जगह घुमाया गया था और यजीद ने चेहल्लुम नहीं मनाने दिया थ। उधर, अंजुमनों ने रात भर नौहा मातम किया। दहकती हुई जंजीरों का मातम गुलशने इस्लाम ने किया तो लोगों की आंखें नम हो गईं। गुरुवार को एक बजे मजलिस शुरू हुई । इसे मौलाना नदीम रजा जैदी फैजाबादी ने खेताब किया। बाद खत्म मजलिस इमामबाड़े से फूलों से लदी तुरबत निकाली गई। इसे देखकर लोग रोने लगे। यहां लोगों ने मन्नतें मांगी। तुरबत और ताजिये का जुलूस अंजुमन गुलशने इस्लाम के हमराह अपने कदीमी रास्ते पानदरीबा रोड, काजी की गली, मस्जिद तला रोड होते हुए बेगमगंज स्थित सदर इमामबाड़े में खत्म हुआ । सूर्यास्त होते ही सैकड़ों ताजियों के साथ इस्लाम चौक के 10 फीट के ताजिये एवं तुरबत को दफन कर दिया गया। चेहल्लुम कमेटी के संयोजक हाजी असगर हुसैन जैदी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष इस्लाम की चौक का चेहल्लुम एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। इसमें देश भर से जायरीन यहां आते हैं। इसे एक दिन पूर्व मनाए जाने में इसका अपना एक महत्व है। बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में मोहल्ला निवासी शेख मोहम्मद इस्लाम को एक मामले में फंसा दिया गया था जिससे उनको जेल हो गई थी। चेहल्लुम करीब आते मोहम्मद इस्लाम इस अफसोस में थे कि हर साल की तरह इस साल ताजिया नहीं सजा पायेंगे। उन्होंने मन्नत मांगी और एक दिन पहले ही जेल का दरवाजा अपने आप खुल गया। इस चमत्कार को देख अंग्रेजी अफसर भौचक रह गए और उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उसी दिन उन्होंने ताजिया सजा कर रखा और तभी से यह चेहल्लुम एक दिन पहले ही मना लिया जाता है। अंत में असगर हुसैन जैदी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन अकबर हुसैन जैदी एडवोकेट ने किया। इस मौके पर इस्लाम चौक के मुतवल्ली नजमुल हसन जैदी , कबीर जैदी , मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी, लाडले जैदी , शाहिद जैदी , पूर्व एम एल सी सिराज मेहंदी, कमर जौनपुरी, शिया जागरण मंच के अध्यक्ष मौलाना हसन मेहंदी, मिर्जा जावेद सुल्तान, नजमुल हसन नजमी मौजूद रहे।
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