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ौथे दिन जगह - जगह हुई मां कुष्मांडा की पूजा
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:27 AM IST
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गोशाला रोड पर पंडाल में दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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जौनपुर। नवरात्र के चौथे दिन रविवार को जिले भर में मां कुष्मांडा की आस्था और विश्वास के साथ पूजा की गई। पवित्र और स्थिर चित्त से ध्यान कर पूजा अर्चना करने वाले पर मां की कृपा होती है। दर्शन पूजन करने के लिए चौकिया धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी।
देवी कुष्मांडा सृष्टि की रचयिता मानी गई हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर बताया गया है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही देदीप्यमान है। इनके तेज से दस दिशाएं प्रकाशित होती हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुएं और प्राणियों में तेज स्वरूप इन्हीं की छाया अवस्थित है। इनके स्वरूप का वर्णन करते हुए डॉ. शैलेश मोदनवाल कहते हैं कि मां की आठ भुजाओं में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र तथा गडाके साथ ही आठवें हाथ में सिद्धि-निधि प्रदान करने वाली माला है। इन्हें अष्टभुजा की संज्ञा प्राप्त है। इनका वाहन सिंह है। मां के इस स्वरूप के पूजन से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। पूजा के समय जहां तक संभव हो बड़े मस्तक वाली विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। पूजा के समय भोजन में दही, हलवा खिलाने के बाद फ़ल , सूखे मेवे और सौभाग्य की वस्तुएं भेंट करने से मां प्रसन्न होकर मनवांछित फल देती हैं। सिकरारा संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए रविवार को देवी मंदिरों व दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अजोशी धाम के सिंहवाहिनी मंदिर, ताहिरपुर के शारदा धाम, जाम के दुर्गा मंदिर, शेरवा के संतोषी माता मंदिर, बेल्सड़ी के देवी वैष्णवी मंदिर, चांदपुर के मैहर वाली माता मंदिरों में भोर के चार बजे से घंटों की ध्वनि के साथ ही जयकारे से पूरा क्षेत्र दुर्गामय हो गया है। पूजा पंडालों में शेरवा, गुलजारगंज, लाला बाजार, खपरहा, दुदौली, समाधगंज, रीठी, टिकरी, प्रेमराजपुर आदि स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर देवी गीतों के मधुर धुन पर श्रद्धालु जम कर थिरके। जगह-जगह आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं।
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देवी कुष्मांडा सृष्टि की रचयिता मानी गई हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर बताया गया है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही देदीप्यमान है। इनके तेज से दस दिशाएं प्रकाशित होती हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुएं और प्राणियों में तेज स्वरूप इन्हीं की छाया अवस्थित है। इनके स्वरूप का वर्णन करते हुए डॉ. शैलेश मोदनवाल कहते हैं कि मां की आठ भुजाओं में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र तथा गडाके साथ ही आठवें हाथ में सिद्धि-निधि प्रदान करने वाली माला है। इन्हें अष्टभुजा की संज्ञा प्राप्त है। इनका वाहन सिंह है। मां के इस स्वरूप के पूजन से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। पूजा के समय जहां तक संभव हो बड़े मस्तक वाली विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। पूजा के समय भोजन में दही, हलवा खिलाने के बाद फ़ल , सूखे मेवे और सौभाग्य की वस्तुएं भेंट करने से मां प्रसन्न होकर मनवांछित फल देती हैं। सिकरारा संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए रविवार को देवी मंदिरों व दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अजोशी धाम के सिंहवाहिनी मंदिर, ताहिरपुर के शारदा धाम, जाम के दुर्गा मंदिर, शेरवा के संतोषी माता मंदिर, बेल्सड़ी के देवी वैष्णवी मंदिर, चांदपुर के मैहर वाली माता मंदिरों में भोर के चार बजे से घंटों की ध्वनि के साथ ही जयकारे से पूरा क्षेत्र दुर्गामय हो गया है। पूजा पंडालों में शेरवा, गुलजारगंज, लाला बाजार, खपरहा, दुदौली, समाधगंज, रीठी, टिकरी, प्रेमराजपुर आदि स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर देवी गीतों के मधुर धुन पर श्रद्धालु जम कर थिरके। जगह-जगह आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं।
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