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मुजफ्फरनगर में ‘पटना कनेक्शन’ की जांच
अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 29 Oct 2013 03:33 AM IST
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पटना के सीरियल ब्लास्ट में मुजफ्फरनगर का नाम जुड़ने के बाद दिल्ली से एक खुफिया टीम सोमवार को यहां पहुंची है। दंगे के बाद उपजे हालात और राहुल गांधी के बयान की हकीकत भी खंगाली जा रही है।
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पटना में रविवार को सीरियल ब्लास्ट के दौरान पकड़े गए संदिग्ध युवक से चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के मुताबिक यह जानकारी सामने आई है कि मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेने के लिए ही पटना में सिलसिलेवार धमाके किए गए।
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देश की जांच एजेंसियां इस बात की छानबीन में जुटी हैं कि धमाकों के सूत्रधारों का मुजफ्फरनगर से तो कोई कनेक्शन नहीं है। हाल ही में इंदौर में राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान का पार्टी स्तर से भी कोई खंडन नहीं आया है।
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ऐसे में माना जा रहा है कि राहुल के बयान का भी कोई न कोई आधार हो सकता है। जांचकर्ता यह आंकड़े भी जुटा रहे हैं कि राहत शिविरों में सरकारी मदद के अलावा किन-किन संस्थाओं से और कितनी मदद मिली। एक आला अधिकारी ने शहर में टीम के आने की पुष्टि तो की, लेकिन मामला गोपनीय बताते हुए कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
इससे पहले पाक आतंकी जकारिया 1999 में मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार हुआ था। उसकी निशानदेही पर मेहलकी गांव पाकिस्तानी हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ था। मोदीनगर बम ब्लास्ट में भी इसी गांव के एक युवक की गिरफ्तारी हुई थी। इसी युवक का एक भाई असम में संदिग्ध गतिविधियों में पकड़ा गया था।
वर्ष 2002 में बुढ़ाना इलाके से भी पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद वारस पकड़ा गया, जिससे हथियार भी बरामद हुए थे। कैराना के इकबाल काना और दिलशाद भी लाहौर में बैठकर आतंक को खाद-पानी देने का काम कर रहे हैं।
आतंकियों ने बनवाए थे ड्राइविंग लाइसेंस
एसटीएफ ने वर्ष 2001 में लखनऊ में दो आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उनके ड्राइविंग लाइसेंस मुजफ्फरनगर एआरटीओ कार्यालय से बनाए गए थे।
बाद में छानबीन में खुलासा हुआ कि फर्जी आईडी के जरिए दलालों की मिलीभगत से आतंकियों ने न केवल डीएल बनवाए बल्कि फर्जी राशन कार्ड भी हासिल कर लिए थे।