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रंगदारी में फंसी विद्यार्थियों की वाईफाई
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sat, 23 Jul 2016 07:41 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में शुरू हुई वाईफाई सुविधा योजना का काम थम गया है। सीएम की घोषणा में शामिल होने प्रोजेक्ट होने के चलते यूनिवर्सिटी के संत कबीर, एनसी और स्वामी विवेकानंद हॉस्टल में तेजी से काम चल रहा था, लेकिन तीन माह पहले रंगदारी के खौफ में बंद हो गया। ताजा हाल में यह सुविधा विद्यार्थियों को कब तक मिलेगी, यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ भी कहने में खुद को असहाय पा रहा।
यूनिवर्सिटी ने इस मद में तय धनराशि कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को 31 दिसंबर को ही उपलब्ध करा दी थी। धनराशि मिलने के बाद निर्माण निगम ने एक तकनीकी संस्था को इसकी जिम्मेदारी सौंपी और अप्रैल के अंत तक हर हाल में इसे पूरा करने को कहा। संस्था ने कार्य भी शुरू कर दिया। रानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स हॉस्टल में तो कार्य पूरा हो गया लेकिन जैसे ही यह कार्य ब्वायज हॉस्टलों में शुरू हुआ, संस्था को रंगदारी की धमकी मिलनी शुरू हो गई। पहले तो मामले को बात-व्यवहार से निपटाने की कोशिश हुई लेकिन जब बात नहीं बनी तो संस्था ने काम ही ठप कर दिया।
मामला फंसा देख फिलहाल कार्य के पूरा करने की मियाद बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है। इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन खुद को कितना मजबूर पा रहा है, इसकी तस्दीक शासन को भेज गए उस रिपोर्ट में होती है, जिसमें मुख्यमंत्री की घोषणाओं की प्रगति बताई गई है। रिपोर्ट में वाईफाई सुविधा की प्रगति का हवाला यह कहकर टाल दिया गया है कार्यदायी संस्था से अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं मिली है।
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पहले भी आ चुकी है रंगदारी की अड़चन
वाईफाई सुविधा में रंगदारी की अड़चन पहली बार नहीं आई है। एक करोड़ सात लाख से तैयार हो रही वाईफाई सुविधा के पहले चरण में यह अड़चन एक साल पहले तब आई थी जब गौतमबुद्ध हॉस्टल में इसका कार्य शुरू हुआ था। उस बार भी इसके चलते दो महीने तक कार्य ठप रहा था। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस बार न तो पिछली वाली एजेंसी है और न ही रंगदारी मांगने वाले वे लोग।
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यूनिवर्सिटी ने इस मद में तय धनराशि कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को 31 दिसंबर को ही उपलब्ध करा दी थी। धनराशि मिलने के बाद निर्माण निगम ने एक तकनीकी संस्था को इसकी जिम्मेदारी सौंपी और अप्रैल के अंत तक हर हाल में इसे पूरा करने को कहा। संस्था ने कार्य भी शुरू कर दिया। रानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स हॉस्टल में तो कार्य पूरा हो गया लेकिन जैसे ही यह कार्य ब्वायज हॉस्टलों में शुरू हुआ, संस्था को रंगदारी की धमकी मिलनी शुरू हो गई। पहले तो मामले को बात-व्यवहार से निपटाने की कोशिश हुई लेकिन जब बात नहीं बनी तो संस्था ने काम ही ठप कर दिया।
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मामला फंसा देख फिलहाल कार्य के पूरा करने की मियाद बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है। इसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन खुद को कितना मजबूर पा रहा है, इसकी तस्दीक शासन को भेज गए उस रिपोर्ट में होती है, जिसमें मुख्यमंत्री की घोषणाओं की प्रगति बताई गई है। रिपोर्ट में वाईफाई सुविधा की प्रगति का हवाला यह कहकर टाल दिया गया है कार्यदायी संस्था से अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं मिली है।
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पहले भी आ चुकी है रंगदारी की अड़चन
वाईफाई सुविधा में रंगदारी की अड़चन पहली बार नहीं आई है। एक करोड़ सात लाख से तैयार हो रही वाईफाई सुविधा के पहले चरण में यह अड़चन एक साल पहले तब आई थी जब गौतमबुद्ध हॉस्टल में इसका कार्य शुरू हुआ था। उस बार भी इसके चलते दो महीने तक कार्य ठप रहा था। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस बार न तो पिछली वाली एजेंसी है और न ही रंगदारी मांगने वाले वे लोग।