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‘सभी विचारों का एकीकरण है महाभारत’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 25 May 2016 01:15 AM IST
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एमपी इंटर कॉलेज में भागवत कथा सुनातीं विश्वंभरा भारती
- फोटो : shivharsh
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से एमपी इंटर कॉलेज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा वाचक विश्वंभरा भारती ने कहा कि महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत पारिवारिक कलह की कहानी नहीं है।
इसमें वर्णित पात्रों द्वारा उन्होंने उस वक्त की स्थिति का दिग्दर्शन कराया है। सत्य तो यह है कि महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक हर तरह के विचारों का एकीकरण है जो आज भी मानव जाति का मार्गदर्शन कर रहा है।
उन्होेंने कहा कि यह विडंबना है कि विदेशी आक्रांताओं की भ्रांति का शिकार होकर हमने अपने ग्रंथों का परित्याग कर दिया। आज हमारे देश में कुरीतियां पनप रही हैं और उनका प्रतिकार कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने पूर्ण गुरू को परिभाषित करते हुए कहा कि सच्चा व पूर्ण गुरू वही है जो ज्ञान दीक्षा देते समय अपने शरणागत शिष्य के अंत:करण तत्क्षण ईश्वर के प्रकाश स्वरूप को प्रकट कर दे।
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हमारे शास्त्रों में क्षेत्रीय ब्रह्मनिष्ठ गुरू की यही परिभाषा बताई गई है। क्षेत्रीय ब्रह्मनिष्ठ गुरू की अनुकंपा के बिना ब्रह्मज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा में आए हुए श्रद्धालुजन भाव विभोर होकर नाचते-झूमते रहे।
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इसमें वर्णित पात्रों द्वारा उन्होंने उस वक्त की स्थिति का दिग्दर्शन कराया है। सत्य तो यह है कि महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक हर तरह के विचारों का एकीकरण है जो आज भी मानव जाति का मार्गदर्शन कर रहा है।
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उन्होेंने कहा कि यह विडंबना है कि विदेशी आक्रांताओं की भ्रांति का शिकार होकर हमने अपने ग्रंथों का परित्याग कर दिया। आज हमारे देश में कुरीतियां पनप रही हैं और उनका प्रतिकार कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने पूर्ण गुरू को परिभाषित करते हुए कहा कि सच्चा व पूर्ण गुरू वही है जो ज्ञान दीक्षा देते समय अपने शरणागत शिष्य के अंत:करण तत्क्षण ईश्वर के प्रकाश स्वरूप को प्रकट कर दे।
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हमारे शास्त्रों में क्षेत्रीय ब्रह्मनिष्ठ गुरू की यही परिभाषा बताई गई है। क्षेत्रीय ब्रह्मनिष्ठ गुरू की अनुकंपा के बिना ब्रह्मज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा में आए हुए श्रद्धालुजन भाव विभोर होकर नाचते-झूमते रहे।