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एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने किया कुलपति का सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 05 Sep 2016 08:40 PM IST
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यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन पर कुलपति का स्वागत करते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लोग।
- फोटो : rajesh
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कल तक गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति का विरोध करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता सोमवार को कुलपति प्रो. अशोक कुमार का सम्मान करने के लिए बेताब दिखे। सम्मान कार्यक्रम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्हेें पुलिस और प्रशासन से नोकझोंक तक करनी पड़ी। अंतत: उन्होेंने धैर्य नहीं खोया और सम्मान करने मेें सफल हुए।
रविवार को हुई परिषद की बैठक में तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक सोमवार सुबह 10 बजे से ही हॉस्टल परिसर में कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। जैसे-जैसे समय बढ़ा, कार्यकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। उधर, जब पुलिस-प्रशासन को इस बात की जानकारी मिली कि परिषद के कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में कुलपति के सम्मान को निकलेंगे तो उनके हाथपांव फूल गए। तत्काल सीओ कैंट अभय मिश्रा, कैंट इंस्पेक्टर ब्रजेश वर्मा मय दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और जुलूस को रोकने की कोशिश करने लगे। उन्हें भय था कि कहीं हुजूम किसी बड़े हंगामे की वजह न बन जाए।
जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की तो उनके बीच झड़प की स्थिति बनने लगी। बात बढ़ने लगी तो कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता आगे आए और झड़प को समझौते का रूप दिया। उन्होंने सीओ कैंट को परिषद की मंशा साफ की और किसी तरह के हंगामा न किए जाने का आश्वासन दिया। आधे घंटे चली बहस के बाद जब सीओ आश्वस्त हो गए कि कोई हंगामा नहीं होगा तो उन्होंने जुलूस की इजाजत तो दे दी लेकिन इस शर्त के साथ कि उसमें डीजे शामिल नहीं होगा। कार्यकर्ता भी मान गए और पूरे उत्साह के साथ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंचे। चूंकि उस समय वहां कुलपति मौजूद नहीं थे, इसलिए कार्यकर्ताओं ने समय काटने के लिए परिषद गीत गाया।
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कुलपति के पहुंचते ही उन्हें मालाओं से लाद दिया गया। हर कार्यकर्ता कुलपति के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बेताब दिखा। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रवीण गुंजन ने कहा कि छात्रसंघ बहाली के लिए कुलपति ने जो पहल की उसके लिए वे सम्मान के काबिल हैं। छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. योगेश प्रताप सिंह और पूर्व मंत्री नीरज शाही ने छात्रसंघ चुनाव की घोषणा को लोकतंत्र की जीत बताया। प्रांत मंत्री कमल नयन, प्रांत मंत्री राकेश मौर्या, डॉ. विनय सिंह जेआरएफ, भूपेंद्र सिंह राणा, राजन द्विवेदी, आदित्य मिश्र, हिमांशु चंद्र कौशिक, उमंग कुमार सिंह, कोर्णाक श्रीवास्तव, मनीष यादव ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
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रविवार को हुई परिषद की बैठक में तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक सोमवार सुबह 10 बजे से ही हॉस्टल परिसर में कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। जैसे-जैसे समय बढ़ा, कार्यकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। उधर, जब पुलिस-प्रशासन को इस बात की जानकारी मिली कि परिषद के कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में कुलपति के सम्मान को निकलेंगे तो उनके हाथपांव फूल गए। तत्काल सीओ कैंट अभय मिश्रा, कैंट इंस्पेक्टर ब्रजेश वर्मा मय दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और जुलूस को रोकने की कोशिश करने लगे। उन्हें भय था कि कहीं हुजूम किसी बड़े हंगामे की वजह न बन जाए।
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जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की तो उनके बीच झड़प की स्थिति बनने लगी। बात बढ़ने लगी तो कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ता आगे आए और झड़प को समझौते का रूप दिया। उन्होंने सीओ कैंट को परिषद की मंशा साफ की और किसी तरह के हंगामा न किए जाने का आश्वासन दिया। आधे घंटे चली बहस के बाद जब सीओ आश्वस्त हो गए कि कोई हंगामा नहीं होगा तो उन्होंने जुलूस की इजाजत तो दे दी लेकिन इस शर्त के साथ कि उसमें डीजे शामिल नहीं होगा। कार्यकर्ता भी मान गए और पूरे उत्साह के साथ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंचे। चूंकि उस समय वहां कुलपति मौजूद नहीं थे, इसलिए कार्यकर्ताओं ने समय काटने के लिए परिषद गीत गाया।
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कुलपति के पहुंचते ही उन्हें मालाओं से लाद दिया गया। हर कार्यकर्ता कुलपति के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बेताब दिखा। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रवीण गुंजन ने कहा कि छात्रसंघ बहाली के लिए कुलपति ने जो पहल की उसके लिए वे सम्मान के काबिल हैं। छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. योगेश प्रताप सिंह और पूर्व मंत्री नीरज शाही ने छात्रसंघ चुनाव की घोषणा को लोकतंत्र की जीत बताया। प्रांत मंत्री कमल नयन, प्रांत मंत्री राकेश मौर्या, डॉ. विनय सिंह जेआरएफ, भूपेंद्र सिंह राणा, राजन द्विवेदी, आदित्य मिश्र, हिमांशु चंद्र कौशिक, उमंग कुमार सिंह, कोर्णाक श्रीवास्तव, मनीष यादव ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।