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अल्ट्रासाउंड में मनमानी, भटक रहे मरीज

Wed, 07 Dec 2016 01:21 AM IST
बृजेश कुमार गुप्ता, अमर उजाला, गोरखपुर।
बृजेश कुमार गुप्ता, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 07 Dec 2016 01:21 AM IST
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Ultrasound in medical college
सहजनवां की साधना को अल्ट्रासाउंड कराने मेडिकल कॉलेज से बाहर ले जाते घरवाले। - फोटो : Rajesh Kumar
मेडिकल कॉलेज में सात डॉक्टर, सात मशीनें होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड करने में हो रही मनमानी गरीब मरीजों पर भारी पड़ रही है। मरीजों को सीधे प्राइवेट पैथोलॉजी भेज दिया जा रहा है और जिन मरीजों के पास जांच कराने के लिए पर्याप्त रकम नहीं होती, उन्हें भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई मरीज ऐसे हैं, जिनकी जांच न हो पाने की वजह से उनका ऑपरेशन तक टाल दिया गया।
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मेडिकल कॉलेज में सुबह नौ से दो बजे तक ही अल्ट्रासाउंड हो पाता है। इसके बाद पहले इमरजेंसी मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता था, मगर ट्रॉमा की मशीन गायनी विभाग में भेजे जाने के बाद से इमरजेंसी में भी मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पा रही है। इससे परेशान मरीज इधर-उधर भटकने के बाद तीन गुना ज्यादा रुपये देकर बाहर जांच कराने को मजबूर हो रहे हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत ऑपरेशन वाले मरीजों को झेलनी पड़ रही है। रेडियोलॉजी विभाग की ओर से उन्हें तीन-चार दिन दौड़ाया जा रहा है, जिसके बाद परेशान होकर वे प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच करा रहे हैं। मगर बीपीएल कार्ड धारक रुपये न होने के कारण भटकने को मजबूर हैं।
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केस 1
महराजगंज, श्यामदेउरवा की रीता देवी के पास बीपीएल कार्ड है। बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुईं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। स्वास्थ्य अफसर ने बीपीएल कार्ड के आधार पर मुफ्त जांच भी लिख दी, मगर रेडियोलॉजी विभाग से उन्हें लौटा दिया गया। दो दिन परेशान होने के बाद उनकी ऑपरेशन की तारीख टाल दी गई और वह लौट गईं।
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केस 2
सहजनवां इलाके के जैतपुर की साधना देवी को भी प्राइवेट पैथोलॉजी में अल्ट्रासाउंड कराने भेजा गया। स्ट्रेचर पर लेटी साधना को जैसे-तैसे घर वाले सड़क पार कराकर ले गए। जो जांच मेडिकल कॉलेज में महज 200 में होती है, उसके लिए प्राइवेट पैथोलॉजी में 600 रुपये खर्च करने पड़े। साधना गर्भवती थीं और मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीजों की 24 घंटे जांच की सुविधा है।


सात मशीनें होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज से मरीजों को जांच के लिए बाहर भेजा जाना गंभीर बात है। यदि किसी मरीज को बिना जांच लौटना पड़ा है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य
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