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जिले के दो प्राइवेट अस्पताल सीज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 09 Sep 2016 09:01 PM IST
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बिना लाइसेंस चल रहे जिले के दो प्राइवेट अस्पतालों को स्वास्थ्य महकमे ने सीज कर दी है और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
सीएमओ दफ्तर में किसी ने शिकायत की थी, बेलघाट क्षेत्र के मनोज मेडिसिन सेंटर पर गांव के ही डॉ. रामनयन यादव इलाज करते हैं। गुरुवार को तेज बुखार से पीड़ित मासूम का वहां इलाज हो रहा था। शाम तक हालत बिगड़ने पर आनन-फानन में उसे बेलघाट पीएचसी रेफर कर दिया गया, मगर पीएचसी पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। सीएमओ ने जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. एनके पांडेय, पीएचसी प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, सहायक शोध अधिकारी सुधांशु श्रीवास्तव व हेल्थ सुपरवाइजर केके श्रीवास्तव को भेजा। टीम जब मनोज मेडिसिन सेंटर पहुंची तो वहां मौके पर डॉ. रामनरायन मिले। मगर जांच टीम को वह चिकित्सा शिक्षा से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं दिखा सके। दवा की दुकान का भी लाइसेंस उनके पास नहीं था। टीम को मौके पर ड्रिप सेट और सीरिंज भी मिला। टीम ने अस्पताल सीजकर आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके बाद जांच टीम सिकरीगंज में एक शिकायत की पड़ताल करने पहुंची। शिकायतकर्ता ने डीएम को बताया था कि कस्बे में एक आयुर्वेद डॉक्टर डॉ. ध्रुवनरायण ओझा फर्जी तरीके से मेडिकोलीगल बनाते हैं। टीम जब वहां पहुंची तो डॉ. ओझा ने बताया कि उन्होंने आयुर्वेद विधा से पढ़ाई की है। उन्होंने माना कि कुछ लोगों को मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाकर दिया है, जबकि ऐसा करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जांच टीम को उनके सेंटर पर ऑपरेशन थिएटर और एलोपैथिक दवाएं भी मिलीं। इसके अलावा पत्नी कामनी ओझा का भी चिकित्सा शिक्षा का प्रमाण पत्र वह दिखा नहीं सके। टीम ने उसे भी सीज कर दिया।
दोनों डॉक्टरों के अस्पताल को सीज कर दिया गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ने तो ऑपरेशन थियेटर भी बना रखा था। दोनों डॉक्टरों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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- डा. रवींद्र कुमार, सीएमओ
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सीएमओ दफ्तर में किसी ने शिकायत की थी, बेलघाट क्षेत्र के मनोज मेडिसिन सेंटर पर गांव के ही डॉ. रामनयन यादव इलाज करते हैं। गुरुवार को तेज बुखार से पीड़ित मासूम का वहां इलाज हो रहा था। शाम तक हालत बिगड़ने पर आनन-फानन में उसे बेलघाट पीएचसी रेफर कर दिया गया, मगर पीएचसी पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। सीएमओ ने जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. एनके पांडेय, पीएचसी प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार, सहायक शोध अधिकारी सुधांशु श्रीवास्तव व हेल्थ सुपरवाइजर केके श्रीवास्तव को भेजा। टीम जब मनोज मेडिसिन सेंटर पहुंची तो वहां मौके पर डॉ. रामनरायन मिले। मगर जांच टीम को वह चिकित्सा शिक्षा से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं दिखा सके। दवा की दुकान का भी लाइसेंस उनके पास नहीं था। टीम को मौके पर ड्रिप सेट और सीरिंज भी मिला। टीम ने अस्पताल सीजकर आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके बाद जांच टीम सिकरीगंज में एक शिकायत की पड़ताल करने पहुंची। शिकायतकर्ता ने डीएम को बताया था कि कस्बे में एक आयुर्वेद डॉक्टर डॉ. ध्रुवनरायण ओझा फर्जी तरीके से मेडिकोलीगल बनाते हैं। टीम जब वहां पहुंची तो डॉ. ओझा ने बताया कि उन्होंने आयुर्वेद विधा से पढ़ाई की है। उन्होंने माना कि कुछ लोगों को मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाकर दिया है, जबकि ऐसा करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जांच टीम को उनके सेंटर पर ऑपरेशन थिएटर और एलोपैथिक दवाएं भी मिलीं। इसके अलावा पत्नी कामनी ओझा का भी चिकित्सा शिक्षा का प्रमाण पत्र वह दिखा नहीं सके। टीम ने उसे भी सीज कर दिया।
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दोनों डॉक्टरों के अस्पताल को सीज कर दिया गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ने तो ऑपरेशन थियेटर भी बना रखा था। दोनों डॉक्टरों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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- डा. रवींद्र कुमार, सीएमओ