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नेपाल में भारत मैदानी तो चीन पहाड़ी इलाकों में दौड़ाएगी ट्रेन

Mon, 30 Sep 2019 07:22 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महराजगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महराजगंज Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 30 Sep 2019 07:22 PM IST
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Trains will run in Nepal with the help of India and China
भारत-नेपाल बॉर्डर - फोटो : अमर उजाला

भारत व चीन जैसे मजबूत देशों का पड़ोसी होने का लाभ नेपाल को रेल परियोजनाओं के रुप में भी मिलेगा। दोनों देश की रेलगाड़ियां अब कुछ ही वर्षों में नेपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में दौडेंगी। 

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चीन पहाड़ी इलाकों में अपनी रेलगाड़ी दौड़ाएगा तो भारतीय रेल नेपाल के मैदानी इलाकों में विस्तार योजना दे रही है। इससे नेपाल को काफी लाभ होगा। 

यह जानकारी नेपाल के रेल विभाग महानिदेशक बलराम मिश्र ने सोमवार को काठमांडू में पत्रकारों से बातचीत में बताई। उन्होंने बताया कि चीन के साथ रेलवे का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) लगभग तैयार है। 8-10 अक्तूबर तक चीन के विदेश मंत्री वांग यी नेपाल के दौरे पर आने की संभावना है। जिसमें नेपाल-चीन परिवहन योजनाओं पर अहम वार्ता होगी। जिसमे रेल परियोजना प्रमुख है। चीन के विदेश मंत्री के बाद राष्ट्रपति भी आएंगे। इसके बाद नेपाल में रेल परियोजन को लेकर अंतिम मुहर लगेगी। 
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नेपाल के केरुंग तक रेल लाइन बिछाई जाएगी
चीन के ल्हासा-शिगात्से रेलमार्ग से नेपाल को रेलमार्ग से जोड़ा जाएगा। शिगात्से से नेपाल के रुसुंग सीमा की दूरी करीब 547 किलोमीटर है। यहां रेल लाइन बिछाने का काम जारी है। फिर रुसुंग से नेपाल के केरुंग तक रेल लाइन बिछाई जाएगी। फिर केरूंग से 140 किलोमीटर दूर स्थित काठमांडू के लिए रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। 
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वर्ष 2020 तक चीन-नेपाल सरहद तक रेल लाइन बिछ जाने की कार्ययोजना बनाई गई है। इसके बाद वर्ष 2022 तक चीन की रेल काठमांडू पहुंच जाएगी। पहाड़ी इलाकों में प्रस्तावित इस रेल मार्ग के करीब 94 फीसद भाग पर पुल व सुरंगें होंगी। इसके उपरांत पोखरा व लुम्बिनी को भी रेलमार्ग से जोड़े जाने पर वार्ता हुई है।

भैरहवा से लुम्बिनी और बुटवल दौडेगी ट्रेन
नेपाल रेल विभाग के अनुसार भारतीय रेल जयनगर से नेपाल में प्रवेश कर जनकपुर व कुर्था तक करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसके बाद इसका 52 किलोमीटर दूर तक विस्तार करने की योजना है। इस रेलवे परियोजना की लागत 84 करोड़ 65 लाख है। जिसका 20 फीसद भुगतान नेपाल ने भारत को कर दिया है। वर्ष 2020 तक इस रेल रुट के शुरु हो जाने की संभावना जताई जा रही है। 


नौतनवां सोनौली और भैरहवा रेलवे लाइन के साथ ही भैरहवा से लुम्बिनी और बुटवल की 44.4 किमी रेलवे लाइन बिछाने की स्वीकृति भारत सरकार ने दिया है। भारत सरकार जलपाईगुड़ी से काकड़ भिट्ठा 100 किमी, जयनगर बिजलपुरा से बर्दिबास 69 किमी, जोगबनी से विराटनगर 18 किमी, रूपेडिया से नेपालगंज 14 किमी रेलवे लाइन बनाकर भारतीय रेल नेपाल की सरहद में पहुंचेगी।

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