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प्रशासन के ‘पोषण’ पर कुपोषण भारी
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 16 Dec 2016 01:40 AM IST
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malnutrition
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कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार के सभी प्रयास बेमानी साबित हो गए। पिछले साल की तुलना में इस साल अति कुपोषित बच्चों को 22 हजार और बढ़ गई है। इस रिकार्ड से साबित हो रहा है कि प्रशासन के ‘पोषण’ पर कुपोषण भारी है।
बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने एक अभियान चलाया है। इसके लिए जिले भर के शून्य से लेकर पांच साल तक के बच्चों का वजन किया गया। इसमें मानक तय है और चार्ट भी बना हुआ है। कितने साल के बच्चे के लिए कितना वजन होने पर बच्चा सामान्य होगा। कितना वजन होने पर कुपोषित तथा कितने पर अति कुपोषित होगा। यह वजन पिछले साल भी हुआ था।
पिछले साल जिले में हुए तौल के बाद 32 हजार बच्चे अति कुपोषित पाए गए थे। कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से गर्भवती महिलाओं को गरम भोजन के अलावा उन्हें दूध, दही दिया गया। इन्हें यह महीने में 12 दिन पौष्टिक आहार दिया गया। जबकि बच्चों को महीने में 25 दिन गरम भोजन के अलावा मौसमी फल व घी दिया जाता था। बावजूद इसके एक साल में अति कुपोषित बच्चों की संख्या घटने की जगह 22 हजार और बढ़ गई। इससे सरकार के प्रयासों पर सवाल खड़ा हो गया है।
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बाल विकास विभाग के अनुसार केंद्र सरकार के सर्वे के मुताबिक पूरे यूपी में 12.9 प्रतिशत अति कुपोषित बच्चे हैं। पहली बार सभी बच्चों का वजन नहीं हुआ था। इस नाते पिछली बार 6.5 प्रतिशत ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या सामने आई थी। इस बार जो सर्वे हुआ है उसमें सभी बच्चों का वजन किया गया है, जिसमें यूपी में 9.9 प्रतिशत बच्चे अति कुपोषण मिले। जिले में यह संख्या 11.01 प्रतिशत है।
जो बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं उनकी बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास उनकी विभाग की तरफ से किया जाएगा। एएनएम के माध्यम से सीएचसी, पीएचसी पर भेज कर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। शासन द्वारा प्रदत्त हर सुविधाएं उनको उपलब्ध कराई जाएंगी।
- हेमंत सिंह जिला कार्यक्रम अधिकारी
वजन दिवस की रिपोर्ट
0 से 5 वर्ष के बच्चों की संख्या : 517368
वजन हुआ 488915
संख्या प्रतिशत में 94.5 प्रतिशत
सामान्य की संख्या 312779
कुपोषित बच्चों की संख्या 122118
अति कुपोषित बच्चे 54018
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बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने एक अभियान चलाया है। इसके लिए जिले भर के शून्य से लेकर पांच साल तक के बच्चों का वजन किया गया। इसमें मानक तय है और चार्ट भी बना हुआ है। कितने साल के बच्चे के लिए कितना वजन होने पर बच्चा सामान्य होगा। कितना वजन होने पर कुपोषित तथा कितने पर अति कुपोषित होगा। यह वजन पिछले साल भी हुआ था।
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पिछले साल जिले में हुए तौल के बाद 32 हजार बच्चे अति कुपोषित पाए गए थे। कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से गर्भवती महिलाओं को गरम भोजन के अलावा उन्हें दूध, दही दिया गया। इन्हें यह महीने में 12 दिन पौष्टिक आहार दिया गया। जबकि बच्चों को महीने में 25 दिन गरम भोजन के अलावा मौसमी फल व घी दिया जाता था। बावजूद इसके एक साल में अति कुपोषित बच्चों की संख्या घटने की जगह 22 हजार और बढ़ गई। इससे सरकार के प्रयासों पर सवाल खड़ा हो गया है।
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बाल विकास विभाग के अनुसार केंद्र सरकार के सर्वे के मुताबिक पूरे यूपी में 12.9 प्रतिशत अति कुपोषित बच्चे हैं। पहली बार सभी बच्चों का वजन नहीं हुआ था। इस नाते पिछली बार 6.5 प्रतिशत ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या सामने आई थी। इस बार जो सर्वे हुआ है उसमें सभी बच्चों का वजन किया गया है, जिसमें यूपी में 9.9 प्रतिशत बच्चे अति कुपोषण मिले। जिले में यह संख्या 11.01 प्रतिशत है।
जो बच्चे अति कुपोषित पाए गए हैं उनकी बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास उनकी विभाग की तरफ से किया जाएगा। एएनएम के माध्यम से सीएचसी, पीएचसी पर भेज कर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। शासन द्वारा प्रदत्त हर सुविधाएं उनको उपलब्ध कराई जाएंगी।
- हेमंत सिंह जिला कार्यक्रम अधिकारी
वजन दिवस की रिपोर्ट
0 से 5 वर्ष के बच्चों की संख्या : 517368
वजन हुआ 488915
संख्या प्रतिशत में 94.5 प्रतिशत
सामान्य की संख्या 312779
कुपोषित बच्चों की संख्या 122118
अति कुपोषित बच्चे 54018