{"_id":"588120e64f1c1bc77cefe67f","slug":"spouse-accept-the-child-who-found-on-the-road","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनों ने लावारिस किया, चंद घंटे में मिल गई पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनों ने लावारिस किया, चंद घंटे में मिल गई पहचान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 20 Jan 2017 01:56 AM IST
विज्ञापन
कूड़ाघाट में लावारिस मिली बच्ची को गोद में लिए महिला।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिस मां-बाप ने पैदा किया वे तो अपने नहीं हुए मगर जहां उसे मरने को फेंका गया वहीं उसे अपने मिल गए। ये वाकया कूड़ाघाट सैनिक बिहार कॉलोनी में देखने को मिला। जहां कपडे़ में लपेटकर फेंकी गई नवजात को मोहल्ले के ही रहने वाले दंपती ने अपना लिया और उसे उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया।
सैनिक विहार कॉलोनी निवासी मनोज पांडेय की बेटी खुशी सुबह किसी काम से बाहर निकली थीं। घर के पास ही खाली प्लाट में किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी तो उन्होंने वहां जाकर देखा कि एक कपड़े में लपेटकर नवजात बच्ची पड़ी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इसी बीच आसपास के लोग एकत्र हो गए। सभी नौ माह तक बच्ची को कोख में पालने वाली उस मां को कोसने लगे लेकिन पुलिस और कानूनी पचड़ों के डर से कोई उसे छूने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
इसी बीच दीनदयाल सिंह की पत्नी शंभा सिंह आगे आईं और बच्ची को उठाकर सीने से लगा लिया। बच्ची ठंड से कांप रही थी। शंभा उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गईं, जहां उसे टीका लगाया गया। इसके बाद पहुंची पुलिस की मदद से उसे जिला अस्पताल भेज दिया। जहां तत्काल एनआइसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष) में रखने की जरूरत बताते हुए जिला अस्पताल के डाक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। दीनदयाल सिंह मूल रूप से हाटा, कुशीनगर के रहने वाले हैं। पेशे से शिक्षक हैं, और नंदानगर में संगम गुप्त के घर में किराये का कमरा लेकर रहते हैं। आठ साल का उनका एक बेटा है। नवजात को अपनाने के बाद शंभा सिंह ने कहा कि भगवान ने एक बेटा दिया था। बेटी की कमी थी वह पूरी हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सैनिक विहार कॉलोनी निवासी मनोज पांडेय की बेटी खुशी सुबह किसी काम से बाहर निकली थीं। घर के पास ही खाली प्लाट में किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी तो उन्होंने वहां जाकर देखा कि एक कपड़े में लपेटकर नवजात बच्ची पड़ी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इसी बीच आसपास के लोग एकत्र हो गए। सभी नौ माह तक बच्ची को कोख में पालने वाली उस मां को कोसने लगे लेकिन पुलिस और कानूनी पचड़ों के डर से कोई उसे छूने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
विज्ञापन
इसी बीच दीनदयाल सिंह की पत्नी शंभा सिंह आगे आईं और बच्ची को उठाकर सीने से लगा लिया। बच्ची ठंड से कांप रही थी। शंभा उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गईं, जहां उसे टीका लगाया गया। इसके बाद पहुंची पुलिस की मदद से उसे जिला अस्पताल भेज दिया। जहां तत्काल एनआइसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष) में रखने की जरूरत बताते हुए जिला अस्पताल के डाक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। दीनदयाल सिंह मूल रूप से हाटा, कुशीनगर के रहने वाले हैं। पेशे से शिक्षक हैं, और नंदानगर में संगम गुप्त के घर में किराये का कमरा लेकर रहते हैं। आठ साल का उनका एक बेटा है। नवजात को अपनाने के बाद शंभा सिंह ने कहा कि भगवान ने एक बेटा दिया था। बेटी की कमी थी वह पूरी हो गई।
विज्ञापन