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सहज जीवन शैली का माध्यम है सहज योग
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 26 Jun 2016 01:42 AM IST
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सहज योग
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आगे बढ़ने की होड़ और बच्चों में पढ़ाई के वक्त से जन्म ले रही प्रतियोगी स्पर्धा से काम का दबाव तथा मानसिक तनाव हर आयु वर्ग के जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। मन की बेचैनी ही शारीरिक व्याधियों का बड़ा कारण है। मान्यता है कि मन प्रसन्न तो स्वस्थ रहे तन। ऐसे में शारीरिक समस्याओं से बचने के लिए मन का सेहतमंद होना पहली जरूरत है। यही वजह है कि अब चिकित्सक भी दवा के साथ मन को शांत करने और खुद को समझने के लिए कुछ वक्त दिए जाने की सलाह भी देते हैं। ऐसे में सहज योग की विधा को सशक्त माध्यम माना जा रहा है।
योग की विविध विधाओं में शामिल सहज योग न सिर्फ मन को समझने, एकाग्रता बढ़ाने की सीख देता है बल्कि सही जीवनशैली से स्वास्थ्य संबंधी विकार दूर करने में भी मदद मिलती है। सहज योग के जिला समन्वयक रवींद्र सिंह ने बताया कि ध्यान (मेडिटेशन) पर केंद्रित यह विधा न सिर्फ आत्म साक्षात्कार कराती है बल्कि निरंतर अभ्यास कुंडलिनी शक्ति की जागृति तक भी पहुंचाता है।
सहज योग नेशनल ट्रस्ट के ट्रस्टी बीएन तिवारी के मुताबिक इससे एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है, जो विद्यार्थी से लेकर किसी भी व्यवसाय से जुड़े शख्स और घर का संचालन करने वाली महिलाओं को सहज तरीके से लक्ष्य प्राप्ति में मददगार होती है। यही वजह है कि काम के दबाव से तनाव की चपेट में आने वाले तमाम सुरक्षा बल और रेल के तमाम कर्मचारी, वित्तीय संस्थाओं से जुड़े लोग सहज योग को सहजता से स्वीकार कर रहे हैं। मां श्री निर्मला देवी के निर्देशन में विकसित हुई योग की इस विधा में शारीरिक श्रम या कसरत न होने से हर आयु वर्ग के लोग इसे सरलता से जीवन का हिस्सा बना सकते हैं।
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रविवार की सुबह सहज योग और अमर उजाला की टीम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले निशुल्क प्रशिक्षण शिविरों के समय और स्थान की जानकारी एक दिन पहले अखबार के जरिए दी जाएगी। उम्मीद है कि भोर के कुदरती माहौल में साफ और खुली हवा के बीच सहज योग के साथ गुजारा गया वक्त अधिकतम लोगों को स्ट्रैस और उससे जन्म लेने वाले शारीरिक व मनोरोगों को काबू करने में मददगार होगा।
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योग की विविध विधाओं में शामिल सहज योग न सिर्फ मन को समझने, एकाग्रता बढ़ाने की सीख देता है बल्कि सही जीवनशैली से स्वास्थ्य संबंधी विकार दूर करने में भी मदद मिलती है। सहज योग के जिला समन्वयक रवींद्र सिंह ने बताया कि ध्यान (मेडिटेशन) पर केंद्रित यह विधा न सिर्फ आत्म साक्षात्कार कराती है बल्कि निरंतर अभ्यास कुंडलिनी शक्ति की जागृति तक भी पहुंचाता है।
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सहज योग नेशनल ट्रस्ट के ट्रस्टी बीएन तिवारी के मुताबिक इससे एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है, जो विद्यार्थी से लेकर किसी भी व्यवसाय से जुड़े शख्स और घर का संचालन करने वाली महिलाओं को सहज तरीके से लक्ष्य प्राप्ति में मददगार होती है। यही वजह है कि काम के दबाव से तनाव की चपेट में आने वाले तमाम सुरक्षा बल और रेल के तमाम कर्मचारी, वित्तीय संस्थाओं से जुड़े लोग सहज योग को सहजता से स्वीकार कर रहे हैं। मां श्री निर्मला देवी के निर्देशन में विकसित हुई योग की इस विधा में शारीरिक श्रम या कसरत न होने से हर आयु वर्ग के लोग इसे सरलता से जीवन का हिस्सा बना सकते हैं।
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आइए करें हर रविवार, योगाचार
तनाव और दबाव से दूर रहते हुए स्वस्थ जीवन की आम ख्वाहिश में मददगार होनी वाली सहज योग शैली को शहरियों के करीब तक ले जाने के लिए अमर उजाला हर रविवार को निशुल्क शिविर का आयोजन करेगा। सहज योग के विशेषज्ञों की देखरेख में चलने वाले इन शिविरों का आयोजन पार्क बदल-बदल कर अलग-अलग इलाकों में किया जाएगा, ताकि लोगों को अपने घर के करीब ही रविवार की सुबह सहज योग का हिस्सा बनने का अवसर मिल सके।रविवार की सुबह सहज योग और अमर उजाला की टीम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले निशुल्क प्रशिक्षण शिविरों के समय और स्थान की जानकारी एक दिन पहले अखबार के जरिए दी जाएगी। उम्मीद है कि भोर के कुदरती माहौल में साफ और खुली हवा के बीच सहज योग के साथ गुजारा गया वक्त अधिकतम लोगों को स्ट्रैस और उससे जन्म लेने वाले शारीरिक व मनोरोगों को काबू करने में मददगार होगा।