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लटक गया 322 भावी इंजीनियरों का वजीफा

Sun, 17 Jul 2016 07:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Sun, 17 Jul 2016 07:43 PM IST
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Scholarship of 322 engineers has been pending
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के 322 सामान्य वर्ग के भावी इंजीनियरों का वजीफा शासन की गलियों के बीच फंसकर रहा गया है। बीटेक के हर वर्ष के और हर ब्रांच से जुड़े विद्यार्थी यूनिवर्सिटी से लेकर शासन तक दर-दर भटक रहे हैं लेकिन कहीं से उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा। वजीफे के लिए इस भागदौड़ में उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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दरअसल हर बार की तरह पिछले सत्र में भी यूनिवर्सिटी के गरीब जनरल, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के विद्यार्थियों ने वजीफे के लिए आवेदन किया। ओबीसी, एससी और एसटी के पात्र अभ्यर्थियों का वजीफा तो आ गया, लेकिन गरीब जनरल विद्यार्थियों का नहीं आया। इन विद्यार्थियों के पास ‘एकाउंट नॉट वेरीफाई बाई बैंक’ का संदेश आ गया। एक-दो नहीं बल्कि 322 विद्यार्थी इस संदेश के दायरे में आ गए। इससे सकते में आए विद्यार्थी यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास पहुंचे तो पता चला कि वहां से आवेदन की प्रक्रिया पूरी की गई है और यह मामला समाज कल्याण विभाग के पाले में है।
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विद्यार्थियों ने समाज कल्याण विभाग में गुहार लगाई तो वहां से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि सारे आवेदन एनआईसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। अब सब कुछ शासन के हाथ में है। समाज कल्याण विभाग से मिले जवाब के बाद जब विद्यार्थियों ने शासन से संपर्क साधा तो वहां से उन्हें वजीफे का बजट समाप्त हो जाने की जानकारी दी गई। जब बजट ही नहीं है तो ‘एकाउंट नॉट वेरीफाइड बाई बैंक’ के संदेश का क्या मतलब, इस सवाल का जवाब कोई ठोस जवाब किसी जिम्मेदार से नहीं मिला। हताश-निराश विद्यार्थी अब व्यवस्था को कोस रहे हैं।
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विद्यार्थियों के वजीफे के आवेदन की सारी जानकारी एनआईसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई थी। बावजूद इसके 322 विद्यार्थियों का वजीफा नहीं आया। इस समस्या से निदेशालय को अवगत करा दिया गया था। निदेशालय से इसकी फाइल शासन को भेज दी गई है। अब हमें भी शासन के निर्णय का इंतजार है। 

- सुनील कुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी, गोरखपुर 

यूनिवर्सिटी की ओर से वजीफे के लिए आवेदन की प्रक्रिया समय से पूरी कर फाइल समाज कल्याण विभाग को भेज दी गई थी। ऐसे में वजीफा न मिलने में यूनिवर्सिटी की कोई गलती नहीं है। वजीफा समाज कल्याण विभाग की ओर से दिया जाता है, इसलिए इस संबंध में वहीं से सही जानकारी मिल सकती है। 
- प्रो. ओंकार सिंह, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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