{"_id":"579f723c4f1c1b95302b8e86","slug":"scam-in-national-child-health-programme","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में घोटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Mon, 01 Aug 2016 09:31 PM IST
विज्ञापन
छात्रवृत्ति घोटाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग में बड़ा घोटाला सामने आया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गाड़ियों के किराए के भुगतान में बड़ा खेल हुआ है। एक ही नंबर की गाड़ी का कई जिलों में इस्तेमाल हुआ है। आडिट के बाद पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ। मामला उजागर होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने सभी जिलों के डीएम को पत्र जारी कर 10 दिन में जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया है। उन्होंने दोषी कर्मचारी, अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को भी कहा है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों की एक टीम बनाई जाती है। इस टीम को स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करनी होती है और ज्यादा कमी सामने आने पर बच्चे को इलाज के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजना होता है। इसके लिए शासन की गाइडलाइन है कि सिर्फ बंद गाड़ी का इस्तेमाल होगा ताकि टीम आसानी से जा सके। मगर प्रदेश के कई जिलों में बंद चार पहिया वाहनों की जगह छोटे वाहनों जैसे ऑटो, स्कूटर का इस्तेमाल किया गया, जबकि भुगतान के लिए बड़ी गाड़ी के नंबर का इस्तेमाल किया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि टीम स्कूलों में गई ही नहीं। सिर्फ कागजों में ही काम हुआ है। आडिट के दौरान एक ही नंबर की गाड़ी के कई जिलों में पहुंचने पर शक के आधार पर जांच कराई गई तो छोटे वाहनों के इस्तेमाल का पर्दाफाश हो गया। स्वास्थ्य विभाग में हुए इस घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सभी जिलों के डीएम को दी गई है।
गोरखपुर जिले के पिपराइच, जंगल कौड़िया, भटहट, गोला, खोराबार, कैंपियरगंज ब्लॉक में घोटाले की जांच होनी है। एनएचएम निदेशक ने साफ कहा है कि इस मामले में यदि कर्मचारी के अलावा अधिकारी भी दोषी मिले तो उन पर भी एफआईआर दर्ज हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों की एक टीम बनाई जाती है। इस टीम को स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करनी होती है और ज्यादा कमी सामने आने पर बच्चे को इलाज के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजना होता है। इसके लिए शासन की गाइडलाइन है कि सिर्फ बंद गाड़ी का इस्तेमाल होगा ताकि टीम आसानी से जा सके। मगर प्रदेश के कई जिलों में बंद चार पहिया वाहनों की जगह छोटे वाहनों जैसे ऑटो, स्कूटर का इस्तेमाल किया गया, जबकि भुगतान के लिए बड़ी गाड़ी के नंबर का इस्तेमाल किया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि टीम स्कूलों में गई ही नहीं। सिर्फ कागजों में ही काम हुआ है। आडिट के दौरान एक ही नंबर की गाड़ी के कई जिलों में पहुंचने पर शक के आधार पर जांच कराई गई तो छोटे वाहनों के इस्तेमाल का पर्दाफाश हो गया। स्वास्थ्य विभाग में हुए इस घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सभी जिलों के डीएम को दी गई है।
विज्ञापन
गोरखपुर जिले के पिपराइच, जंगल कौड़िया, भटहट, गोला, खोराबार, कैंपियरगंज ब्लॉक में घोटाले की जांच होनी है। एनएचएम निदेशक ने साफ कहा है कि इस मामले में यदि कर्मचारी के अलावा अधिकारी भी दोषी मिले तो उन पर भी एफआईआर दर्ज हो।
विज्ञापन