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पोस्टमार्टम को लेकर मेडिकल कॉलेज में हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 09 May 2016 08:50 PM IST
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मेडिकल कॉलेज
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सोमवार दोपहर मेडिकल कॉलेज में एक शव के पोस्टमार्टम को लेकर जमकर हंगामा हुआ। घर वाले का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर रहे थे और डॉक्टर मौत की वजह जहरीला शराब बताते हुए नियम समझा रहे थे।
हंगामा बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया। हालांकि बाद में पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़े घर वालों ने लिखित में पुलिस के सामने अपनी बात रखी तो बॉडी उन्हें सौंप दी गई।
राजघाट थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी मंगरू शंकर सोनकर (60) को अधिक शराब पीने से तबीयत बिगड़ने पर रविवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान सोमवार दोपहर 2:10 बजे उनकी मौत हो गई। घर वाले शव को लेकर जाना चाहते थे मगर डॉक्टर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य बता रहे थे। इसी बात को लेकर डॉक्टरों और तीमारदारों में विवाद हो गया।
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बात बढ़ने पर पुलिस को सूचना दी गई तो मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को मोर्चरी भेजवा दिया। जहां एक बार फिर घर वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में पुलिस ने चौकी पर लिखित पत्र लेने के बाद शव को घर वालों के सुपुर्द कर दिया।
गोला इलाके के नवनीत तिवारी पर कुछ लोगों ने गड़ासे से हमला कर दिया था। घायलावस्था में घर वाले उन्हें गोला सीएचसी ले गए। मगर वहां पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बाद घर वाले सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर डॉक्टर ने उपचार तो कर दिया, लेकिन मेडिकोलीगल के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्र पर जाने की सलाह दी, जिस पर घर वाले भड़क गए।
इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. दुर्गेश कुमार सिंह ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया लेकिन घर वाले मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शहनवाज से मेडिकल कराने का आश्वासन मिलने के बाद सभी शांत हुए।
गोला सीएचसी पर नहीं थे डॉक्टर
नवनीत के घर वालों ने बताया कि गोला सीएचसी पर रात के समय डॉक्टर और स्टाफ कोई भी ड्यूटी पर नहीं था। इस वजह से मजबूरन जिला अस्पताल आना पड़ा और यहां पर डॉक्टर मेडिकल करने को तैयार ही नहीं हो रहे थे।
मामले की जानकारी हुई है। गोला इलाके से एक मरीज बिना रेफर हुए आया था। वह मेडिकल कराना चाहते थे, जिन्हें नियम बताया गया तो हंगामा करने लगे। मामले की पूरी जानकारी की जाएगी। जिला अस्पताल में सिर्फ गंभीर मरीजों का ही मेडिकल होता है।
- डॉ. एचआर यादव, एसआईसी
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हंगामा बढ़ने पर मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया। हालांकि बाद में पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़े घर वालों ने लिखित में पुलिस के सामने अपनी बात रखी तो बॉडी उन्हें सौंप दी गई।
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राजघाट थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी मंगरू शंकर सोनकर (60) को अधिक शराब पीने से तबीयत बिगड़ने पर रविवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान सोमवार दोपहर 2:10 बजे उनकी मौत हो गई। घर वाले शव को लेकर जाना चाहते थे मगर डॉक्टर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य बता रहे थे। इसी बात को लेकर डॉक्टरों और तीमारदारों में विवाद हो गया।
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बात बढ़ने पर पुलिस को सूचना दी गई तो मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को मोर्चरी भेजवा दिया। जहां एक बार फिर घर वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। बाद में पुलिस ने चौकी पर लिखित पत्र लेने के बाद शव को घर वालों के सुपुर्द कर दिया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हंगामा
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार देर रात मेडिकोलीगल को लेकर जमकर हंगामा हुआ। गोला इलाके का एक शख्स दो पक्षों के विवाद में घायल हो गया था। अस्पताल में उसका इलाज तो हो गया, मगर डॉक्टर ने मेडिकल करने से इंकार कर दिया। इसी बात पर तीमारदार भड़क गए। इमरजेंसी प्रभारी ने किसी तरह मामले को शांत कराया। घटना रविवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे की है।गोला इलाके के नवनीत तिवारी पर कुछ लोगों ने गड़ासे से हमला कर दिया था। घायलावस्था में घर वाले उन्हें गोला सीएचसी ले गए। मगर वहां पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बाद घर वाले सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर डॉक्टर ने उपचार तो कर दिया, लेकिन मेडिकोलीगल के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्र पर जाने की सलाह दी, जिस पर घर वाले भड़क गए।
इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. दुर्गेश कुमार सिंह ने उन्हें शांत कराने का प्रयास किया लेकिन घर वाले मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शहनवाज से मेडिकल कराने का आश्वासन मिलने के बाद सभी शांत हुए।
गोला सीएचसी पर नहीं थे डॉक्टर
नवनीत के घर वालों ने बताया कि गोला सीएचसी पर रात के समय डॉक्टर और स्टाफ कोई भी ड्यूटी पर नहीं था। इस वजह से मजबूरन जिला अस्पताल आना पड़ा और यहां पर डॉक्टर मेडिकल करने को तैयार ही नहीं हो रहे थे।
मामले की जानकारी हुई है। गोला इलाके से एक मरीज बिना रेफर हुए आया था। वह मेडिकल कराना चाहते थे, जिन्हें नियम बताया गया तो हंगामा करने लगे। मामले की पूरी जानकारी की जाएगी। जिला अस्पताल में सिर्फ गंभीर मरीजों का ही मेडिकल होता है।
- डॉ. एचआर यादव, एसआईसी