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डॉ. राठी के इस्तीफे ने खड़ी की मुसीबत
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Tue, 26 Jul 2016 08:42 PM IST
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मेडिकल कॉलेज बाल रोग विभाग के एकलौते प्रोफेसर डॉ. एके राठी का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। जून में इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने 15 जुलाई के बाद से काम करने से इन्कार कर दिया था। उनके इस्तीफे के साथ ही एमडी की सीटों पर संकट मंडराने लगा है। अगस्त में एमसीआई का दौरा होना है, जिसे लेकर कॉलेज प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है।
अगस्त के पहले सप्ताह में एमसीआई टीम का संभावित दौरा है। पिछली बार निरीक्षण में टीम ने कई कमियां गिनाई थीं। कॉलेज प्रशासन उन कमियों को दूर करने में जुटा था कि इसी बीच प्रोफेसर के इस्तीफे ने परेशानी बढ़ा दी। बाल रोग विभाग में एक एमडी और एक डिप्लोमा सीट को मान्यता है। वहीं दो एमडी और दो डिप्लोमा की सीट इस उम्मीद पर चलाई जा रही है कि उसे मान्यता मिल जाएगी। डॉ. राठी के इस्तीफे से बढ़ाई गई सीटों की मान्यता की कोशिश कर रहे कॉलेज को बड़ा झटका लगा है।
इस्तीफे के पीछे की वजह बीते दिनों हुए प्राचार्य के दौरे को बताया जा रहा है। दस जून को प्राचार्य ने बाल रोग विभाग का निरीक्षण किया था इस दौरान उपस्थिति पंजिका पर डॉ. राठी का हस्ताक्षर नहीं था। इस पर उन्हें गैरहाजिर कर दिया गया था। इसके बाद से ही वह नाराज चल रहे थे।
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सीट बचाने के साथ ही इंसेफेलाइटिस मरीजों का इलाज भी कॉलेज प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। चूंकि एमडी की सीट कम होने से डॉक्टर की कमी होना तय है, जिनके कंधों पर इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी हैं।
विभागाध्यक्ष ने लिखा पत्र
विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल ने प्राचार्य को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भी चेताया है कि एमसीआई की टीम के दौरे को देखते हुए एक प्रोफेसर की तत्काल जरूरत हैं। नहीं तो पीजी सीटों को खतरा हो सकता है। डॉ. राठी के जाने के बाद विभाग में कॉलेज के रिकॉर्ड के मुताबिक डॉ. रचना ही प्रोफसर हैं, मगर पीएमएस संवर्ग से होने के नाते एमसीआई उन्हें प्रोफेसर मानने से इन्कार कर चुकी है।
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अगस्त के पहले सप्ताह में एमसीआई टीम का संभावित दौरा है। पिछली बार निरीक्षण में टीम ने कई कमियां गिनाई थीं। कॉलेज प्रशासन उन कमियों को दूर करने में जुटा था कि इसी बीच प्रोफेसर के इस्तीफे ने परेशानी बढ़ा दी। बाल रोग विभाग में एक एमडी और एक डिप्लोमा सीट को मान्यता है। वहीं दो एमडी और दो डिप्लोमा की सीट इस उम्मीद पर चलाई जा रही है कि उसे मान्यता मिल जाएगी। डॉ. राठी के इस्तीफे से बढ़ाई गई सीटों की मान्यता की कोशिश कर रहे कॉलेज को बड़ा झटका लगा है।
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इस्तीफे के पीछे की वजह बीते दिनों हुए प्राचार्य के दौरे को बताया जा रहा है। दस जून को प्राचार्य ने बाल रोग विभाग का निरीक्षण किया था इस दौरान उपस्थिति पंजिका पर डॉ. राठी का हस्ताक्षर नहीं था। इस पर उन्हें गैरहाजिर कर दिया गया था। इसके बाद से ही वह नाराज चल रहे थे।
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सीट बचाने के साथ ही इंसेफेलाइटिस मरीजों का इलाज भी कॉलेज प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। चूंकि एमडी की सीट कम होने से डॉक्टर की कमी होना तय है, जिनके कंधों पर इंसेफेलाइटिस मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी हैं।
विभागाध्यक्ष ने लिखा पत्र
विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल ने प्राचार्य को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भी चेताया है कि एमसीआई की टीम के दौरे को देखते हुए एक प्रोफेसर की तत्काल जरूरत हैं। नहीं तो पीजी सीटों को खतरा हो सकता है। डॉ. राठी के जाने के बाद विभाग में कॉलेज के रिकॉर्ड के मुताबिक डॉ. रचना ही प्रोफसर हैं, मगर पीएमएस संवर्ग से होने के नाते एमसीआई उन्हें प्रोफेसर मानने से इन्कार कर चुकी है।