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प्लेटफॉर्म कई जगह धंसा, चलना मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:16 PM IST
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रेलवे स्टेशन गोरखपुर
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गोरखपुर। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर चलना आसान नहीं है। प्लेटफॉर्म नंबर तीन, चार, आठ और नौ कई जगह धंस गए हैं। गड्ढे भी इस कदर हैं कि संभल कर नहीं चले तो चोटिल हो सकते हैं।
आए दिन इन प्लेटफॉर्म पर लोगों को चोटें भी लग रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ट्रेन पर चढ़ने और उतरने में हो रही है। सामान साथ है तो सकुशल बोगी तक पहुंचना आसान नहीं है। प्लेटफॉर्म तीन और चार की स्थिति बहुत खराब है।
इंटरलॉकिंग धंस गए हैं और चूहों के बिल से भी कई जगह प्लेटफॉर्म धंसा हुआ है। वहीं प्लेटफॉर्म नौ को महाप्रबंधक के निर्देश पर दुरुस्त भी किया गया था लेकिन स्थिति पहले जैसी ही हो गई है।
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फुट ओवरब्रिज से नीचे तो आसानी से आ गए लेकिन प्लेटफॉर्म पर उबड़-खाबड़ होने के कारण बहुत दिक्कत हुई। सामान अधिक था, जिसे लेकर बोगी तक काफी मुश्किल से पहुंच पाया। यह समस्या सबके सामने है, रेल प्रशासन को इसे तत्काल ठीक कराना चाहिए।
शैलेश पांडेय, यात्री
किसी तरह सामान लेकर पहुंचा हूं। ट्राली बैग को खींच नहीं पाया। गड्ढों में पहिया फंस जा रहा था, आखिरकार बैग को उठाकर ले जाना पड़ा। भीड़ अधिक थी और बहुत सारे लोग गिरने से बच रहे थे। यात्री सुविधाओं की बात की जा रही है लेकिन ट्रेन में सामान लेकर चढ़ना मुश्किल है।
प्रवीण सिंह, यात्री
आए दिन इन प्लेटफॉर्म पर लोगों को चोटें भी लग रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ट्रेन पर चढ़ने और उतरने में हो रही है। सामान साथ है तो सकुशल बोगी तक पहुंचना आसान नहीं है। प्लेटफॉर्म तीन और चार की स्थिति बहुत खराब है।
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इंटरलॉकिंग धंस गए हैं और चूहों के बिल से भी कई जगह प्लेटफॉर्म धंसा हुआ है। वहीं प्लेटफॉर्म नौ को महाप्रबंधक के निर्देश पर दुरुस्त भी किया गया था लेकिन स्थिति पहले जैसी ही हो गई है।
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फुट ओवरब्रिज से नीचे तो आसानी से आ गए लेकिन प्लेटफॉर्म पर उबड़-खाबड़ होने के कारण बहुत दिक्कत हुई। सामान अधिक था, जिसे लेकर बोगी तक काफी मुश्किल से पहुंच पाया। यह समस्या सबके सामने है, रेल प्रशासन को इसे तत्काल ठीक कराना चाहिए।
शैलेश पांडेय, यात्री
किसी तरह सामान लेकर पहुंचा हूं। ट्राली बैग को खींच नहीं पाया। गड्ढों में पहिया फंस जा रहा था, आखिरकार बैग को उठाकर ले जाना पड़ा। भीड़ अधिक थी और बहुत सारे लोग गिरने से बच रहे थे। यात्री सुविधाओं की बात की जा रही है लेकिन ट्रेन में सामान लेकर चढ़ना मुश्किल है।
प्रवीण सिंह, यात्री