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सख्ती का फरमान बेअसर, डीएम ने निकाला बीच का रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Tue, 30 Aug 2016 12:38 AM IST
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धरना देते लेखपाल।
- फोटो : Rajesh Kumar
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हड़ताल को अवैध करार देने वाले शासन के फरमान से बेफिक्र लेखपालों ने सोमवार को भी कामकाज ठप रखा। उनका कहना है कि जब तक प्रदेश नेतृत्व कोई निर्देश नहीं जारी करता, आंदोलन जारी रहेगा। उधर, शासन की तरफ से कार्रवाई की रूपरेखा स्पष्ट न होने से जिला प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला है। लेखपालों के हड़ताल पर होने से सर्वाधिक दिक्कत जाति, आय, निवास आदि प्रमाणपत्रों को लेकर हो रही है। इसे देखते हुए डीएम ओएन सिंह ने यह काम कानूनगो को दे दिया है।
डीएम के निर्देश में कहा गया है कि कानूनगो, अमीन आदि की मदद से आवेदनों का सत्यापन करेंगे, ताकि प्रमाण पत्र समय से जारी किए जा सकें। लेखपालों की हड़ताल जारी रहने तक तहसीलदार के अकाउंट से प्रमाणपत्रों के आवेदन, कानूनगो के पास जाएंगे। इसी तरह जमानत आदि के सत्यापन का काम भी कानूनगो ही देखेंगे। हालांकि, जिला प्रशासन की यह कवायद कितनी सफल होती है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। क्योंकि लेखपालों की तुलना में कानूनगो की संख्या सीमित है। यही नहीं शहर के सभी मोहल्लों आदि की जानकारी भी कानूनगो को उतनी नहीं है, जितनी लेखपालों को। एक सप्ताह से लेखपालों के हड़ताल पर रहने के कारण जिले में हजारों की संख्या में प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित पड़े हैं।
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डीएम के निर्देश में कहा गया है कि कानूनगो, अमीन आदि की मदद से आवेदनों का सत्यापन करेंगे, ताकि प्रमाण पत्र समय से जारी किए जा सकें। लेखपालों की हड़ताल जारी रहने तक तहसीलदार के अकाउंट से प्रमाणपत्रों के आवेदन, कानूनगो के पास जाएंगे। इसी तरह जमानत आदि के सत्यापन का काम भी कानूनगो ही देखेंगे। हालांकि, जिला प्रशासन की यह कवायद कितनी सफल होती है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। क्योंकि लेखपालों की तुलना में कानूनगो की संख्या सीमित है। यही नहीं शहर के सभी मोहल्लों आदि की जानकारी भी कानूनगो को उतनी नहीं है, जितनी लेखपालों को। एक सप्ताह से लेखपालों के हड़ताल पर रहने के कारण जिले में हजारों की संख्या में प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित पड़े हैं।
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