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जमीन के कारोबारियों ने मिटा दिए नदियों के निशान

Tue, 07 Jun 2016 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 07 Jun 2016 11:59 PM IST
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property dealers destroyed the river's identity
बनारस रोड नौसड़ बगहा बाबा मंदिर के पास बांध काटकार बनाया गया मकान । - फोटो : amar ujala
प्रापर्टी डीलिंग के फलते-फूलते कारोबार का असर नदियों पर भी पड़ा है। जमीन की तलाश में धंधेबाजों की नजर उन नालाें पर भी गड़ गई, जो बरसात में नदियों में विलीन हो जाते थे। ये नाले नदी से दूर दिखते जरूर थे, पर कई फीट गहरे इन नालों में गर्मी के दिनों में भी पानी भरा रहता था। मगर जमीन के कारोबारियों ने ऐसे कई नालों को पाटकर समतल कर दिया और प्लॉटिंग कर बेच दिया। यही नहीं, धंधेबाजों ने अपना हित साधने के लिए सिंचाई विभाग के बांध को भी ध्वस्त कर दिया।
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राप्ती पुल के समीप दक्षिणी छोर अमरूद की एक बगिया थी। कुछ साल पूर्व एक अवधूत महराज ने वहां अपना आश्रम बनाया था। इसी के बगल में नदी से जुड़ा एक नाला था। बरसात में नदी का पानी नाले से होकर नेशनल हाइवे तक पहुंच जाता था। सड़क पर आने के लिए अवधूत महाराज नाव का सहारा लेते थे।
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मगर जमीन के कारोबारियों ने कई सौ मीटर लंबे और करीब 10 से 15 फीट गहरे उस नाले को पाटकर बेच दिया। वहां पर अब कालोनी बन गई है। इसी तरह से इलाहीबाग के पास नदी के किनारे तक जमीन की प्लॉटिंग कर बेच दी गई। कुछ समय पहले एक लड़के के नदी में डूबने के दौरान मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी नदी के किनारे तक प्लॉटिंग देखकर चौंक गए, मगर कार्रवाई की कोई सुध नहीं ली गई।
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यही नहीं, कुछ साल पहले नौसड़ से कौड़ीराम की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे टीपी नगर से मरवड़िया कुएं तक बाढ़ से बचाव के लिए तटबंध बनाया गया था। शहर के कूड़े-करकट से बना यह तटबंध भी जमीन के सौदागरों की नजरों से नहीं बच पाया। धंधेबाजों ने बांध के बीच की जमीन पाटकर बेच दी और रास्ते के लिए उसे जगह-जगह काट दिया। उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

लोगों के जीवन से हो रहा खिलवाड़ 
जमीन के सौदागर नदी के किनारे तक प्लॉटिंग कर लोगों बेच रहे हैं। बरसात के दिनों में जहां पर नदी का पानी आता था, वहां घर बनाया जा रहा है। फर्जी कागजात तैयार कर रजिस्ट्री की जा रही है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई यदि नहीं हुई तो उनका मनोबल बढ़ता जाएगा। एक दिन नदी के किनारे भी प्रापर्टी डीलरों के कब्जे में हो जाएंगे। 

- कपिलमुनि यादव, पूर्व बीडीसी, कजाकपुर

बांध काटने वालाें पर हो कार्रवाई
जमीन के धंधेबाजों को जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है। 1998 की बाढ़ में जिस बांध को बचाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी लग गई थी। जमीन के कारोबारियों ने उसके अस्तित्व को ही मिटा दिया। नौसड़-कौड़ीराम बांध को जगह-जगह काट दिया गया। प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- शैलेंद्र पांडेय, ग्रामप्रधान, मिर्जापुर
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