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मेडिकल कॉलेज में टार्च की रोशनी में लगाए जा रहे इंजेक्शन
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2016 08:14 PM IST
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दवा, जांच और इलाज के जरूरी सामानों के संकट से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज में अब रोशनी का संकट खड़ा हो गया है। नेहरू अस्पताल के ज्यादातर वार्डों ओर गलियारों के बल्ब और ट्यूब लाइट फ्यूज हो गए हैं। पर कॉलेज की मजबूरी है कि रोशनी के ये संसाधन बदले नहीं जा सकते।
बजट के अभाव में बिजली के सामानों का स्टोर खाली है। बड़े-बड़े वार्डों में एक से दो बल्बों पर ही रोशनी की जिम्मेदारी है। नतीजतन शाम ढलते ही इंजेक्शन लगाने, डिप बदलने या बैंडेज बदलने के लिए टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे लेकर तीमारदारों की शिकायत के बाद जब अमर उजाला टीम ने अस्पताल की पड़ताल की तो यह दिक्कत पुरानी इमरजेंसी से ही मिलनी शुरू हो गई।
यही नहीं, यूजेज चार्ज हाल, जहां हर तीमारदार की आवग रहती है, वहां भी करीब-करीब अंधेरे जैसी ही स्थिति है। लंबे दायरे में रोशनी की जिम्मेदारी सिर्फ सौ वॉट के एक बल्ब पर है, जबकि वहां लगे छह ट्यूब लाइट लंबे समय से फ्यूज हैं। वार्ड नंबर एक, दो, चार, पांच, सात, नौ में एक-दो की साफ शक्ल भी नहीं दिख रही। यहां पहुंचने के लिए बनी सीढ़ियों की स्थिति तो यह है कि रात में आए दिन न दिखने के चलते तीमारदारों को चोट लग जा रही है। इंसेफेलाइटिस वार्ड में न्यू नेटल यूनिट को जाने वाली सीढ़ियां भी रोशनी विहीन हैं। उधर कॉलेज प्रशासन बजट का हवाला देते हुए फिलहाल रोशनी की समस्या से निजात दिलाने की किसी उम्मीद पर भी पानी फेर रहा है।
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शिकायत की, पर कुछ नहीं हुआ
दूसरे तल पर मौजूद न्यू नेटल यूनिट में मेरा बेटा भर्ती है। यूनिट तक जाने वाली सीढ़ी पर पिछले 15 दिन से ट्यूब लाइट फ्यूज है, जिससे खासी परेशानी होती है। कई बार शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ।
- लल्लू, संतकबीर नगर
दो बार गिर चुका हूं
उम्र होने की वजह से एक तो वैसे ही कम दिखता है, उस पर से अंधेरे में वार्ड तक जाने में दिक्कत और बढ़ गई है। दो बार गिर चुका हूं। नर्स और डॉक्टर सबसे कहा लेकिन सबसे सिर्फ डांट ही मिली।
- रामलाल, कसया
बजट न होने के चलते काफी समय से बिजली के सामान नहीं खरीदे जा सके हैं। इस कारण दिक्कत आई है। अब तो मार्च के बाद ही इस मद में रकम मिलेगी। फिलहाल उधार पर सामान मंगाने की कोशिश हो रही है।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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बजट के अभाव में बिजली के सामानों का स्टोर खाली है। बड़े-बड़े वार्डों में एक से दो बल्बों पर ही रोशनी की जिम्मेदारी है। नतीजतन शाम ढलते ही इंजेक्शन लगाने, डिप बदलने या बैंडेज बदलने के लिए टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे लेकर तीमारदारों की शिकायत के बाद जब अमर उजाला टीम ने अस्पताल की पड़ताल की तो यह दिक्कत पुरानी इमरजेंसी से ही मिलनी शुरू हो गई।
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यही नहीं, यूजेज चार्ज हाल, जहां हर तीमारदार की आवग रहती है, वहां भी करीब-करीब अंधेरे जैसी ही स्थिति है। लंबे दायरे में रोशनी की जिम्मेदारी सिर्फ सौ वॉट के एक बल्ब पर है, जबकि वहां लगे छह ट्यूब लाइट लंबे समय से फ्यूज हैं। वार्ड नंबर एक, दो, चार, पांच, सात, नौ में एक-दो की साफ शक्ल भी नहीं दिख रही। यहां पहुंचने के लिए बनी सीढ़ियों की स्थिति तो यह है कि रात में आए दिन न दिखने के चलते तीमारदारों को चोट लग जा रही है। इंसेफेलाइटिस वार्ड में न्यू नेटल यूनिट को जाने वाली सीढ़ियां भी रोशनी विहीन हैं। उधर कॉलेज प्रशासन बजट का हवाला देते हुए फिलहाल रोशनी की समस्या से निजात दिलाने की किसी उम्मीद पर भी पानी फेर रहा है।
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शिकायत की, पर कुछ नहीं हुआ
दूसरे तल पर मौजूद न्यू नेटल यूनिट में मेरा बेटा भर्ती है। यूनिट तक जाने वाली सीढ़ी पर पिछले 15 दिन से ट्यूब लाइट फ्यूज है, जिससे खासी परेशानी होती है। कई बार शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ।
- लल्लू, संतकबीर नगर
दो बार गिर चुका हूं
उम्र होने की वजह से एक तो वैसे ही कम दिखता है, उस पर से अंधेरे में वार्ड तक जाने में दिक्कत और बढ़ गई है। दो बार गिर चुका हूं। नर्स और डॉक्टर सबसे कहा लेकिन सबसे सिर्फ डांट ही मिली।
- रामलाल, कसया
बजट न होने के चलते काफी समय से बिजली के सामान नहीं खरीदे जा सके हैं। इस कारण दिक्कत आई है। अब तो मार्च के बाद ही इस मद में रकम मिलेगी। फिलहाल उधार पर सामान मंगाने की कोशिश हो रही है।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज