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लग्न में 1000-500 रुपये के नोटों का विघ्न
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 10 Nov 2016 01:37 AM IST
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एक हजार का नाोट
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हजार और पांच सौ रुपये के नोट पर रोक का असर किचन से लेकर बाजार तक पड़ा है। सभी अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कुछ ऐसी ही परेशानी खड़ी हो गई है बेटे-बेटियों की शादी वाले घरों में भी। दो दिन में लग्न शुरू हो रही है और 14 दिसंबर तक शहनाइयां बजेंगी। एक महीने के खरमास के बाद फिर शादियों का मौसम शुरू हो जाएगा। ऐसे में शादी-तिलक की तिथि तय हो जाने और कार्ड बंट जाने के बीच इन बड़े नोटों पर रोक ने कई परिवारों के होश फाख्ता कर दिए हैं।
तमाम तरह के खर्चों को ध्यान में रख सहूलियत के लिए बैंकों से जो 500-1000 रुपये के बड़े नोट निकलवाए गए, वही अब मुसीबत बन गए हैं। लाखों रुपये होने के बावजूद बुधवार को जहां कई लोग कार्ड छपने के बाद भी उसे दुकानों से घर नहीं ला सके वहीं शामियाना, ढोल-ताशा, मिठाई और खानसामा, चाट आदि की दुकानों पर बयाना देने पहुंचे कई लोगों को खाली लौटना पड़ा। बिना एडवांस के बुकिंग न हो पाने से अब तमाम परिवारों की धुकधुकी बढ़ गई है। वहीं कपड़ों, जेवर आदि की खरीदारी का भी संकट खड़ा हो गया है। यही नहीं, जहां लाखों रुपयों की दरकार है वहां दो, चार या 10 हजार रुपये की ही निकासी से भविष्य में भी यह संकट सुलझता नहीं देख लोग खुद को और मुसीबतों से घिरता पा रहे हैं।
लग्न की तिथियां-
नवंबर - 11, 16, 17, 21, 23, 24, 25, 26, 27, 30
दिसंबर- 1, 2, 3, 4, 8, 9, 12, 13, 14
खरीदारी छोड़, घर में धुन रहे सिर
बेटी की शादी को लेकर घर में तैयारियां जोरों पर हैं। छोटी नोटों से दिक्कत न हो, इसलिए मंगलवार की दोपहर ही 500-1000 के दो लाख रुपये बैंक से लेकर आया। अभी प्लानिंग कर ही रहा था कि शाम से शुरू हुई खबरों ने बेचैन कर दिया। कार्ड के लिए एडवांस देकर आया था। छप भी गया था। बुधवार को उसे लेने दुकान पहुंचा तो हाथ में पांच सौ की नोटें देख दुकानदार ने लौटा दिया। शादी में कम ही समय रह गया है। समझ नहीं पा रहा हूं कि अब कब कार्ड ला पाऊंगा, कब खाने, पीने और शामियाना वाले को बयाना दे पाऊंगा।
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- सुमेश चंद तिवारी, विकासनगर
शादी के लिए नहीं खरीद सके सामान
पांच दिन पहले एटीएम से तनख्वाह निकाली। उनमें भी ज्यादातर नोट हजार के ही निकले। घर में शादी है लिहाजा फुटकर, खुद के खर्च के लिए रख लिए और हजार की नोटों को कपड़ों की खरीदारी के लिए पत्नी को दे दिया। बुधवार को ही पत्नी के बाजार जाने की योजना थी, मगर जब सुबह अखबारों में पांच सौ, हजार की नोट पर प्रतिबंध की खबर पढ़ी तो सिर चकरा गया। शादी की तैयारियों के नाम पर जो रुपये इकट्ठे किए हैं, उनमें ज्यादातर बड़े नोट हैं। शादी की तिथि सिर पर है और अब समझ नहीं पा रहा हूं कि खरीदारी के लिए रुपयों का बंदोबस्त कहां से करूं।
-जगदीश पांडेय, मियां बाजार
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तमाम तरह के खर्चों को ध्यान में रख सहूलियत के लिए बैंकों से जो 500-1000 रुपये के बड़े नोट निकलवाए गए, वही अब मुसीबत बन गए हैं। लाखों रुपये होने के बावजूद बुधवार को जहां कई लोग कार्ड छपने के बाद भी उसे दुकानों से घर नहीं ला सके वहीं शामियाना, ढोल-ताशा, मिठाई और खानसामा, चाट आदि की दुकानों पर बयाना देने पहुंचे कई लोगों को खाली लौटना पड़ा। बिना एडवांस के बुकिंग न हो पाने से अब तमाम परिवारों की धुकधुकी बढ़ गई है। वहीं कपड़ों, जेवर आदि की खरीदारी का भी संकट खड़ा हो गया है। यही नहीं, जहां लाखों रुपयों की दरकार है वहां दो, चार या 10 हजार रुपये की ही निकासी से भविष्य में भी यह संकट सुलझता नहीं देख लोग खुद को और मुसीबतों से घिरता पा रहे हैं।
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लग्न की तिथियां-
नवंबर - 11, 16, 17, 21, 23, 24, 25, 26, 27, 30
दिसंबर- 1, 2, 3, 4, 8, 9, 12, 13, 14
खरीदारी छोड़, घर में धुन रहे सिर
बेटी की शादी को लेकर घर में तैयारियां जोरों पर हैं। छोटी नोटों से दिक्कत न हो, इसलिए मंगलवार की दोपहर ही 500-1000 के दो लाख रुपये बैंक से लेकर आया। अभी प्लानिंग कर ही रहा था कि शाम से शुरू हुई खबरों ने बेचैन कर दिया। कार्ड के लिए एडवांस देकर आया था। छप भी गया था। बुधवार को उसे लेने दुकान पहुंचा तो हाथ में पांच सौ की नोटें देख दुकानदार ने लौटा दिया। शादी में कम ही समय रह गया है। समझ नहीं पा रहा हूं कि अब कब कार्ड ला पाऊंगा, कब खाने, पीने और शामियाना वाले को बयाना दे पाऊंगा।
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- सुमेश चंद तिवारी, विकासनगर
शादी के लिए नहीं खरीद सके सामान
पांच दिन पहले एटीएम से तनख्वाह निकाली। उनमें भी ज्यादातर नोट हजार के ही निकले। घर में शादी है लिहाजा फुटकर, खुद के खर्च के लिए रख लिए और हजार की नोटों को कपड़ों की खरीदारी के लिए पत्नी को दे दिया। बुधवार को ही पत्नी के बाजार जाने की योजना थी, मगर जब सुबह अखबारों में पांच सौ, हजार की नोट पर प्रतिबंध की खबर पढ़ी तो सिर चकरा गया। शादी की तैयारियों के नाम पर जो रुपये इकट्ठे किए हैं, उनमें ज्यादातर बड़े नोट हैं। शादी की तिथि सिर पर है और अब समझ नहीं पा रहा हूं कि खरीदारी के लिए रुपयों का बंदोबस्त कहां से करूं।
-जगदीश पांडेय, मियां बाजार