{"_id":"586a9e414f1c1b0052158c6f","slug":"nhm-news-for-12-cities-including-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर समेत 12 जिले से होगी 35 करोड़ की वसूली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर समेत 12 जिले से होगी 35 करोड़ की वसूली
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 03 Jan 2017 12:08 AM IST
विज्ञापन
एनएचएम
- फोटो : Bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत तैनात संविदा कर्मचारियों का पीएफ न जमा करने पर 12 जिलों की जिला स्वास्थ्य समिति से 35.16 करोड़ रुपये की वूसली होगी। इसे लेकर पीएफ विभाग की तरफ से सोमवार को सभी जिलों की स्वास्थ्य समितियों को नोटिस जारी कर रकम जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई। तय समय के भीतर बकाया न जमा करने पर संबंधित का बैंक अकाउंट सीज कर विभाग उसमें से रुपये निक ाल लेगा। गोरखपुर पर सर्वाधिक 5.11 करोड़ रुपये का बकाया तय किया गया है। बताया जा रहा है कि करीब एक दशक के बीच गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय की तरफ से यह सबसे बड़ी कार्रवाई है जिसमें एक साथ 31 हजार कर्मचारियों का लाभ मिलेगा।
पहले एनएचएम के संविदा कर्मियों को पीएफ न देने का प्रावधान था, मगर इसे लेकर जो आदेश जारी हुए थे वे 31 मार्च 2015 तक के लिए ही थे। इसके बाद कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान न जमा करने पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी। छह अप्रैल 2016 को जोन के 12 जिले के सीएमओ, डीएम, कमिश्नर के अलावा एनएचएम के उत्तर प्रदेश के निदेशक और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिखकर संविदा कर्मचारियों का पीएफ जमा करने को कहा गया था।
दो माह में ही तय हो गई देनदारी
गोरखपुर। नोटिस और कई बार के रिमाइंडर के बाद भी स्वास्थ्य समितियों ने जब पीएफ महकमे को गंभीरता से नहीं लिया तो विभाग ने सभी सीएमओ को समन जारी कर दिया। कर्मचारी भविष्य अधिनियम की धारा सात ए के तहत बकाया निर्धारण की कार्रवाई के लिए 31 अक्टूबर को उन्हें उपस्थित होने के लिए कहा गया। महज दो महीने के भीतर ही सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गई और दो जनवरी तक सभी जिलों का बकाया निर्धारित कर दिया गया।
विज्ञापन
शासन उठाएगा कर्मचारियों के अंशदान का भी भार
गोरखपुर। पीएफ विभाग की इस कार्रवाई का फायदा 15 हजार रुपये मानदेय पाने वाले करीब 31269 संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। इन कर्मचारियों के करीब डेढ़ साल के अंशदान का भार भी शासन ही उठाएगा। विभाग के मुताबिक कर्मचारियों का एक अप्रैल 2015 से 30 सितंबर 2016 तक का बकाया निर्धारित किया गया है। चूंकि समय पर स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों का अंशदान भी नहीं जमा क राया लिहाजा अब उसे उक्त समयावधि तक का कर्मचारियों का अंशदान भी खुद ही जमा करना पड़ेगा।
कार्रवाई पर शासन भी लगा चुका है मोहर
गोरखपुर। गोरखपुर क्षेत्रीय पीएफ कार्यालय ने प्रदेश के दूसरे जिलों में भी एनएचएम के तहत तैनात संविदा कर्मचारियों के पीएफ की राह खोल दी। यहां की कार्रवाई शुरू होने पर कुछ जिलों के सीएमओ ने शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। इसपर पिछले महीने ही एनएचएम के उत्तर प्रदेश निदेशक ने पीएफ महकमे की कार्रवाई पर मुहर लगाते हुए प्रदेश के सभी सीएमओ को संबंधित कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान देने का निर्देश जारी कर दिया।
जिले कर्मचारियों की संख्या बकाया (करोड़ में)
बहराइच 3275 3.07
बलिया 2899 3.31
बलरामपुर 1930 2.49
बस्ती 2526 2.70
देवरिया 2998 3.09
गोंडा 2796 3.01
गोरखपुर 3317 5.11
कुशीनगर 3389 3.02
महराजगंज 2618 3.09
संतकबीरनगर 1722 2.08
श्रावस्ती 1205 1.87
सिद्धार्थनगर 2594 2.25
कोट :
जिला स्वास्थ्य समितियों को पत्र लिखकर एनएचएम के संविदा कर्मचारियों का पीएफ जमा करने को कहा गया था। किसी ने भी जब पत्र का संज्ञान नहीं लिया तो सभी सीएमओ को समन जारी कर बकाया निर्धारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी, जो अब पूरी हो गई है। करीब 35 करोड़ बकाये को जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है। तय समय तक बकाया न जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- वीवीबी सिंह, पीएफ कमिश्नर
विज्ञापन
पहले एनएचएम के संविदा कर्मियों को पीएफ न देने का प्रावधान था, मगर इसे लेकर जो आदेश जारी हुए थे वे 31 मार्च 2015 तक के लिए ही थे। इसके बाद कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान न जमा करने पर विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी। छह अप्रैल 2016 को जोन के 12 जिले के सीएमओ, डीएम, कमिश्नर के अलावा एनएचएम के उत्तर प्रदेश के निदेशक और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिखकर संविदा कर्मचारियों का पीएफ जमा करने को कहा गया था।
विज्ञापन
दो माह में ही तय हो गई देनदारी
गोरखपुर। नोटिस और कई बार के रिमाइंडर के बाद भी स्वास्थ्य समितियों ने जब पीएफ महकमे को गंभीरता से नहीं लिया तो विभाग ने सभी सीएमओ को समन जारी कर दिया। कर्मचारी भविष्य अधिनियम की धारा सात ए के तहत बकाया निर्धारण की कार्रवाई के लिए 31 अक्टूबर को उन्हें उपस्थित होने के लिए कहा गया। महज दो महीने के भीतर ही सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गई और दो जनवरी तक सभी जिलों का बकाया निर्धारित कर दिया गया।
विज्ञापन
शासन उठाएगा कर्मचारियों के अंशदान का भी भार
गोरखपुर। पीएफ विभाग की इस कार्रवाई का फायदा 15 हजार रुपये मानदेय पाने वाले करीब 31269 संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। इन कर्मचारियों के करीब डेढ़ साल के अंशदान का भार भी शासन ही उठाएगा। विभाग के मुताबिक कर्मचारियों का एक अप्रैल 2015 से 30 सितंबर 2016 तक का बकाया निर्धारित किया गया है। चूंकि समय पर स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों का अंशदान भी नहीं जमा क राया लिहाजा अब उसे उक्त समयावधि तक का कर्मचारियों का अंशदान भी खुद ही जमा करना पड़ेगा।
कार्रवाई पर शासन भी लगा चुका है मोहर
गोरखपुर। गोरखपुर क्षेत्रीय पीएफ कार्यालय ने प्रदेश के दूसरे जिलों में भी एनएचएम के तहत तैनात संविदा कर्मचारियों के पीएफ की राह खोल दी। यहां की कार्रवाई शुरू होने पर कुछ जिलों के सीएमओ ने शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। इसपर पिछले महीने ही एनएचएम के उत्तर प्रदेश निदेशक ने पीएफ महकमे की कार्रवाई पर मुहर लगाते हुए प्रदेश के सभी सीएमओ को संबंधित कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान देने का निर्देश जारी कर दिया।
जिले कर्मचारियों की संख्या बकाया (करोड़ में)
बहराइच 3275 3.07
बलिया 2899 3.31
बलरामपुर 1930 2.49
बस्ती 2526 2.70
देवरिया 2998 3.09
गोंडा 2796 3.01
गोरखपुर 3317 5.11
कुशीनगर 3389 3.02
महराजगंज 2618 3.09
संतकबीरनगर 1722 2.08
श्रावस्ती 1205 1.87
सिद्धार्थनगर 2594 2.25
कोट :
जिला स्वास्थ्य समितियों को पत्र लिखकर एनएचएम के संविदा कर्मचारियों का पीएफ जमा करने को कहा गया था। किसी ने भी जब पत्र का संज्ञान नहीं लिया तो सभी सीएमओ को समन जारी कर बकाया निर्धारण की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी, जो अब पूरी हो गई है। करीब 35 करोड़ बकाये को जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है। तय समय तक बकाया न जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- वीवीबी सिंह, पीएफ कमिश्नर