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खामोशी से बसा दिया नया ‘ट्रांसपोर्ट नगर’
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:51 AM IST
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तारामंडल रोड पर बालू और गिट्टी लदे ट्रक
- फोटो : shivharsh
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ट्रांसपोर्ट नगर को गीडा में शिफ्ट करने के लिए जहां कई सालों से प्रशासन, पुलिस और परिवहन महकमे को तमाम जद्दोजहद के बाद भी सफलता नहीं मिल रही वहीं शहर के तारामंडल रोड पर खामोशी से एक नया ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ बसा दिया गया। आधी रात के बाद से ही देवरिया बाईपास मोड़ से लेकर पंचमुखी हुनमान मंदिर तक रोजाना बालू-गिट्टी लदी ट्रकों का काफिला नजर आता है। पुलिस की शह पर सुबह साढ़े सात से आठ बजे तक यह मंडी चलती है और फिर ट्रक माल उतारने के लिए संबंधित ठिकानों के लिए रवाना हो जाते हैं ।
यह सिलसिला एक महीने से अधिक समय से चल रहा है। मगर अभी तक न तो प्रशासन की इसपर नजर पड़ी न ही परिवहन और ट्रैफिक महकमे के ही अफसरों की। आधी सड़क पर इन ट्रकों के खड़े होने से आवागमन प्रभावित होता है। आधी सड़क पर ही दोनों तरफ की गाड़ियों के गुजरने की वजह से एक तरफ की गाड़ियों को पटरी से नीचे उतरना पड़ता है। यही नहीं पहले अमूमन सुबह के वक्त खाली रहने वाली इस सड़क पर अब प्राय: जाम भी लग जाता है।
बता दें कि गीडा में ट्रांसपोर्टनगर बनने के बाद वर्ष 2011 से ही टीपी नगर को गीडा स्थित ट्रांसपोर्टनगर में शिफ्ट करने की कवायद चल रही है। तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति के निर्देश पर जिला प्रशासन और पुलिस ने काफी सख्ती भी की। आधे ट्रक आपरेटर्स गीडा शिफ्ट भी हुए मगर आधे अभी भी जमे हैं। इसी बीच तत्कालीन कमिश्नर के रविंद्र नायक, जेपी गुप्ता, आरके ओझा, तत्कालीन डीएम संजय, रवि कुमार एनजी के अलावा वर्तमान कमिश्नर पी गुरुप्रसाद और डीएम ओएन सिंह ने भी कई बार प्रयास किए मगर सफल नहीं हो सके।
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ईंट मंडी में तब्दील हो गया है आजाद चौक
गोरखपुर। आजाद चौक सुबह के वक्त ईंट मंडी में तब्दील हो जाता है। पिछले एक दशक से वहां ईंट लदी गाड़ियां खड़ी होती है। पहले इनकी संख्या कम थी मगर धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। आजाद चौक से लेकर रुस्तमपुर और नहर रोड पर करीब सौ की संख्या में भोर से ही ईंट लदे ट्रैक्टर-ट्राली यहां मौजूद रहते हैं। एक तरफ मजदूर मंडी और दूसरी तरफ इन गाड़ियों के काफिले की वजह से वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है। यहीं नहीं इन सड़कों पर तेजी से दौड़ते ट्रैक्टर-ट्रालियों से अब तक कई लोग घायल भी हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
देवरिया बाईपास पर इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों के खड़े होने की सूचना नहीं है। अगर ऐसा है तो एआरटीओ की मदद से ट्रक मालिकों और चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- श्रीप्रकाश द्विवेदी, एसपी ट्रैफिक
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यह सिलसिला एक महीने से अधिक समय से चल रहा है। मगर अभी तक न तो प्रशासन की इसपर नजर पड़ी न ही परिवहन और ट्रैफिक महकमे के ही अफसरों की। आधी सड़क पर इन ट्रकों के खड़े होने से आवागमन प्रभावित होता है। आधी सड़क पर ही दोनों तरफ की गाड़ियों के गुजरने की वजह से एक तरफ की गाड़ियों को पटरी से नीचे उतरना पड़ता है। यही नहीं पहले अमूमन सुबह के वक्त खाली रहने वाली इस सड़क पर अब प्राय: जाम भी लग जाता है।
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बता दें कि गीडा में ट्रांसपोर्टनगर बनने के बाद वर्ष 2011 से ही टीपी नगर को गीडा स्थित ट्रांसपोर्टनगर में शिफ्ट करने की कवायद चल रही है। तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति के निर्देश पर जिला प्रशासन और पुलिस ने काफी सख्ती भी की। आधे ट्रक आपरेटर्स गीडा शिफ्ट भी हुए मगर आधे अभी भी जमे हैं। इसी बीच तत्कालीन कमिश्नर के रविंद्र नायक, जेपी गुप्ता, आरके ओझा, तत्कालीन डीएम संजय, रवि कुमार एनजी के अलावा वर्तमान कमिश्नर पी गुरुप्रसाद और डीएम ओएन सिंह ने भी कई बार प्रयास किए मगर सफल नहीं हो सके।
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ईंट मंडी में तब्दील हो गया है आजाद चौक
गोरखपुर। आजाद चौक सुबह के वक्त ईंट मंडी में तब्दील हो जाता है। पिछले एक दशक से वहां ईंट लदी गाड़ियां खड़ी होती है। पहले इनकी संख्या कम थी मगर धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। आजाद चौक से लेकर रुस्तमपुर और नहर रोड पर करीब सौ की संख्या में भोर से ही ईंट लदे ट्रैक्टर-ट्राली यहां मौजूद रहते हैं। एक तरफ मजदूर मंडी और दूसरी तरफ इन गाड़ियों के काफिले की वजह से वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है। यहीं नहीं इन सड़कों पर तेजी से दौड़ते ट्रैक्टर-ट्रालियों से अब तक कई लोग घायल भी हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
देवरिया बाईपास पर इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों के खड़े होने की सूचना नहीं है। अगर ऐसा है तो एआरटीओ की मदद से ट्रक मालिकों और चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- श्रीप्रकाश द्विवेदी, एसपी ट्रैफिक