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भाषा विहीन हो गई है युवा पीढ़ी : प्रो सदानंद

Sun, 19 Mar 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 19 Mar 2017 01:54 AM IST
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National seminar begins in gorakhpur university
गोरखपुर यूनिवर्सिटी। - फोटो : Amar Ujala
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से गोरखपुर यूनिवर्सिटी में लोक साहित्य अवधारणा एवं स्वरूप विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा पत्रकारिता विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी के पहले दिन शनिवार को वक्ताओं ने युवा पीढ़ी को लोक साहित्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और कहा कि लोक साहित्य और लोक भाषा के महत्व को जानने की जरूरत है। संगोष्ठी का उद्घाटन साहित्य अकादमी नई दिल्ली के प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने दीप जलाकर किया।
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बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही ने खासतौर पर युवा पीढ़ी को लोक साहित्य पर गंभीर होने की नसीहत दी। कहा कि पिछले दशकों की युवा पीढ़ी भाषा विहिन हो गई है। सबसे सरल भाषा हिंदी को सीखना समझना नहीं चाहती है और अंग्रेजी आ नहीं रही है। इन सबके अभाव के चलते व्यक्ति विकास अधूरा है। आजमगढ़ के द्विजराम यादव, सिद्धार्थ शंकर, मुंबई के रतन पांडेय, देवरिया के अरुणेश नीरन, भरत सिंह, राजीव झा, दुर्गा प्रसाद और मुन्ना तिवारी ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया।
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संगोष्ठी में यूनिवर्सिटी के हिंदी, पत्रकारिता सहित अन्य कई विभागों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग, डॉ. विमलेश कुमार मिश्र, प्रो. चितरंजन मिश्र, अनिल कुमार, हरिश्चंद्र मिश्र और प्रेमव्रत तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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