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खाते को लेकर जननी ही नहीं, अफसर भी परेशान
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2016 08:07 PM IST
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जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी मदद का लाभ प्रसूताओं को नहीं मिल पा रहा है। इसमें सबसे बड़ा अवरोध बैंक खाता है। देहात इलाके में पहचान पत्र के अभाव में खाते ही नहीं खुल पा रहे हैं। यह समस्या अब सिर्फ जननी के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के लिए भी सिरदर्द बन चुकी है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूता को मदद अब सीधे उसके खाते में दी जा रही है। इसके लिए प्रसूता के नाम से ही चेक जारी किया जाता है, मगर खाता न होने से भुगतान नहीं हो पा रहा है। बीते दिनों प्रमुख सचिव के सामने भी यह मामला उठा था। तब स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व प्रधान की जिम्मेदारी तय की गई थी। साथ ही लापरवाही बरतने पर सीएमओ और एएनएम का वेतन भी रोक दिया गया था। पहचान पत्र में प्रधान की भूमिका के साथ ही स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को बैंक संबंधी समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया गया था, लेकिन इन आदेशों को दरकिनार कर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी ने सिर्फ चेक जारी करने तक ही अपने को सीमित कर लिया था।
अब शासन की सख्ती के बाद इसपर काम तेज कर दिया गया है। सीएमओ की ओर से भी पत्र जारी कर साफ कह दिया गया है कि प्रसूता को रुपये नहीं मिले तो अगले माह का वेतन नहीं दिया जाएगा।
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जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूता को मदद अब सीधे उसके खाते में दी जा रही है। इसके लिए प्रसूता के नाम से ही चेक जारी किया जाता है, मगर खाता न होने से भुगतान नहीं हो पा रहा है। बीते दिनों प्रमुख सचिव के सामने भी यह मामला उठा था। तब स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व प्रधान की जिम्मेदारी तय की गई थी। साथ ही लापरवाही बरतने पर सीएमओ और एएनएम का वेतन भी रोक दिया गया था। पहचान पत्र में प्रधान की भूमिका के साथ ही स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को बैंक संबंधी समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया गया था, लेकिन इन आदेशों को दरकिनार कर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी ने सिर्फ चेक जारी करने तक ही अपने को सीमित कर लिया था।
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अब शासन की सख्ती के बाद इसपर काम तेज कर दिया गया है। सीएमओ की ओर से भी पत्र जारी कर साफ कह दिया गया है कि प्रसूता को रुपये नहीं मिले तो अगले माह का वेतन नहीं दिया जाएगा।
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