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दीदार-ए-चांद के साथ माह-ए-रमजान का आगाज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 28 May 2017 01:32 AM IST
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शनिवार को रमजान शरीफ के चांद का दीदार होते ही मुस्लिम समाज में चारों तरफ खुशियां छा गईं। लोगों ने एक दूसरे को रमजान शरीफ की मुबारकबाद दी और खुदा की इबादत में जुट गए। अपने गुनाहों की माफ ी मांगी और खुदा की रहमत महसूस की। खुदा की इबादत का माह रमजान शरीफ की शुरुआत के बाद अब पूरा माह खुदा की बंदगी में बीतेगा। रविवार से रोजा शुरू होगा। एक माह बाद खुशियों का त्योहार ईद धूमधाम से मनाई जाएगी।
शनिवार रात नौ बजे से तरावीह की नमाज की शुरू हो गई। चांद देखने के बाद अकीदतमंदों ने मगरिब की नमाज के बाद सलातुल अव्वाबीन की नफ ील नमाज अदा की। इसके कुछ देर बाद अकीदतमंद मस्जिदों में पहुंचे और एशा की नमाज के बाद तरावीह की 20 रकात नमाज अदा की। नमाज में बड़ों से लेकर बच्चे भी शामिल रहे। सबके चेहरों पर रमजान के आमद की खुशी साफ देखी जा सकती थी। मस्जिदों में अकीदतमंदों की लंबी कतारें दिखीं। तरावीह के लिए सबसे ज्यादा भीड़ उन स्थानों पर देखी गई, जहां कुरआन शरीफ को सात और दस दिनों में मुकम्मल करने का सिलसिला है। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार, गाजी मकतब गाजी रौजा, दरगाह मुबारक खां शहीद नार्मल, मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर, रसूलपुर जामा मस्जिद, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, रहमत नगर जामा मस्जिद आदि में भीड़ देखी गई। महिलाओं ने घरों में इबादत शुरू की। घरों और इबादगाहों में कुरआन शरीफ की तिलावत शुरू हो गई। यह सिलसिला तीस दिनों तक जारी रहेगा।
स्वस्थ व्यक्ति का रोजा रखना फर्ज है : अफजल बरकाती
खादिम हुसैन मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अफजल बरकाती ने बताया कि इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र महीने रमजान की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमजान शरीफ का महीना मुस्लिम धर्म में खास अहमियत रखता है। हर बालिग मुसलमान मर्द व औरत जो अक्ल वाला व स्वस्थ हो, उसका रमजान शरीफ का रोजा रखना फ र्ज है। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है, वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। रोजा न रखने पर वह शख्स अल्लाह की नाफरमानी करता है।
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नेक काम करने वाले का अल्लाह गुनाह माफ कर देता है : अजहर शम्सी
तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि यह पवित्र महीना रहमतों व बरकतों से भरा हुआ है। अल्लाह इस महीने में नेक काम करने वाले मुसलमानों के सारे गुनाह माफ कर देता हैं। माह रमज़ान शरीफ को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफि रत और आखिरी हिस्सा जहन्नुम से आजादी का है। इसके आखिरी हिस्से में शब-ए-कद्र जैसी अजीम नेमत है।
बाजारों में बढ़ गई रौनक
रमजान के चांद के दीदार के साथ ही बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई। लोगों ने सहरी के लिए सामानों की खरीदारी की। बाजार में रोजा इफ्तार और सहरी के सामानों की बड़ी संख्या में दुकानें सज गई हैं। इरानी खजूर के साथ ही मुनक्का खजूर भी लोगों को खूब भा रहा है। महिलाएं भी बाजार में कपड़ों की खरीदारी में जुट गई हैं। सेवइयों से लेकर अन्य पकवानों के लिए शनिवार को सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी होती रही।
रमजान में चलेगी कुरआन व अहकामे शरीयत की पाठशाला
तंजीम करवाने अहले सुन्नत नौजवानों व बुजुर्गों के लिए रमजान का खास तोहफ ा लेकर आई हैं। तंजीम मात्र 10 दिनों में कुरआन शरीफ पढ़ना सिखाएगी, वह भी नि:शुल्क। यहीं नहीं शरई मसायल नमाज, रोजा, हज, जकात आदि के बारे में तफ सील से बताया जाएगा। तंजीम की यह तालीम मदरसा रजा-ए-मुस्तफ ा चिंगी शहीद तुर्कमानपुर में 28 मई से अपराह्न दो से तीन बजे तक रमजान तक चलेगा।
तंजीम के सदर मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि इस्लाम में दीन सीखना बेहद जरूरी है। जब हम दीन की बुनियादी बातें जानेंगे, कुरआन सही ढंग से पढ़ना व समझना जानेंगे तब ही हमारी इबादत में रुहानियत व नूरानियत पैदा होगी। समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो किसी वजह से कुरआन पढ़ना व दीन की बातें नहीं सीख पाए हैं, उनके लिए यह सुनहरा मौका है। यह सभी के लिए आम है, नौजवान और बुजुर्ग दोनों इससे फ ायदा उठा सकते हैं। मात्र दस दिनों के अंदर कुरआन शरीफ पढ़ना सिखा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस दौरान अरबी के अक्षरों की पहचान, मात्राएं, शब्द जोड़ना, वाक्य बनाना आदि सिखाया जाएगा। फि र कुरआन की छोटी आयतें, उसके बाद बड़ी आयतें उच्चारण के साथ पढ़ने का तरीका बताया जाएगा। कुरआन सिखाने के बाद हर दिन 20 मिनट अहकामे शरीयत, नमाज, रोजा, हज, जकात आदि के बारे में बताया जाएगा। जो भी इच्छुक लोग हों वे मोबाइल नम्बर 8604887862 पर, मदरसा में या तुर्कमानपुर स्थित शम्सी लाइब्रेरी में संपर्क कर सकते हैं।
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शनिवार रात नौ बजे से तरावीह की नमाज की शुरू हो गई। चांद देखने के बाद अकीदतमंदों ने मगरिब की नमाज के बाद सलातुल अव्वाबीन की नफ ील नमाज अदा की। इसके कुछ देर बाद अकीदतमंद मस्जिदों में पहुंचे और एशा की नमाज के बाद तरावीह की 20 रकात नमाज अदा की। नमाज में बड़ों से लेकर बच्चे भी शामिल रहे। सबके चेहरों पर रमजान के आमद की खुशी साफ देखी जा सकती थी। मस्जिदों में अकीदतमंदों की लंबी कतारें दिखीं। तरावीह के लिए सबसे ज्यादा भीड़ उन स्थानों पर देखी गई, जहां कुरआन शरीफ को सात और दस दिनों में मुकम्मल करने का सिलसिला है। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार, गाजी मकतब गाजी रौजा, दरगाह मुबारक खां शहीद नार्मल, मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर, रसूलपुर जामा मस्जिद, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, रहमत नगर जामा मस्जिद आदि में भीड़ देखी गई। महिलाओं ने घरों में इबादत शुरू की। घरों और इबादगाहों में कुरआन शरीफ की तिलावत शुरू हो गई। यह सिलसिला तीस दिनों तक जारी रहेगा।
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स्वस्थ व्यक्ति का रोजा रखना फर्ज है : अफजल बरकाती
खादिम हुसैन मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अफजल बरकाती ने बताया कि इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र महीने रमजान की शुरुआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमजान शरीफ का महीना मुस्लिम धर्म में खास अहमियत रखता है। हर बालिग मुसलमान मर्द व औरत जो अक्ल वाला व स्वस्थ हो, उसका रमजान शरीफ का रोजा रखना फ र्ज है। जो मुसलमान रोजा नहीं रखता है, वह अल्लाह की रहमत से महरूम रहता है। रोजा न रखने पर वह शख्स अल्लाह की नाफरमानी करता है।
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नेक काम करने वाले का अल्लाह गुनाह माफ कर देता है : अजहर शम्सी
तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि यह पवित्र महीना रहमतों व बरकतों से भरा हुआ है। अल्लाह इस महीने में नेक काम करने वाले मुसलमानों के सारे गुनाह माफ कर देता हैं। माह रमज़ान शरीफ को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफि रत और आखिरी हिस्सा जहन्नुम से आजादी का है। इसके आखिरी हिस्से में शब-ए-कद्र जैसी अजीम नेमत है।
बाजारों में बढ़ गई रौनक
रमजान के चांद के दीदार के साथ ही बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई। लोगों ने सहरी के लिए सामानों की खरीदारी की। बाजार में रोजा इफ्तार और सहरी के सामानों की बड़ी संख्या में दुकानें सज गई हैं। इरानी खजूर के साथ ही मुनक्का खजूर भी लोगों को खूब भा रहा है। महिलाएं भी बाजार में कपड़ों की खरीदारी में जुट गई हैं। सेवइयों से लेकर अन्य पकवानों के लिए शनिवार को सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी होती रही।
रमजान में चलेगी कुरआन व अहकामे शरीयत की पाठशाला
तंजीम करवाने अहले सुन्नत नौजवानों व बुजुर्गों के लिए रमजान का खास तोहफ ा लेकर आई हैं। तंजीम मात्र 10 दिनों में कुरआन शरीफ पढ़ना सिखाएगी, वह भी नि:शुल्क। यहीं नहीं शरई मसायल नमाज, रोजा, हज, जकात आदि के बारे में तफ सील से बताया जाएगा। तंजीम की यह तालीम मदरसा रजा-ए-मुस्तफ ा चिंगी शहीद तुर्कमानपुर में 28 मई से अपराह्न दो से तीन बजे तक रमजान तक चलेगा।
तंजीम के सदर मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि इस्लाम में दीन सीखना बेहद जरूरी है। जब हम दीन की बुनियादी बातें जानेंगे, कुरआन सही ढंग से पढ़ना व समझना जानेंगे तब ही हमारी इबादत में रुहानियत व नूरानियत पैदा होगी। समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो किसी वजह से कुरआन पढ़ना व दीन की बातें नहीं सीख पाए हैं, उनके लिए यह सुनहरा मौका है। यह सभी के लिए आम है, नौजवान और बुजुर्ग दोनों इससे फ ायदा उठा सकते हैं। मात्र दस दिनों के अंदर कुरआन शरीफ पढ़ना सिखा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस दौरान अरबी के अक्षरों की पहचान, मात्राएं, शब्द जोड़ना, वाक्य बनाना आदि सिखाया जाएगा। फि र कुरआन की छोटी आयतें, उसके बाद बड़ी आयतें उच्चारण के साथ पढ़ने का तरीका बताया जाएगा। कुरआन सिखाने के बाद हर दिन 20 मिनट अहकामे शरीयत, नमाज, रोजा, हज, जकात आदि के बारे में बताया जाएगा। जो भी इच्छुक लोग हों वे मोबाइल नम्बर 8604887862 पर, मदरसा में या तुर्कमानपुर स्थित शम्सी लाइब्रेरी में संपर्क कर सकते हैं।