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पुस्तक मेले में हर स्टॉल पर दिखी भीड़

Sun, 28 Feb 2016 01:23 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 28 Feb 2016 01:23 AM IST
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mob in every staal in book fair
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में शनिवार से तीन दिवसीय पुस्तक मेले का आगाज हुआ। देश भर के प्रकाशकों के स्टॉल में मौजूद किताबों को शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सराहा।
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क्रीड़ा संकुल में सजे इस मेले का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. कुमार ने कहा कि इसके आयोजन का विचार काफी समय से चल रहा था। इससे पहले यूनिवर्सिटी में जो भी मेले आयोजित हुए, वह लाइब्रेरी में आयोजित हुए। लेकिन इस बार इसे खेल मैदान में लगाया गया है ताकि ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच हो सके। मेले में 30 प्रकाशकों और वितरकों ने अपनी कृतियों के साथ हिस्सा लिया है। लाइब्रेरी के प्रभारी प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस मेले से विद्यार्थी और शिक्षक अपनी पसंदीदा किताबों की मांग कर सकते हैं। उन किताबों को लाइब्रेरी में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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दीनदयाल साहित्य स्टॉल पर रही भीड़
मेले का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती शृंखला के तहत किया गया है। इसलिए एक स्टॉल पंडित जी से जुड़े साहित्य का भी लगाया गया है। अखिल भारतीय इतिहास संकलन सोसायटी के इस स्टॉल पर पंडित जी के साहित्य के अलावा कई और देशी-विदेशी महापुरुषों की किताबें और जीवनी भी उपलब्ध है।
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इन किताबों का विमोचन आज
रविवार को दो किताबों का विमोचन भी होगा। इनमें अग्रेंजी विभाग की डॉ. हुमा जावेद सब्जपोश, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. गौर हरि बेहरा और सुनीता मुर्मू की संपादित पुस्तक ‘लिटरेचर ऑफ साउथ एशिया’ और मनोविज्ञान विभाग की डॉ. अनुभूति दुबे की पुस्तक ‘मेंटल हेल्थ : साइको सोशल प्रॉस्पेक्टिव’ (वॉल्यूम दो) शामिल हैं।

इंटरनेट की किताबें स्टाल पर दिखीं
हालांकि अब तो इंटरनेट का दौर है, सभी किताबें किसी ने किसी रूप से नेट पर मिल जाती हैं लेकिन उनको किताब के रूप में देखने व पढ़ने का आकर्षण तो होता ही है। मेला इस दृष्टि से उपयोगी है।

- डॉ. चिन्मय पांडेय, शोधार्थी

विषय की दुर्लभ किताबें दिखीं
कक्षा में शिक्षकों के मुंह से बहुत सी ऐसी किताबों के नाम सुनने को मिलते हैं, जो बाजार में खोजने पर भी नहीं मिलतीं। ऐसी किताबों की मौजूदगी ने मेरा उत्साह बढ़ाया है। कुछ को खरीद भी लिया है।
- पूजा मिश्रा, छात्रा, एमए (समाजशास्त्र)
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