{"_id":"5c777436bdec224e1b7f78de","slug":"milk-purity-can-be-tested-by-mobile-app-in-gorakhpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब मोबाइल एप बताएगा दूध की शुद्धता, 50 से 125 रुपये आएगा खर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब मोबाइल एप बताएगा दूध की शुद्धता, 50 से 125 रुपये आएगा खर्च
Thu, 28 Feb 2019 12:56 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 28 Feb 2019 12:56 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जल्द ही दूध की शुद्धता एक मोबाइल एप के जरिए घर पर ही परखी जा सकेगी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गुवाहाटी के वैज्ञानिक डॉ. प्रांजल चंद्रा ने यह एप तैयार किया है।
गोरखपुर के विष्णुपुरम कालोनी निवासी डॉ. चंद्रा के एप को वैज्ञानिकों की टीम ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अब उन्होंने एप के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरसी श्रीवास्तव के बेटे डॉ. प्रांजल का दावा है कि दूध में मिलने वाला एंजाइम अलकालाइन फास्फेट (एएलपी) दूध की शुद्धता का कारक होता है।
विज्ञापन
उनके अनुसार पेपर किट और एप की मदद से 15 मिनट में दूध की गुणवत्ता आसानी से जांची जा सकेगी। इस विशेष पेपर किट की कीमत करीब 80 से 125 रुपये के बीच होगी।
विज्ञापन
गोरखपुर के विष्णुपुरम कालोनी निवासी डॉ. चंद्रा के एप को वैज्ञानिकों की टीम ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अब उन्होंने एप के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
विज्ञापन
गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरसी श्रीवास्तव के बेटे डॉ. प्रांजल का दावा है कि दूध में मिलने वाला एंजाइम अलकालाइन फास्फेट (एएलपी) दूध की शुद्धता का कारक होता है।
विज्ञापन
उनके अनुसार पेपर किट और एप की मदद से 15 मिनट में दूध की गुणवत्ता आसानी से जांची जा सकेगी। इस विशेष पेपर किट की कीमत करीब 80 से 125 रुपये के बीच होगी।
यह रिसर्च जल्दी ही बायो सेंसर और बायो इलेक्ट्रानिक्स जर्नल में प्रकाशित होगा। राज्य सभा टीवी ने लैब और इस पूरे प्रयोग का वीडियो भी बनाया है।
ऐसे होगी जांच
एक खास तरह के फिल्टर पेपर को विशेष केमिकल प्रोब में एएलपी से रिएक्ट कराने के बाद इस दूध की एक बूंद डालनी होगी। इस पेपर की फोटो स्मार्ट फोन से खींच कर एप से स्कैन करानी होगी। इसके बाद एप में पहले से स्टोर वैल्यू अपने न्यूनतम स्तर पर आती है तो दूध की गुणवत्ता खराब मानी जाती है।
ऐसे होगी जांच
एक खास तरह के फिल्टर पेपर को विशेष केमिकल प्रोब में एएलपी से रिएक्ट कराने के बाद इस दूध की एक बूंद डालनी होगी। इस पेपर की फोटो स्मार्ट फोन से खींच कर एप से स्कैन करानी होगी। इसके बाद एप में पहले से स्टोर वैल्यू अपने न्यूनतम स्तर पर आती है तो दूध की गुणवत्ता खराब मानी जाती है।