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आग का कहर, सैकड़ों लोगों के घर जले
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 25 Apr 2016 01:50 AM IST
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जिले के कई हिस्सों में रविवार को आग की घटनाओं ने खूब तबाही मचाई। पीपीगंज, कैंपियरगंज, गोला, बड़हलगंज क्षेत्रों में अगलगी की घटनाओं में 260 से अधिक झोपड़ियां और पक्के मकान जल गए। पीपीगंज की घटना में तीन लोग झुलस गए। इनमें से एक को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
पीपीगंज प्रतिनिधि के अनुसार जंगल कौड़िया ब्लॉक के बाने गांव गांव में रविवार को आग लगने से करीब दो सौ झोपड़ी और खपरैल तथा पक्के मकान जल गए। बताया गया कि गांव के बगल में बांध के उस पार दियारा क्षेत्र में कच्ची शराब की कई भट्ठियां हैं। दिन में शराब बनाते समय चिंगारी से गेहूं के डंठलों में आग पकड़ ली। तेज पछुआ हवा के कारण आग गांव में पहुंच गई और सबसे पहले बलिराम साहनी की झोपड़ी के अपनी चपेट में ले लिया।
गांव वाले अभी कुछ समझ पाते कि हवा के कारण आग की चपेट में एक एक कर करीब दो सौ घर आ गए। पूरे गांव में कोहराम मच गया। लोगों ने 100 नंबर पर सूचना देकर फायर ब्रिगेड की भेजने को कहा और स्वयं आग बुझाने में लग गए। आग की चपेट में आने से संदीप, कैलासी, रामदास और दमकल कर्मी प्रवींद्र पांडेय झुलस गए। रामदास को हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
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कैंम्पियरगंज प्रतिनिधि के अनुसार मूसाबार गांव के बडुलिया टोला एवं बरईपार, गोपलापुर गांव सहित सरहरी में आग से करीब 40 झोपड़ियां जल गईं। इसमें अनाज, कपड़ा बाइक सहित अन्य सामान राख हो गया। सरहरी गांव में छोटेलाल के वहां लड़की की शादी 25 अप्रैल को होनी है जिसकी तैयारी में रखा सामान भी जल गया।
मूसाबार के बडुलिया टोले पर त्रिलोकी यादव, शिवशंकर, उमाशंकर, त्रिभुवन संतराज यादव, राधे, वंशीधर, विश्वनाथ, सुग्रीव, सुदामा, विनोद, सैलानी, कन्हैया, अनजाने, रामू श्रीराम, राजू प्रसाद, साहब, सरोज, सोमई आदि की झोपड़ी एवं पशुबाड़ा जल गया। बरईपार मेें महेश गुप्ता की झोपड़ी और गोपलापुर में लाल जी, कम्मन, लौटू, जगदीश, परशुराम की झोपड़ी जलकर राख हो गई। अगलगी से अफरा तफरी का माहौल बना रहा।
बताया जाता है कि मूसाबार गांव के पश्चिम गेहूं के खेत के किनारे नाले के पास रात में कच्ची शराब बनाते समय चिंगारी से डंठल में आग। पछुआ हवा के कारण आग बरईपार, पचमा, गोपलापुर के सिवान में फैल गयी।
गोला बाजार प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के चिट्ठेपार गांव में पोखरे की खुदाई कर रहे मनरेगा मजदूरों द्वारा मछली भूनते समय लगी आग से दर्जन भर झोपड़ी व पक्के मकान जल गए। घरों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने और दाने-दाने के मोहताज हो गए। आग से चार गाय भी झुलस गईं।
यह आग दूसरे गांव पड़री के हरिजन बस्ती में पहुंच गई। दिन में करीब 11 बजे आग पहले झब्बू की झोपड़ी में लगी और देखते देखते आग ने कलिन्दर, रामस्वरूप, रामदयाल, रामरेखा, सर्वेश की रिहायशी झोपड़ी तथा मकान को चपेट में ले लिया। इसी बीच रेखा के घर में भी आग पहुंच गई तो घर वालों में भगदड़ मच गई।
थोड़ी देर बाद रसोई गैस सिलिंडर फटा तो आग ने और विकराल रूप ले लिया। तेजी से फैली आग से इस परिवार के लोग अपना जरूरी सामान भी नहीं बचा सके। कई अन्य की भी झोपड़ी जल गई। पछुआ हवा के चलते आग पड़री गांव के हरिजन बस्ती तक पहुंच गई।
बड़हलगंज प्रतिनिधि के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के सीधेगौर व कोटिया निरंजन गांव में रविवार को आग से डेढ़ दर्जन झोपड़ी तथा उसमें रखा सारा सामान जल कर राख हो गया। भटहट प्रतिनिधि के अनुसार भलुही गांव के बगीचे में आग लग गई। हवा के कारण आग छोटे टोले तक पहुंच गई थी।
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पीपीगंज प्रतिनिधि के अनुसार जंगल कौड़िया ब्लॉक के बाने गांव गांव में रविवार को आग लगने से करीब दो सौ झोपड़ी और खपरैल तथा पक्के मकान जल गए। बताया गया कि गांव के बगल में बांध के उस पार दियारा क्षेत्र में कच्ची शराब की कई भट्ठियां हैं। दिन में शराब बनाते समय चिंगारी से गेहूं के डंठलों में आग पकड़ ली। तेज पछुआ हवा के कारण आग गांव में पहुंच गई और सबसे पहले बलिराम साहनी की झोपड़ी के अपनी चपेट में ले लिया।
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गांव वाले अभी कुछ समझ पाते कि हवा के कारण आग की चपेट में एक एक कर करीब दो सौ घर आ गए। पूरे गांव में कोहराम मच गया। लोगों ने 100 नंबर पर सूचना देकर फायर ब्रिगेड की भेजने को कहा और स्वयं आग बुझाने में लग गए। आग की चपेट में आने से संदीप, कैलासी, रामदास और दमकल कर्मी प्रवींद्र पांडेय झुलस गए। रामदास को हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
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कैंम्पियरगंज प्रतिनिधि के अनुसार मूसाबार गांव के बडुलिया टोला एवं बरईपार, गोपलापुर गांव सहित सरहरी में आग से करीब 40 झोपड़ियां जल गईं। इसमें अनाज, कपड़ा बाइक सहित अन्य सामान राख हो गया। सरहरी गांव में छोटेलाल के वहां लड़की की शादी 25 अप्रैल को होनी है जिसकी तैयारी में रखा सामान भी जल गया।
मूसाबार के बडुलिया टोले पर त्रिलोकी यादव, शिवशंकर, उमाशंकर, त्रिभुवन संतराज यादव, राधे, वंशीधर, विश्वनाथ, सुग्रीव, सुदामा, विनोद, सैलानी, कन्हैया, अनजाने, रामू श्रीराम, राजू प्रसाद, साहब, सरोज, सोमई आदि की झोपड़ी एवं पशुबाड़ा जल गया। बरईपार मेें महेश गुप्ता की झोपड़ी और गोपलापुर में लाल जी, कम्मन, लौटू, जगदीश, परशुराम की झोपड़ी जलकर राख हो गई। अगलगी से अफरा तफरी का माहौल बना रहा।
बताया जाता है कि मूसाबार गांव के पश्चिम गेहूं के खेत के किनारे नाले के पास रात में कच्ची शराब बनाते समय चिंगारी से डंठल में आग। पछुआ हवा के कारण आग बरईपार, पचमा, गोपलापुर के सिवान में फैल गयी।
गोला बाजार प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के चिट्ठेपार गांव में पोखरे की खुदाई कर रहे मनरेगा मजदूरों द्वारा मछली भूनते समय लगी आग से दर्जन भर झोपड़ी व पक्के मकान जल गए। घरों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने और दाने-दाने के मोहताज हो गए। आग से चार गाय भी झुलस गईं।
यह आग दूसरे गांव पड़री के हरिजन बस्ती में पहुंच गई। दिन में करीब 11 बजे आग पहले झब्बू की झोपड़ी में लगी और देखते देखते आग ने कलिन्दर, रामस्वरूप, रामदयाल, रामरेखा, सर्वेश की रिहायशी झोपड़ी तथा मकान को चपेट में ले लिया। इसी बीच रेखा के घर में भी आग पहुंच गई तो घर वालों में भगदड़ मच गई।
थोड़ी देर बाद रसोई गैस सिलिंडर फटा तो आग ने और विकराल रूप ले लिया। तेजी से फैली आग से इस परिवार के लोग अपना जरूरी सामान भी नहीं बचा सके। कई अन्य की भी झोपड़ी जल गई। पछुआ हवा के चलते आग पड़री गांव के हरिजन बस्ती तक पहुंच गई।
बड़हलगंज प्रतिनिधि के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के सीधेगौर व कोटिया निरंजन गांव में रविवार को आग से डेढ़ दर्जन झोपड़ी तथा उसमें रखा सारा सामान जल कर राख हो गया। भटहट प्रतिनिधि के अनुसार भलुही गांव के बगीचे में आग लग गई। हवा के कारण आग छोटे टोले तक पहुंच गई थी।