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मोहब्बत के तरानों ने लूट ली महफिल
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Thu, 04 Aug 2016 12:55 AM IST
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कव्वाली सुनाते कव्वाल
- फोटो : amar ujala
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हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां के उर्स-ए-पाक का समापन बुधवार को जोरदार रहा। इसे जोरदार बनाने का पूरा श्रेय जवाबी कव्वाली को रहा। दिल्ली और बदायूं की टीम के बीच हुए जवाबी मुकाबले को लोगों ने दिल थाम कर देखा। कव्वाली के प्रति लोगों की चाहत देख कव्वाल भी पूरे शबाब पर नजर आए। दोनों ओर से आए मोहब्बत भरे तरानों ने महफिल लूट ली।
दिल्ली से आए कव्वाल आमिल आरिफ साबरी, आरिफ आमिल, दिलशाद खां, शकील अहमद व उनके साथियों ने ‘प्यार किए जा, प्यार इबादत है...’ सुनाया तो लोग तालियों के साथ उनके संग हो लिए। मैं मोहब्बत में सर को झुकाता रहूं... सुनाकर तो साबरी और उनके साथियों ने समां बांध दिया। जिंदगी यूं ही इश्क में चलती रही...., रब की कसम कुर्बान है चेहरा सरकार का... कव्वाली ने तो श्रोताओं को झुमाकर रख दिया।
अब बारी थी हरदिल अजीज जुनेद सुल्तानी बदायूंनी, शहबाज, जावेद सुल्तानी, महेश कुमार राव और उनके साथियों की। उन्होंने हम हिंद के नारे से धरती को हिला देंगे.... सुनाया तो लोग ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगे। उन्हें नबी की मोहब्बत तलाशती है..., बस एक शहर मदीना है सारी दुनिया में..., यहां नबी की रहमत बरसती है... सुनाकर दिल्ली की टीम को जोरदार जवाब दिया। रात्रि नमाज के बाद कव्वाली का जो दौर शुरू हुआ, वह फज्र की अजान तक चलता रहा।
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इस दौरान दरगाह के अध्यक्ष इकरार अहमद, सैयद मोहतसिम कबीर, मौलाना मकसूद आलम, सैयद शहाब, मोहम्मद अली, शमसीर अहमद शेरू, तौकीर किक्कू, वहाज, अहमद हसन, सैयद सदफ, रमजान, बॉबी, एजाज अहमद आदि की मौजूदगी खास रही।
अस्ताने पर गंगा-जमुनी संस्कृति की झलक देखने को मिली। मुस्लिम ही नहीं सभी धर्मों के लोगों ने बाबा के प्रति अपनी आस्था निवेदित की। आयोजकों के मुताबिक बुधवार को करीब 15 कुंतल प्रसाद वितरित किया गया। उर्स में वाराणसी, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, पड़रौना, महराजगंज, बस्ती, संतकबीर नगर के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और झारखंड के अकीदतमंद भी शामिल हुए।
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दिल्ली से आए कव्वाल आमिल आरिफ साबरी, आरिफ आमिल, दिलशाद खां, शकील अहमद व उनके साथियों ने ‘प्यार किए जा, प्यार इबादत है...’ सुनाया तो लोग तालियों के साथ उनके संग हो लिए। मैं मोहब्बत में सर को झुकाता रहूं... सुनाकर तो साबरी और उनके साथियों ने समां बांध दिया। जिंदगी यूं ही इश्क में चलती रही...., रब की कसम कुर्बान है चेहरा सरकार का... कव्वाली ने तो श्रोताओं को झुमाकर रख दिया।
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अब बारी थी हरदिल अजीज जुनेद सुल्तानी बदायूंनी, शहबाज, जावेद सुल्तानी, महेश कुमार राव और उनके साथियों की। उन्होंने हम हिंद के नारे से धरती को हिला देंगे.... सुनाया तो लोग ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगे। उन्हें नबी की मोहब्बत तलाशती है..., बस एक शहर मदीना है सारी दुनिया में..., यहां नबी की रहमत बरसती है... सुनाकर दिल्ली की टीम को जोरदार जवाब दिया। रात्रि नमाज के बाद कव्वाली का जो दौर शुरू हुआ, वह फज्र की अजान तक चलता रहा।
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इस दौरान दरगाह के अध्यक्ष इकरार अहमद, सैयद मोहतसिम कबीर, मौलाना मकसूद आलम, सैयद शहाब, मोहम्मद अली, शमसीर अहमद शेरू, तौकीर किक्कू, वहाज, अहमद हसन, सैयद सदफ, रमजान, बॉबी, एजाज अहमद आदि की मौजूदगी खास रही।
पूरे दिन चला चादरपोशी और लंगर का सिलसिला
हजरत मुबारक खां शहीद के उर्स-ए-पाक के अंतिम दिन बाबा के अस्ताने पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने दरगाह पर चादर चढ़ाई और अमन-चैन की मन्नतें मांगी। अस्ताने पर आए सभी को लंगर का प्रसाद वितरित किया गया। दरगाह सदर इकरार अहमद की देखरेख में कुल शरीफ हुआ। सुबह से ही शुरू हुआ चादरपोशी का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।अस्ताने पर गंगा-जमुनी संस्कृति की झलक देखने को मिली। मुस्लिम ही नहीं सभी धर्मों के लोगों ने बाबा के प्रति अपनी आस्था निवेदित की। आयोजकों के मुताबिक बुधवार को करीब 15 कुंतल प्रसाद वितरित किया गया। उर्स में वाराणसी, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, पड़रौना, महराजगंज, बस्ती, संतकबीर नगर के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और झारखंड के अकीदतमंद भी शामिल हुए।