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सुबह से शाम तक निकलते रहे सातवीं मोहर्रम पर जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 09 Oct 2016 08:52 PM IST
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मोहर्रम के मद्देनजर चक्सा हुसैन में ताजिया बनाते बाबू हनीफ।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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मोहर्रम की सात तारीख यानी रविवार को शहर में पूरे दिन जुलूस निकलते रहे। दर्जनों मोहल्लों के इमाम चौकों से सुबह से जुलूस निकलने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह शाम तक चला। जुलूस का कई स्थानों पर पूरी शिद्दत के साथ स्वागत किया गया। राशन चौकी, घोड़े, बैंड और अलम जुलूस की शोभा बढ़ा रहे थे। करतब दिखाते युवाओं के प्रदर्शन को देखने के लिए रास्तों में खासी भीड़ रही।
सातवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में यजीद की फौज ने हुसैन और उनके साथियों को पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी ताकि वो शासक यजीद की मातहती स्वीकार कर लें मगर हुसैन और उनके साथियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। सात मोहर्रम के साथ हर पल कर्बला में शहादत का वक्त करीब आ रहा था। यही कारण रहा कि रविवार को सातवीं मोहर्रम के दिन से शहर में मोहर्रम के जुलूसों का सिलसिला भी तेज हो गया।
अलग-अलग मोहल्लों के इमाम चौकों से निकलने वाले जुलूस का नेतृत्व अलग-अलग लोगों ने किया। अलीनगर से निकल वाले जुलूस के अगुआ आफताब अहमद, बड़े काजीपुर से जमील अहमद, हजारीपुर से वकील अहमद, रुद्रपुर से उजैर अहमद, हुमायूंपुर से अब्दुर्रहमान, अजयनगर से शमीम अहमद, गोरखनाथ से मेराज अहमद, रसूलपुर से शमशाद अहमद, दशहरीबाद से जलालुद्दीन, नथमलपुर से इमामुद्दीन, जमुनहिया बाग से इरशाद अहमद, शाहमारूफ से इरफान हमीर, जाफराबाजार से नुरुल हसन, बहरामपुर से अब्दुल्लाह ने जुलूस की अगुवाई की।
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इसके अलावा घोषीपुरवा, बख्तियारपुर, मोहल्ला धम्माल, छोटे काजीपुर के इमामचौकों से भी जुलूस निकाले गए। ये सभी जुलूस अपने परंपरागत रास्तों से गुजरकर फिर इमाम चौक पर आकर समाप्त हुए। अलीनगर में जुलूस का इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी की ओर से इस्तकबाल किया गया। इस्तकबाल करने वालों में कमेटी के अध्यक्ष सैयद इरशाद हुसैन, आफताब अहमद, मो. अकील अहमद, मुमताज अंसारी, मो. नासिर अली, शकील शाही, अदील अख्तर खां, अनीश आदि शामिल रहे।
आठवीं मोहर्रम पर कल 10 अक्टूबर को रात 10.30 बजे बसंतपुर स्थित आगा मुख्तार हुसैन के जानिब से दुलदुल का कदीमी मातमी जुलूस निकाला जाएगा। यह जानकारी आगा शानदार हुसैन उर्फ पैगाम ने दी।
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सातवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में यजीद की फौज ने हुसैन और उनके साथियों को पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी ताकि वो शासक यजीद की मातहती स्वीकार कर लें मगर हुसैन और उनके साथियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। सात मोहर्रम के साथ हर पल कर्बला में शहादत का वक्त करीब आ रहा था। यही कारण रहा कि रविवार को सातवीं मोहर्रम के दिन से शहर में मोहर्रम के जुलूसों का सिलसिला भी तेज हो गया।
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अलग-अलग मोहल्लों के इमाम चौकों से निकलने वाले जुलूस का नेतृत्व अलग-अलग लोगों ने किया। अलीनगर से निकल वाले जुलूस के अगुआ आफताब अहमद, बड़े काजीपुर से जमील अहमद, हजारीपुर से वकील अहमद, रुद्रपुर से उजैर अहमद, हुमायूंपुर से अब्दुर्रहमान, अजयनगर से शमीम अहमद, गोरखनाथ से मेराज अहमद, रसूलपुर से शमशाद अहमद, दशहरीबाद से जलालुद्दीन, नथमलपुर से इमामुद्दीन, जमुनहिया बाग से इरशाद अहमद, शाहमारूफ से इरफान हमीर, जाफराबाजार से नुरुल हसन, बहरामपुर से अब्दुल्लाह ने जुलूस की अगुवाई की।
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इसके अलावा घोषीपुरवा, बख्तियारपुर, मोहल्ला धम्माल, छोटे काजीपुर के इमामचौकों से भी जुलूस निकाले गए। ये सभी जुलूस अपने परंपरागत रास्तों से गुजरकर फिर इमाम चौक पर आकर समाप्त हुए। अलीनगर में जुलूस का इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी की ओर से इस्तकबाल किया गया। इस्तकबाल करने वालों में कमेटी के अध्यक्ष सैयद इरशाद हुसैन, आफताब अहमद, मो. अकील अहमद, मुमताज अंसारी, मो. नासिर अली, शकील शाही, अदील अख्तर खां, अनीश आदि शामिल रहे।