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शाही अंदाज में निकला मियां साहब का जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 12 Oct 2016 08:52 PM IST
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मोहर्रम पर इमामबाड़े से निकाले गए जुलूस में मियां साहब व अन्य।
- फोटो : Rajesh Kumar
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मोहर्रम की नवीं व दसवीं पर इमामबाड़ा इस्टेट का जुलूस शाही अंदाज में निकला। निजी अंगरक्षकों और सहयोगियाें के साथ निकले सज्जादानशीन फर्रुख अदनान मियां साहब जुलूस की शोभा बढ़ा रहे थे। सभी उनकी एक झलक पाने को बेताब थे। जुलूस के दौरान शहनाई पर बज रही मातमी धुन सभी लोगों को भावुक कर रही थी।
रवायत के मुताबिक मियां साहब चमचमाती सफेद पैरहन में सबके बीच चल रहे थे। उनके अगल-बगल सफेद और आसानी पोशाक में निजी अंगरक्षक और उनके अपने बावर्दी सिपाही चल रहे थे। जुलूस की शुरुआत इमामबाड़ा इस्टेट के पश्चिमी गेट से हुई, जहां से कमाल शहीद मजार गए और साथियों के साथ फातिहा पढ़ा। फिर जुलूस बक्शीपुर, अलीनगर होते हुए आगे बढ़ा। सड़क के दोनों और और छत पर खड़े लोग जुलूस पर फूल बरसाकर उसका इस्तकबाल कर रहे थे।
जुलूस में युवाओं का शस्त्र कला प्रदर्शन भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था। शाही परचम और घोड़े भी जुलूस की खासियत का अहसास करा रहे थे। जुलूस आगे बढ़ा और बेनीगंज, जाफरा बाजार होते हुए करबला पहुंचा। वहां मियां साहब ने फातिहा पढ़ा और खिराज-ए-अकीदत पेश की। चूंकि उनके जुलूस के आगे-आगे भगवती का जुलूस चल रहा था, इसलिए उस जुलूस के आगे बढ़ने तक मियां साहब ने करबला में ही विश्राम किया। आधे घंटे के विश्राम के बाद जुलूस फिर चला और घासी कटरा, मिर्जापुर, नखास होते हुए दक्षिणी फाटक से इमामबाड़ा इस्टेट में दाखिल हुआ। वहां मियां साहब ने पूर्वजों के लिए फातिहा पढ़ा और उसके बाद जुलूस के संपन्न होने का ऐलान किया।
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इसमें मियां साहब के साथ उनके पुत्र सैयद आतिफ अली शाह व सैयद आयान अली शाह, जुल्फिकार अहमद, मंजूर आलम, इरशाद हाजी अमीरूद्दीन, राजन शाही, शकील शाही, ख्वाजा शमशुद्दीन, हाजी शकील अहमद, कैफ अख्तर, मुमताज अंसारी, आफताब अहमद, नेयाज अहमद, अयाज हुसैन, अजहर समी आदि शामिल रहे।
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रवायत के मुताबिक मियां साहब चमचमाती सफेद पैरहन में सबके बीच चल रहे थे। उनके अगल-बगल सफेद और आसानी पोशाक में निजी अंगरक्षक और उनके अपने बावर्दी सिपाही चल रहे थे। जुलूस की शुरुआत इमामबाड़ा इस्टेट के पश्चिमी गेट से हुई, जहां से कमाल शहीद मजार गए और साथियों के साथ फातिहा पढ़ा। फिर जुलूस बक्शीपुर, अलीनगर होते हुए आगे बढ़ा। सड़क के दोनों और और छत पर खड़े लोग जुलूस पर फूल बरसाकर उसका इस्तकबाल कर रहे थे।
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जुलूस में युवाओं का शस्त्र कला प्रदर्शन भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था। शाही परचम और घोड़े भी जुलूस की खासियत का अहसास करा रहे थे। जुलूस आगे बढ़ा और बेनीगंज, जाफरा बाजार होते हुए करबला पहुंचा। वहां मियां साहब ने फातिहा पढ़ा और खिराज-ए-अकीदत पेश की। चूंकि उनके जुलूस के आगे-आगे भगवती का जुलूस चल रहा था, इसलिए उस जुलूस के आगे बढ़ने तक मियां साहब ने करबला में ही विश्राम किया। आधे घंटे के विश्राम के बाद जुलूस फिर चला और घासी कटरा, मिर्जापुर, नखास होते हुए दक्षिणी फाटक से इमामबाड़ा इस्टेट में दाखिल हुआ। वहां मियां साहब ने पूर्वजों के लिए फातिहा पढ़ा और उसके बाद जुलूस के संपन्न होने का ऐलान किया।
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इसमें मियां साहब के साथ उनके पुत्र सैयद आतिफ अली शाह व सैयद आयान अली शाह, जुल्फिकार अहमद, मंजूर आलम, इरशाद हाजी अमीरूद्दीन, राजन शाही, शकील शाही, ख्वाजा शमशुद्दीन, हाजी शकील अहमद, कैफ अख्तर, मुमताज अंसारी, आफताब अहमद, नेयाज अहमद, अयाज हुसैन, अजहर समी आदि शामिल रहे।