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कालेधन के कुबेरों ने निकाले 285 करोड़
राजीव रंजन, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 07 Apr 2017 01:22 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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छापेमारी और अलग-अलग योजनाओं के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने गोरखपुर और बस्ती मंडल के साथ ही मऊ जिले से 285 करोड़ रुपये का कालाधन बरामद किया है। इसका औपचारिक डाटा भी वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है। गोरखपुर के मशहूर ज्वैलर्स हरि प्रसाद गोपी कृष्ण ने सबसे ज्यादा आठ करोड़ रुपये सरेंडर किए हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह में शहर के पांच कारोबारियोें ने दो करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति जमा कराई है।
मार्च 2017 से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। साथ ही कालाधन घोषित करने के लिए अलग-अलग स्कीम भी लांच कर दी। इसका फायदा जिले के व्यापारी, उद्यमी, ठेकेदार, चिकित्सक और अन्य लोगों ने उठाया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले से 250 करोड़ रुपये सरेंडर हुए हैं। सब कालाधन है। इसका टैक्स नहीं जमा होता था। छापेमारी और सर्वे से 25 करोड़ रुपये बरामद किए गए। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत भी 10 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। यह स्कीम भी कालेधन की घोषणा से संबंधित थी।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर जोन (गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, मऊ, देवरिया और सिद्धार्थनगर) में कालेधन के खिलाफ सफल अभियान चलाया गया। कुशीनगर में एक ठेकेदार से लगभग 11 लाख और एक डॉक्टर से करीब 30 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसी का नतीजा रहा कि बड़ी धनराशि बरामद की जा सकी। जिन लोगों ने कालाधन घोषित किए हैं, उन सबको टैक्स दायरे में लाया जा चुका है।
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इन्होंने भी सरेंडर की धनराशि
राव एमआरआई सेंटर, ड्रेस लैंड, मान्यवर, मत्स्य जीवी सहकारी समिति, सजावट, माया ज्वैलर्स, ओंकार फर्नीचर, गोरखपुर ट्रेडिंग एजेंसी, टिबड़ेवाल, ओमेगा इलेक्ट्रॉनिक्स और भागीरथी पेट्रोल पंप।
अब दंड के प्रावधान
31 मार्च तक कालाधन जमा करने वालों के खिलाफ महज जुर्माने का प्रावधान था। इसके तहत 50 फीसदी राशि तो तत्काल केंद्र सरकार के खाते में जमा कर दी जाती थी, बाकी रकम चार साल के लिए बिना ब्याज के बैंक में जमा करा दी गई। एक अप्रैल से ऐसे मामले में दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स जमा
राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पिछले वित्त वर्ष में गोरखपुर जोन से महज 85 करोड़ रुपये का टैक्स आया था लेकिन इस बार टैक्स वसूली 135 करोड़ रुपये पहुंच गई है। यानी एक वित्त वर्ष में ही 50 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स जमा हुए।
नोटबंदी के बाद करीब 250 करोड़ रुपये सरेंडर किए गए। 35 करोड़ रुपये कालेधन से संबंधित अलग-अलग स्कीम से जमा कराए गए हैं।
- डॉ. अजय शुक्ला, सहायक आयुक्त, आयकर विभाग जांच शाखा, गोरखपुर जोन
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मार्च 2017 से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। साथ ही कालाधन घोषित करने के लिए अलग-अलग स्कीम भी लांच कर दी। इसका फायदा जिले के व्यापारी, उद्यमी, ठेकेदार, चिकित्सक और अन्य लोगों ने उठाया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले से 250 करोड़ रुपये सरेंडर हुए हैं। सब कालाधन है। इसका टैक्स नहीं जमा होता था। छापेमारी और सर्वे से 25 करोड़ रुपये बरामद किए गए। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत भी 10 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। यह स्कीम भी कालेधन की घोषणा से संबंधित थी।
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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर जोन (गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, मऊ, देवरिया और सिद्धार्थनगर) में कालेधन के खिलाफ सफल अभियान चलाया गया। कुशीनगर में एक ठेकेदार से लगभग 11 लाख और एक डॉक्टर से करीब 30 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसी का नतीजा रहा कि बड़ी धनराशि बरामद की जा सकी। जिन लोगों ने कालाधन घोषित किए हैं, उन सबको टैक्स दायरे में लाया जा चुका है।
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इन्होंने भी सरेंडर की धनराशि
राव एमआरआई सेंटर, ड्रेस लैंड, मान्यवर, मत्स्य जीवी सहकारी समिति, सजावट, माया ज्वैलर्स, ओंकार फर्नीचर, गोरखपुर ट्रेडिंग एजेंसी, टिबड़ेवाल, ओमेगा इलेक्ट्रॉनिक्स और भागीरथी पेट्रोल पंप।
अब दंड के प्रावधान
31 मार्च तक कालाधन जमा करने वालों के खिलाफ महज जुर्माने का प्रावधान था। इसके तहत 50 फीसदी राशि तो तत्काल केंद्र सरकार के खाते में जमा कर दी जाती थी, बाकी रकम चार साल के लिए बिना ब्याज के बैंक में जमा करा दी गई। एक अप्रैल से ऐसे मामले में दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टैक्स जमा
राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पिछले वित्त वर्ष में गोरखपुर जोन से महज 85 करोड़ रुपये का टैक्स आया था लेकिन इस बार टैक्स वसूली 135 करोड़ रुपये पहुंच गई है। यानी एक वित्त वर्ष में ही 50 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स जमा हुए।
नोटबंदी के बाद करीब 250 करोड़ रुपये सरेंडर किए गए। 35 करोड़ रुपये कालेधन से संबंधित अलग-अलग स्कीम से जमा कराए गए हैं।
- डॉ. अजय शुक्ला, सहायक आयुक्त, आयकर विभाग जांच शाखा, गोरखपुर जोन