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एमएलसी चुनाव में सपा के कई बागियों ने भी ताल ठोकीं
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2016 12:56 AM IST
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गोरखपुर-महराजगंज स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के घोषित प्रत्याशी की राह में पार्टी के बागी चुनौती पैदा कर रहे हैं। अभी तक सपा से जुड़े रहे चार लोग पर्चा खरीदकर चुनाव मैदान में आने के संकेत दे चुके हैं।
स्थानीय निकाय खाते के एमएलसी चुनाव को लेकर 1990 से तस्वीर बदली थी। तब प्रदेश में जनता दल की सरकार थी और जनता दल की तरफ से चतुर्भुजा सिंह प्रत्याशी थे। उसी दल में होते हुए वीरेंद्र प्रताप शाही बागी अंदाज से चुनाव मैदान में उतर आए और गणेश शंकर पाण्डेय निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ कर जीत गए थे। इसके बाद से वह लगातार तीन बार चुने गए, हालांकि बाद की पारियां राज्य की उस वक्त की सरकार के पार्टी प्रत्याशी के तौर पर आगे बढ़ाई गई थीं।
2010 के चुनाव में गणेश शंकर पाण्डेय बसपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में थे तो सपा ने सीपी चंद को उम्मीदवार बनाया लेकिन तब जयप्रकाश यादव सपा प्रत्याशी के खिलाफ बागी तेवर से उम्मीदवार बन आए और जयप्रकाश के साथ-साथ सीपी चंद को भी हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में सपा ने जयप्रकाश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ सपा के पूर्व प्रदेश सचिव कुंअर प्रताप सिंह, पार्टी के प्रवक्ता रह चुके कालीशंकर, पूर्व जिलाध्यक्ष राम मिलन यादव ने चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। कुअर प्रताप सिंह ने शनिवार को नामांकन भी करा दिया। कालीशंकर और राममिलन यादव का इरादा सोमवार को नामांकन कराने का है। वैसे सपा नेता सीपी चंद ने भी पर्चा खरीदा है, हालांकि उनका अगला कदम साफ नहीं है।
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दूसरी तरफ कभी सपा के करीब रहे एक विधायक अब पूरी तरह से सपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। सपा प्रत्याशी से उनका छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है। वह एक बागी के सरपरस्त हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है कि जिस दल से उनका रिश्ता बना है वह पार्टी भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार रही है। ऐसे में उनके सामने सरपरस्ती में लिए उम्मीदवार भविष्य की उम्मीद बनी पार्टी के प्रत्याशी के बीच स्नेह के बंटवारे की चुनौती खड़ी हो सकती है।
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स्थानीय निकाय खाते के एमएलसी चुनाव को लेकर 1990 से तस्वीर बदली थी। तब प्रदेश में जनता दल की सरकार थी और जनता दल की तरफ से चतुर्भुजा सिंह प्रत्याशी थे। उसी दल में होते हुए वीरेंद्र प्रताप शाही बागी अंदाज से चुनाव मैदान में उतर आए और गणेश शंकर पाण्डेय निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ कर जीत गए थे। इसके बाद से वह लगातार तीन बार चुने गए, हालांकि बाद की पारियां राज्य की उस वक्त की सरकार के पार्टी प्रत्याशी के तौर पर आगे बढ़ाई गई थीं।
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2010 के चुनाव में गणेश शंकर पाण्डेय बसपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में थे तो सपा ने सीपी चंद को उम्मीदवार बनाया लेकिन तब जयप्रकाश यादव सपा प्रत्याशी के खिलाफ बागी तेवर से उम्मीदवार बन आए और जयप्रकाश के साथ-साथ सीपी चंद को भी हार का सामना करना पड़ा था। इस चुनाव में सपा ने जयप्रकाश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ सपा के पूर्व प्रदेश सचिव कुंअर प्रताप सिंह, पार्टी के प्रवक्ता रह चुके कालीशंकर, पूर्व जिलाध्यक्ष राम मिलन यादव ने चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। कुअर प्रताप सिंह ने शनिवार को नामांकन भी करा दिया। कालीशंकर और राममिलन यादव का इरादा सोमवार को नामांकन कराने का है। वैसे सपा नेता सीपी चंद ने भी पर्चा खरीदा है, हालांकि उनका अगला कदम साफ नहीं है।
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दूसरी तरफ कभी सपा के करीब रहे एक विधायक अब पूरी तरह से सपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। सपा प्रत्याशी से उनका छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है। वह एक बागी के सरपरस्त हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है कि जिस दल से उनका रिश्ता बना है वह पार्टी भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार रही है। ऐसे में उनके सामने सरपरस्ती में लिए उम्मीदवार भविष्य की उम्मीद बनी पार्टी के प्रत्याशी के बीच स्नेह के बंटवारे की चुनौती खड़ी हो सकती है।