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मुहम्मद साहब की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 12 Dec 2016 01:46 AM IST
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बच्चों ने जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला।
- फोटो : Rajesh Kumar
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ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों, घरों, मस्जिदों में मिलाद की महफि ल, कुरआन ख्वानी, फ ातिहा ख्वानी व नात ख्वानी हुई। मस्जिदों, दरगाहों, घरों व मुहल्लों को फू ल, समेत रंगबिरंगी रौशनी, इस्लामी झंडों, गुब्बारों और झंडियों से सजाया गया है।
मोहल्ला गाजी रौजा मरहूम काजी नईमुर्रहमान के आहाता में पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ। इसमें मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के मुफ्ती अख्तर हुसैन अजहर मन्नानी ने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव है। हर साल अरबी की 12 तारीख को उनके जन्मदिन की खुशियां मनाई जाती हैं। झंडे लगाए जाते हैं। जुलूस निकाला जाता है। सलातो सलाम की सदाएं हर जुंबा से निकलती हैं। मिठाइयां बांटी जाती हैं। जगह-जगह मिलाद की महफि ल कायम की जाती है। मुसलमानों से गुजारिश है कि शरीयत के दायरे में रहते हुए खुशी मनाएं, झंडे लगाएं, जुलूस निकालें, लेकिन ढोल ताशा और पटाखों वगैरह से परहेज करें। उन्होंने कहा कि बेटियां रहमत हैं। ये अपने मां-बाप को जन्नत दिलाएंगी।
मौलाना रियाजुद्दीन ने कहा कि कमजोरों पर जुल्म ना करो और औरतों की इज्जत करो। हर बड़े का अदब करो। यही पैगाम है हमारे पैगंबर का। शेख झाऊं मस्जिद के इमाम मौलाना फैजुल्लाह कादरी ने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने फ रमाया कि पड़ोसियों के साथ मुहब्बत से रहो। उनके खुशी गम में बराबर से शरीक रहो। इससे पहले नात शरीफ हाफि ज फि रोज, जाकिर शाह, हाफि ज रहमत अली ने पेश की। अध्यक्षता हाफि ज नजरे आलम कादरी ने व संचालन राज आजमी ने किया। इस दौरान काजी वसीमुर्रहमान, काजी इनामुर्रहमान, अब्दुर्रहमान, डॉ. अजीज अहमद, अब्दुल रशीद, सैयद मुमताज अली, सबीहुर्रहमान, एजाज अहमद, उजैर अहमद, वैसुर्रहमान आदि मौजूद थे।
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मोहल्ला गाजी रौजा मरहूम काजी नईमुर्रहमान के आहाता में पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन हुआ। इसमें मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के मुफ्ती अख्तर हुसैन अजहर मन्नानी ने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव है। हर साल अरबी की 12 तारीख को उनके जन्मदिन की खुशियां मनाई जाती हैं। झंडे लगाए जाते हैं। जुलूस निकाला जाता है। सलातो सलाम की सदाएं हर जुंबा से निकलती हैं। मिठाइयां बांटी जाती हैं। जगह-जगह मिलाद की महफि ल कायम की जाती है। मुसलमानों से गुजारिश है कि शरीयत के दायरे में रहते हुए खुशी मनाएं, झंडे लगाएं, जुलूस निकालें, लेकिन ढोल ताशा और पटाखों वगैरह से परहेज करें। उन्होंने कहा कि बेटियां रहमत हैं। ये अपने मां-बाप को जन्नत दिलाएंगी।
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मौलाना रियाजुद्दीन ने कहा कि कमजोरों पर जुल्म ना करो और औरतों की इज्जत करो। हर बड़े का अदब करो। यही पैगाम है हमारे पैगंबर का। शेख झाऊं मस्जिद के इमाम मौलाना फैजुल्लाह कादरी ने कहा कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने फ रमाया कि पड़ोसियों के साथ मुहब्बत से रहो। उनके खुशी गम में बराबर से शरीक रहो। इससे पहले नात शरीफ हाफि ज फि रोज, जाकिर शाह, हाफि ज रहमत अली ने पेश की। अध्यक्षता हाफि ज नजरे आलम कादरी ने व संचालन राज आजमी ने किया। इस दौरान काजी वसीमुर्रहमान, काजी इनामुर्रहमान, अब्दुर्रहमान, डॉ. अजीज अहमद, अब्दुल रशीद, सैयद मुमताज अली, सबीहुर्रहमान, एजाज अहमद, उजैर अहमद, वैसुर्रहमान आदि मौजूद थे।
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